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थिएटर बनाम ओटीटी की बहस को ताहिर ने बताया बेमतलब, बोले- 'साथ साथ दोनों का होता रहेगा विकास'

Fri, 29 Jan 2021 10:13 AM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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ताहिर राज भसीन
साल की पहली मेगाबजट हिंदी फिल्म ‘83’ की रिलीज का इंतजार कर रहे अभिनेता ताहिर राज भसीन जल्द ही बड़ा सिक्सर मारने वाले हैं। ताहिर को ओटीटी के लिए एक धमाल प्रोजेक्ट ऑफर हुआ है और उन्होंने इसके लिए हां भी कर दी है। इसका आधिकारिक एलान होने से पहले वह अपनी तेजी से बन रही फिल्म ‘लूप लपेटा’ पूरी करने में लगे हैं।
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tahir raj bhasin - फोटो : amar ujala
ताहिर राज भसीन की इस साल तीन कहानियां रिलीज होने वाली हैं! फिल्म ‘83’ में वह रणवीर सिंह के साथ नजर आएंगे और फिल्म ‘लूप लपेटा’ में उनकी जोड़ी तापसी पन्नू के साथ बनी है। इसके साथ ही एक बड़े ओटीटी प्रोजेक्ट की घोषणा भी जल्द ही होने वाली है। ताहिर मानते हैं कि ये सभी अभिनेताओं के लिए खुद को प्रकट करने का सबसे अच्छा दौर है क्योंकि आज के ज़माने में अलग-अलग तरह के कई माध्यम उपलब्ध हैं जिसके जरिए कोई भी हुनरमंद कलाकार शोहरत हासिल कर सकता है।
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ताहिर राज भसीन और सुनील गावस्कर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
ताहिर कहते हैं, "मैं 'लूप लपेटा' और '83' के साथ-साथ अपने ओटीटी प्रोजेक्ट की रिलीज़ को लेकर बेहद उत्साहित हूं, जिस पर अभी काम चल रहा है। एक्टिंग के लिहाज से देखा जाए तो यह दौर वाकई शानदार है क्योंकि आज फिल्म कलाकारों के पास काम करने के लिए कई तरह के माध्यम उपलब्ध हैं। सिनेमाघरों के लिए बनी कहानियों को ओटीटी पर भी लोग पसंद कर रहे हैं। खास ओटीटी के लिए बनी कहानियों के कलाकारों के काम की भी तारीफें हो रही हैं।”

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Tahir Raj Bhasin - फोटो : Social Media
ताहिर कहते हैं कि इन दोनों माध्यमों का उद्देश्य बिल्कुल अलग हैं इसके बावजूद वे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर सकते हैं। वह कहते हैं, "ओटीटी एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए स्टोरी को क्रमानुसार दिखाया जाता है जबकि थिएटर्स में दर्शकों को 120 मिनट का सिनेमाई अनुभव मिलता है। इन दोनों माध्यमों के मिलने से अभिनेताओं के साथ साथ कहानी कहने वालों को भी दर्शकों तक पहुंचने में मदद मिली है और इसी वजह से पिछले साल चारदीवारी में कैद रहने की मजबूरी के बावजूद हम दर्शकों तक पहुंचने में कामयाब रहे।”
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Tahir Raj Bhasin - फोटो : Social Media
सिनेमाघरों में दर्शकों की वापसी के सवाल पर ताहिर कहते हैं, "शहरों की परिस्थितियां धीरे धीरे सुरक्षित हो रही हैं और दर्शक थिएटर की ओर वापस लौट रहे हैं। ऐसे हालात में दोनों ही माध्यम साथ-साथ आगे बढ़ते रहेंगे और मुझे नहीं लगता कि थिएटर बनाम ओटीटी का मुद्दा ज्यादा दिनों तक टिक पाएगा। आने वाले दिनों में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उन फ़िल्मों के संग्रहालय के रूप में काम करेंगे जिनका दर्शकों ने थिएटर में आनंद लिया है और इस तरह लोग अपनी पसंदीदा फ़िल्मों को कभी भी देखने का भरपूर लुत्फ़ उठा पाएंगे।”
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