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Taj Reign of Revenge: ताज की खूनी कहानी का दूसरा सीजन रिलीज को तैयार, जानिए पहले सीजन में अब तक क्या हुआ

Wed, 10 May 2023 07:04 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जी5 की वेब सीरीज 'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' के बाद अब इस सीरीज का दूसरा सीजन ‘ताज: रेन ऑफ रिवेंज' 12 मई से स्ट्रीम होने जा रहा है। इस सीजन के ट्रेलर के मुताबिक इस बार सलीम की अपने पिता अकबर के खिलाफ बगावत ही कहानी का मुख्य आधार होगी। इस सीजन में सलीम खुद को सियासत का उत्तराधिकारी घोषित करता दिखाई देगा। सीजन दो में इतिहास के पन्नों में दबी कुछ और कहानियां उजागर होंगी, इससे पहले आइए जानते हैं कि पहले सीजन में क्या-क्या हुआ?
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' के पहले सीजन में 10 एपिसोड हैं। कहानी की शुरुआत युवा अकबर से होती है। कई जंग फतह करने के बाद उसके जीवन में सिर्फ एक ही कमी है और वह कमी है मुगलिया सल्तनत के वारिस की। तीन निकाह करने के बाद अकबर को कोई औलाद नहीं। शेख सलीम चिश्ती की दुआ से अकबर के तीन बेटे होते हैं। इनके बड़े होने पर अकबर के सामने समस्या यह होती है कि मुगलिया तख्त का वारिस कौन होगा?
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अकबर को भी जब मुगलिया सल्तनत का बादशाह बनाया जाता है, तो उसके छोटे भाई मिर्जा हाकिम को उसकी बादशाहत पसंद नहीं। अकबर का कहना है कि जिस भाई के साथ बचपन में खेले कूदे और एक-दूसरे से बहुत प्यार था, लेकिन बड़े होने के बाद भाई ही भाई का सबसे बड़ा दुश्मन हो जाता है। इतिहास इस बात को न दोहराए इसलिए अकबर फैसला करते हैं कि मुगलिया तख्त का वारिस उसकी काबिलियत देख कर चुना जाएगा। सबसे पहले पैदा होना किसी इंसान को ताज पहनने का हकदार नहीं बना सकता है।  

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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सीरीज की कहानी आगे बढ़ती है और अकबर के इस फैसले के बाद तीनों बेटों के बीच इस बात की दावेदारी शुरू हो जाती है कि तख्त का असली वारिस कौन होगा? बड़ा बेटा सलीम हमेशा नशे में धुत हरम की कनीज के साथ अय्याशी में डूबा रहता है। मंझला बेटा मुराद बहादुर है, उसे लड़ाई  के सारे तौर तरीके पता है, लेकिन उसके अंदर रहम नहीं है और सबसे छोटा बेटा दनियाल पांचों वक्त का नमाजी है। 
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपने बेटों की परीक्षा के लिए अकबर ‘ताज डिवाइडेट बाय ब्लड’में अपने तीनों बेटों को एक टास्क देता है, जिसमें मुराद विजयी होता है। इधर, अकबर का छोटा भाई मिर्जा काबुल से हिंदुस्तान आकर आक्रमण की तैयारी कर रहा होता है, उसे रोकने के लिए अकबर अपने बेटों को भेजता है। काबुल हमले के लिए भेजी गई सेना की कमान मुराद के हाथों में होती है। तीनों भाई काबुल में अपने चाचा के महल पर हमला कर देते हैं। एक लंबी लड़ाई के बाद उनको जीत मिलती है। फूफी पकड़ी जाती है। मिर्जा अपने बेटों के साथ वहां से भाग जाता है।
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सीरीज की कहानी के मुताबिक अकबर की कोशिश यही रहती है कि किसी तरह से सलीम को अपनी जिम्मेदारी का एहसास हो, मुराद रहमदिल बने और दानियाल लड़ाई के तौर तरीके को समझ सके, लेकिन अकबर की अपेक्षाओं पर कोई भी खरा नहीं उरता है। सलीम को तख्त का लालच नहीं है। अकबर दीन-ए- इलाही पंथ की शुरुआत करता है। उसका मानना है कि मजहब के नाम पर एक-दूसरे का खून बहाना बंद होना चाहिए। तलवार के जोर पर लोगों का मजहब नहीं बदलना चाहिए, कोई किसी भी जाति धर्म का हो, सबको समान अधिकार मिलना चाहिए। मुगलिया सल्तनत के लिए ऐसा ही बादशाह चाहिए, जो इस सब बातों का ख्याल रख सके। 
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
काबुल जीतने के बाद भी अकबर वहां की सत्ता अपनी बहन बख-उन- निसा को सौंप देता है। काबुल की लड़ाई अकबर के मंझले बेटे मुराद ने जीती थी, उसे लगा कि अकबर खुश होकर वहां की सत्ता उसे देंगे। लेकिन अकबर का मानना है कि सिर्फ एक लड़ाई जीत लेने से कोई बाबर नहीं बन जाता है, सत्ता संभालने के लिए आवाम की जरूरतों का भी ख्याल रखना आना चाहिए। खानदानी रंजिश बिना सैकड़ों लोगों के कत्ल और खून खराबे के खत्म नहीं होती है, लेकिन पहले कोशिश करनी चाहिए कि बातचीत से ऐसे मसले हल हो जाए। 
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : सोशल मीडिया
उधर, कहानी एक और लीक पर भी चलती रहती है। 14 साल की उम्र से अकबर ने अनारकली को अपने हरम में कैद करके रखा है। अकबर का जब मन करता है, अनारकली से हरम में मिलने जाता है। सलीम और अनारकली की मुलाकात होती है और दोनो में प्यार होता है, लेकिन जब अकबर को इस बारे में पता चलता है, तो सलीम को सल्तनत से बेदखल कर देता है और अनारकली से मिलने की मदद करने के जुर्म में दुर्जन सिंह को फांसी की सजा और अनारकली को दीवार में चुनवा देता है।
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'ताज: डिवाइडेड बाय ब्लड' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिर ये भी खुलासा होता है कि अकबर का तीसरा बेटा दानियाल अनारकली का बेटा है। दानियाल को यह बताया गया था कि जन्म के समय ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी। वह अपनी मां की तस्वीर संभालकर रखे हुए है। जब भी वह परेशान होता है तो अपनी मां की तस्वीर देखता रहता है। उसे पता चलता कि अनारकली ही उसकी मां है, तो उसे अपनी मां से इतनी नफरत हो जाती कि वह उसकी हत्या करना चाहता है। महल से भाग निकली अपनी मां अनारकली की दनियाल हत्या करता है। वह सलीम की भी हत्या कर देता है। एक साजिश के तहत मुराद की पहले ही हत्या हो चुकी है अब सल्तनत का इकलौता वारिस दानियाल बचता है।
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