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Farooq Sheikh: नाम के मुताबिक फारूक बने अदाकारी की सबसे बड़ी कसौटी, इन 10 किरदारों में दिखे अभिनय के सारे सबक

Mon, 25 Mar 2024 10:41 AM IST
दीक्षा पाठक अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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फारूक शेख - फोटो : अमर उजाला

अभिनेता फारूक शेख का नाम आते ही आंखों के सामने मोहक इंसान, संजीदा अभिनेता की छवि उभर कर सामने आती है। फारूक ने जिस सादगी से फिल्मों में किरदार निभाए, उसे देखकर बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं। और, यही बात उन्हें एक उम्दा कलाकार बनाए रही। 25 मार्च 1948 जमींदार परिवार में जन्मे  फारूक शेख के पिता चाहते थे कि वह वकील बने, पिता की ख्वाहिश को पूरी करने के लिए उन्होंने वकालत पढ़ाई तो की, लेकिन राह उन्होंने अभिनय की चुनी। फारुक शेख  ने फिल्म 'गर्म हवा' से अपना डेब्यू किया। बताया जाता है कि फारूक शेख को अभिनय का जुनून ऐसा था कि उन्होंने इस फिल्म के लिए फीस तक नहीं ली। पहली फिल्म से ही फारूक शेख ने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था। 25 मार्च 1948 को अमरोली, वडोडरा (बड़ौदा) में जन्मे फारूक का 65 साल की उम्र में 28 दिसंबर 2013 को दुबई में इंतकाल हुआ। आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके करियर के 10 दमदार किरदारों के बारे में...  

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फिल्म : गर्म हवा (1 मई 1974) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : गर्म हवा (1 मई 1974)

किरदार : सिकंदर मिर्जा 

अभिनेता फारूक शेख ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म 'गर्म हवा' से की।  एमएस सथ्यू के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारत के विभाजन के बाद मुसलमानों की दुर्दशा पर आधारित सबसे सबसे मार्मिक फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में फारूक शेख ने बलराज साहनी के छोटे बेटे सिकंदर मिर्जा की भूमिका निभाई थी। जो अपने अधिकारों के लिए लड़ता है। अपनी पहली ही फिल्म से फारूक शेख ने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था। 

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फिल्म:  शतरंज के खिलाड़ी (3 अक्टूबर 1977) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म:  शतरंज के खिलाड़ी (3 अक्टूबर 1977)

किरदार : अकील 

सत्यजित रे के निर्देशन में बनी फिल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' की कहानी अवध के नवाब वाजिद अली शाह और शतरंज के खेल मे पागल दो मंत्रियों मिर्जा  सज्जाद अली और मीर रोशन अली के इर्द-गिर्द घूमती है। नवाब एक बेपरवाह कलाप्रेमी होता है जिसे बाद में अंग्रेजी सेना परास्त कर देती है। इस फिल्म  में अवध के नवाब वाजिद अली शाह की भूमिका अमजद खान, मिर्जा  सज्जाद अली की भूमिका संजीव कुमार और मीर रोशन अली की भूमिका सईद जाफरी ने निभाई थी। इस फिल्म में फारूक शेख का भी एक छोटा सा किरदार अकील का निभाया था, जिसमें उन्होंने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से जान फूंक दी थी।

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फिल्म : गमन (2 मई 1978) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : गमन (2 मई 1978)

किरदार : गुलाम हसन

फिल्म 'गमन' मुजफ्फर अली के निर्देशन में  बनी पहली फिल्म थी। इस फिल्म में  फारूक शेख ने गुलाम हसन का किरदार निभाया था, जो उत्तर प्रदेश के बदायूं से मुंबई जैसे बड़े शहर में टैक्सी चला कर जीवन यापन करने की कोशिश करता है। इस फिल्म में स्मिता पाटिल ने फारूक शेख की पत्नी खैरुन की भूमिका निभाई थी। गुलाम हसन अपनी बीमार मां और पत्नी  को छोड़ कर मुंबई आया है, लेकिन कड़े संघर्ष के बाद ही इतने पैसे इकट्ठा नहीं कर पाता है कि वापस अपने परिवार से मिलने जा सके। इस फिल्म के माध्यम से उत्तर प्रदेश से मुंबई आए एक प्रवासी की कहानी को मुजफ्फर अली ने बहुत ही गहराई से पेश किया और फारूक शेख ने गुलाम हसन का किरदार को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था। 

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फिल्म : नूरी  (11 मई 1979)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : नूरी  (11 मई 1979) 

किरदार : युसूफ फकीर मोहम्मद

देखा जाए तो सही मायने में फारूक शेख को पहचान यश चोपड़ा की फिल्म 'नूरी' से मिली। इस फिल्म का निर्माण यश चोपड़ा और निर्देशन मनमोहन कृष्ण ने किया था। फारूक शेख ने इस फिल्म में युसूफ फकीर मोहम्मद की भूमिका निभाई थी, जिसे नूरी से इश्क हो जाता है और नूरी से उसकी शादी भी तय हो जाती है, लेकिन किसी कारणवश शादी नहीं हो पाती है। इस फिल्म में नूरी की भूमिका पूनम ढिल्लों ने निभाई थी। यह फिल्म भारत में सुपरहिट थी ही, साथ ही उस समय चीन में सबसे सफल भारतीय फिल्मों में से एक रही है।

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फिल्म : उमराव जान (2 जनवरी 1981)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : उमराव जान (2 जनवरी 1981) 

