फिल्म ‘आंधी’ पता नहीं किस मुहूर्त में बननी शुरू हुई। इसके बनने के पहले से लेकर बनने के बाद तक इसके इतने अफसाने बने कि इन पर अलग से एक फिल्म बन सकती है। फिल्म की शूटिंग के दौरान संजीव कुमार का सुचित्रा सेन पर निछावर हो जाना। गुलजार का बीच बचाव करना। फिर राखी का गुलज़ार से सवाल करना और बात इतनी बढ़ना कि दोनों का ‘बसेरा’ ही साथ न रहना। किसी एक फिल्म ने किसी का घर बिगाड़ दिया हो, ऐसा कम ही सुना गया है। और, किसी एक फिल्म ने अपने अपने हुनर के उस्ताद दो दोस्तों के किस्से बना दिए हों, ऐसा भी कहां सुनने को मिलता है। कमलेश्वर और गुलजार, साहित्य की दो धाराओं के खेवैया रहे हैं। दोनों की नावें अपने अपने किनारों पर कामयाबी की तमाम इबारतें फहरा चुकी हैं। लेकिन, यही एक फिल्म ‘आंधी’ है जिसकी चर्चा जब भी होती है, कमलेश्वर की ‘काली आंधी’ का जिक्र भी आ ही जाता है। दोनों की कहानियां अलग अलग हैं। दोनों के तेवर अलग अलग हैं। लेकिन, सवाल दोनों की लिखावट को लेकर एक ही रहा है, जिसका जवाब देने की गुलजार ने अलग अलग मौकों पर खूब कोशिशें भी कीं।