विवेक रंजन अग्निहोत्री
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विवेक अपनी अगली पोस्ट में लिखते हैं, 'अपने आप को एक गैंगस्टा यहूदी बस्ती में कल्पना करना होता है, जहां आपको बिना बंदूक या चाकू के एक गैंगस्टर की तरह व्यवहार करना होगा। यह वह जगह है जहां आप अपमान और शोषण के लिए खुले हैं। इंस्टाग्राम फ्री नहीं है। यह शूटिंग के लिए पैसे की मांग करता है, अच्छा दिखता है, व्यस्त लगता है। मान्यता की यह खोखली दौड़ आपको वापस वहीं ले आती है जहां से आपने शुरुआत की थी- डार्क होल, जो हर दौड़ के साथ और गहरा होता जाता है। तुम दिखावा करो, कोई नहीं देखता। तुम चिल्लाते हो, कोई नहीं सुनता। तुम रोओ, किसी को परवाह नहीं है। आप जो कुछ भी पाते हैं वह आप पर हंसने वाले लोगों से घिरा होता है।'