किरदार : नवाब सुल्तान

फिल्म 'गमन' के बाद मुजफ्फर अली के निर्देशन में फारूक शेख ने फिल्म 'उमराव जान' में दूसरी बार काम किया। इस फिल्म में फारूक शेख ने नवाब सुल्तान का किरदार निभाया था, जिसे उमराव जान से पहली नजर में ही प्यार हो जाता है। इस फिल्म की कहानी  भले ही रेखा द्वारा निभाए गए किरदार उमराव जान के इर्द-गिर्द घूमती है लेकिन फारूक शेख ने अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्टिंग से इस फिल्म में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई थी। फिल्म में उनके नवाबी लहजे की दर्शकों ने काफी तारीफ की थी। फारूक शेख  के करियर की यह सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है। इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट रहे हैं ।  

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फिल्म : चश्मे बद्दूर (8 मई 1981)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : चश्मे बद्दूर (8 मई 1981) 

किरदार : सिद्धार्थ पाराशर

फिल्म 'चश्मे बद्दूर' की कहानी तीन दोस्तों सिद्धार्थ पाराशर, ओमी शर्मा  और जोमो लखनपाल  के इर्द- गिर्द घूमती है। तीनों दोस्त  करीबी दोस्त और रूममेट हैं जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं। सिद्धार्थ पाराशर को नेहा राजन नाम की लडकी से प्यार हो जाता है। सईं परांजपे  के निर्देशन में बनी इस फिल्म में  फारूक शेख ने सिद्धार्थ पाराशर और दीप्ति नवल ने  नेहा राजन नाम की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रेखा ने अतिथि भूमिका निभाई थी।  

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फिल्म : बाजार (21 मई 1982)   - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : बाजार (21 मई 1982)  

किरदार : सरजू

सागर सरहदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'बाजार' में खाड़ी में अमीर प्रवासी भारतीयों को जरूरतमंद माता-पिता द्वारा बेची गई एक युवा लड़की की त्रासदी को दिखाया गया था। यह फिल्म भारत में दुल्हन खरीदने के मुद्दे पर प्रकाश डालती है। इस फिल्म में  फारूक शेख ने सरजू का किरदार निभाया था, जिसे शबनम नाम की लडकी से प्यार हो जाता है और उससे शादी करना चाहता है, लेकिन कई तरह की दिक्कतों का उसे सामना करना पड़ता है। इस फिल्म में 'शबनम' का किरदार सुप्रिया पाठक ने निभाया था। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और  स्मिता पाटिल की भी प्रमुख भूमिका रही है।

 

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फिल्म : रंग  बिरंगी (23 अप्रैल 1983)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : रंग  बिरंगी (23 अप्रैल 1983) 

किरदार : प्रोफेसर जीत सक्सेना

ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'रंग बिरंगी'  दो दोस्तों की कहानी है, जिनमें से एक अपने दोस्त की शादीशुदा जिंदगी में रस भरने के लिए एक मजाक करता है पर फिर खुद ही उसका शिकार बन जाता है। इस फिल्म में फारूक शेख ने प्रोफेसर जीत सक्सेना की भूमिका निभाई थी। यह एक  मल्टीस्टारर फिल्म थी जिसमें फारूक शेख के अलावा  अमोल पालेकर, दीप्ति नवल, परवीन बाबी, उत्पल दत्त, देवेन वर्मा, ओम प्रकाश और राज बब्बर की मुख्य भूमिकाएं थी। 

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फिल्म : किसी से न कहना (8 जुलाई 1983)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : किसी से न कहना (8 जुलाई 1983) 

किरदार : रमेश त्रिवेदी

फिल्म 'किसी से न कहना  ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी। इस फिल्म में फारूक शेख, दीप्ति नवल और उत्पल दत्त की मुख्य भूमिकाएं थी। इस फिल्म में फारूक शेख ने रमेश त्रिवेदी नाम का किरदार निभाया था, जिसे रमोला से प्यार हो जाता है और उससे शादी करना चाहता है, लेकिन रमेश के पिता  घर में ऐसी बहू लाना चाहते हैं, जो अंग्रेज़ी न जानती हो, रमोला  काफी पढ़ी-लिखी लड़की है। रमोला से शादी करने के लिए रमेश अपने पिता के दोस्त की मदद लेता है और फिर शुरू होता है एक के बाद एक झूठ का सिलसिला। इस फिल्म में फारूक शेख और दीप्ति नवल की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। फिल्म में छोटे-छोटे हास्य दृश्य को  फारूख  शेख ने अपने अंदाज में जीवंत कर दिया था।

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फिल्म : बीवी हो तो ऐसी ( 26 अगस्त 1988)  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म : बीवी हो तो ऐसी ( 26 अगस्त 1988) 

किरदार : सूरज भंडारी

फिल्म 'बीवी हो तो ऐसी' सलमान खान की डेब्यू फिल्म थी।  जे के बिहारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में फारूक शेख और रेखा की लीड भूमिका थी। इस फिल्म में फारूक शेख ने सूरज भंडारी की भूमिका निभाई थी, जो अपनी पत्नी रेखा और मां बिंदु के बीच होने वाले तकरार में फंस जाता है। जहां एक तरफ घर की सास अपनी बादशाहत खत्म नहीं होने देना चाहती, तो बहू भी सास की हिटलरशाही को खत्म करना चाहती है। एक बेचारे इंसान के किरदार को फारूक ने बड़ी की संजीदगी से निभाया है।

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