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Bamfaad Movie Review: पहली ही फिल्म में रंग जमाने में सफल रहे आदित्य रावल, शालिनी का मिला शानदार साथ

Fri, 10 Apr 2020 06:58 PM IST
Avinash Pal पंकज शुक्ल, मुंबई
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बम्फाड़ फिल्म रिव्यू - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
मूवी रिव्यू: बम्फाड़
कलाकार: आदित्य रावल, शालिनी पांडे, शिवम मिश्रा, सना अमीन शेख, जतिन सरना, विजय कुमार और विजय वर्मा।
निर्देशक: रंजन चंदेल
निर्माता: जार पिक्चर्स और शाइका फिल्म्स
ओटीटी: ज़ी5
रेटिंग: ***

पिच्चर, सलीमा कहो या फिलिम, थिएटर में देखने का मजा ही कुछ और होता है। उसकी अपनी एक तासीर होती है। वैसे ही, जैसे कानपुर, उन्नाव, इलाहाबाद में कट्टे की होती है। फिल्म बम्फाड़ तमाम सारे नए कलंदरों की फिल्म है। हीरो नया है। हीरोइन नई है। डायरेक्टर नया है। और, ये भी नया है कि इसमें अनुराग कश्यप प्रजेंट्स का ठप्पा पहले आता है। फिल्म बनाई किसने उनकी कुंडली फिल्म खत्म होने के बाद खुलती है। ‘यस’ का ‘नो’ हो जाने से क्या होता है, ये फिल्म खुद बता देती है। वैसे फिल्म की तासीर का मजा बहुत सही तब आता, अगर इसे बनाते समय समझ में ये आ जाता कि 315 बोर के कट्टे को 12 बोर का कट्टा नहीं बताना चाहिए।
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बम्फाड़ - फोटो : सोशल मीडिया
खैर, फिल्म का रिव्यू शुरू करते हैं। वहां से, जहां हमने इसके ट्रेलर के रिव्यू का सिरा छोड़ा था। लड़का वाकई बहुत बम्फाड़ है। बड़ा होके अमिताभ बच्चन बनने के गुण भी रखता है। बड़ा होके अमिताभ बच्चन बनना कहावत है। चिलंटुओं और आसपास की अटक लटक छोड़के जब कोई लड़का आगे बढ़ता है और तदबीर से अपनी तकदीर बदलने की कोशिश करता है तो उन्नाव साइड में कहते हैं, ये बड़ा होके अमिताभ बच्चन बनेगा। कहानी नाटे की भी वैसी ही कुछ है। चाची के बताए सांस्कृतिक कार्यक्रम करते करते जिगर फरीदी के हरम में सांस्कृतिक कार्यक्रम करने लगी नीलम से उसको पहली नजर का प्यार हो जाता है। अब नाटे पगलाए हैं। नीलम भी टहला नहीं रही हैं। और, जिगर फरीदी को पता चल चुका है।
 
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बम्फाड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिर? फिर क्या, लेओ साजिश पे साजिश और राजनीती पे राजनीती। सब एक दूसरे का माठा करने पर उतारू तो हैं, लेकिन इस लपकाझपकी में राइटर ये भूल जाता है कि हीरो कौन, हीरोइन कौन और विलेन कौन? वह क्लाइमेक्स में हीरो को हीरो बनाना भूल जाता है। और, विलेन को विलेन बनाना। नाम हंजाला शाहिद के साथ रंजन चंदेल का भी शामिल है, इस क्राइम में, तो जिम्मेदारी उनकी ज्यादा बनती है। फिल्म बम्फाड़ का टेकऑफ जितना बम्फाड़ है, उतनी ही फ्लाइट और लैंडिंग भी रही होती तो फिल्म वाकई इस साल की कयामत से कयामत तक हो सकती थी। लेकिन, लव जेहाद का बेमतलब का जिक्र करके और धड़क, मैंने प्यार किया जैसी इश्क मोहब्बत वाली फिल्मों के पन्ने पलटती ये फिल्म एक सीक्वेल का रास्ता खोल खुद ही खुल जाती है।
 

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बम्फाड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रंजन चंदेल ने छोटे बजट में बड़ी फिल्म बनाने की कोशिश की, यही उनकी असली जीत है। शुरुआत कर रहे हैं फिल्म जगत में, तो जाहिर है सहारा देने वाले कम और लंगड़ी मारने वाले ज्यादा मिलेंगे। ऐसे ही किसी लंगड़बाज ने उन्हें अनुराग कश्यप का लेबल कवर में लगाने का सजेशन दे दिया और अब सारे रिव्यू इसके अनुराग की फिल्म समझ के ही होंगे। 
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बम्फाड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक्टिंग के मामले में ये पूरी तरह से आदित्य रावल की फिल्म है। शायद ये पहला स्टार किड होगा, देखने वाले जिसमें उनके पिता की छवि नहीं तलाश रहे। नहीं तो अमिषेक बच्चन से लेकर जाह्न्वी कपूर तक सब इसी गज फुट इंच से नापे जा चुके हैं। लड़का वाकई हीरा है। बस जौहरी इसे अब बहुत संभल कर चुनने होंगे और कहानी उससे ज्यादा संभल कर। एक अलग तरह का करंट है आदित्य की एक्टिंग में, जिसे पढ़ने की बजाय देखना ज्यादा  समझदारी का काम है। शालिनी भी अर्जुन रेड्डी वाले अपने सादेपन और शरारती अंदाज के मिक्स्चर के साथ असर छोड़ने में सफल रहीं।
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बम्फाड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बम्फाड़ के दूसरे कलाकारों में विजय वर्मा को पहली बार कायदे का किरदार मिला था, जिसे वह बिल्कुल इरफान खान वाले अंदाज में निभा भी ले गए। लेकिन, समझना उनको ये होगा कि उनका अब टेस्टिंग टाइम शुरू हो चुका है। जिगर फरीदी को देखते फिल्म हासिल की अगर याद आती है, तो ये उनका नुकसान है। बचना जतिन सरना को भी चाहिए बार बार एक जैसे रोल करने से। बाकी कलाकारों में शाहिद जमाल के रोल में विजय कुमार का काम दमदार है, इसी तरह ईमानदार दारोगा चौरसिया के किरदार में संजीव भट्टाचार्य असरदार हैं। राजिब मेहंदी के किरदार में प्रियांक तिवारी, ट्रिपल एक्स सीडी बेचने वाले सनम के रोल में अमरजीत सिंह और वालिया के किरदार में सना अमीन शेख भी अपना काम ईमानदारी से निभा ले गए।
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बम्फाड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी और पटकथा के बाद फिल्म की दूसरी कमजोर कड़ी है इसका संगीत। हीरो अगर संजीदा टाइप हो तो म्यूजिक कैसे फिल्म को सपोर्ट कर सकता है ये प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर से सीखना चाहिए। प्राण पर फिल्माए गए गाने जैसा एक गाना यहां नासिर फरीदी पर और गुलशन बावरा जैसा एक गाना तोता और वालिया पर हो सकता था। विशाल मिश्रा को भी अपने गैरजरूरी इंटेलेक्चुल खोल से बाहर आना चाहिए और कुछ नए गीतकारों को साथ लेकर अवध की रंगत वाला संगीत तैयार करना चाहिए। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में फिल्म बम्फाड़ को मिलते हैं तीन स्टार।
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