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बॉलीवुड: एफएम चैनल वाला बउआ चला खेतों की ओर, आरजे रौनक ने किसानों की कामयाबी में पाई दिलचस्प कहानियां

Mon, 26 Jul 2021 07:40 PM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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आरजे रौनक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एफएम रेडियो चैनलों के जरिए घर घर मशहूर हुए चुनिंदा किरदारों में से एक है बउआ। ये इतना मशहूर है कि शाहरुख खान ने जब फिल्म ‘जीरो’ बनाई तो उसमें अपना नाम बउआ ही रख लिया। रेडियो पर ये किरदार रेडियो जॉकी यानी आरजे रौनक निभाते हैं। अनजान लोगों को फोन करते हैं, उन्हें परेशान करते हैं, गालियां खाते हैं, लेकिन श्रोताओं को हंसाने में अक्सर कामयाब ही रहते हैं। बउआ अब बड़े काम करने निकला है। कम लोगों को ही पता होगा कि बउआ यानी आर जे रौनक बिजनेस स्कूल से पासआउट हैं। पहले आरजे बनने के लिए उन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ी और अब वह खेती किसानी करने निकल पड़े हैं। कहते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ‘मन की बात’ ने उनका मनका मनका बदल डाला है।
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आरजे रौनक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आरजे रौनक ने पहले लॉकडाउन के समय 'भारत इज बेस्ट' की शुरुआत की।  'भारत इज बेस्ट' आसपास के लोगों के जीवन को प्रभावित करने के लिए एक अभियान है और इसका मुख्य मकसद है खेती। रौनक के मुताबिक भारत की लगभग 58 फीसदी आबादी के लिए कृषि ही आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। टीम 'भारत इज बेस्ट' (BIB) ने देश के कोने-कोने से प्रगतिशील और उद्यमी किसानों का चयन किया और उनके साथ मिलकर वीडियो शूट किए जो हर रविवार रौनक के सोशल मीडिया चैनलों पर प्रसारित किए जाते हैं।
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आरजे रौनक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
'भारत इज बेस्ट'  अभियान के बारे में आरजे रौनक कहते हैं, "बीआईबी हमारी एक व्यक्तिगत पहल है। हम अपने देश की जिन कहानियों से सीख सकते थे और जो अत्यधिक प्रेरक थीं, हम उन्हें इन वीडियो के माध्यम से दूसरे किसानों और कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों तक पहुंचा रहे हैं। कुछ किसानों को सुपरफूड उगाने में सफलता मिली, कुछ को खाद्य प्रसंस्करण में मूल्यवर्धन के साथ कामयाबी मिली। कुछ किसानों ने कृषि उत्पादों के निर्यात का तोड़ निकाला तो कुछ को जैविक और औषधीय खेती में आनंद और धन दोनों आ रहा है। अब तक हमने 11 राज्यों के 26 किसानों के वीडियो प्रदर्शित किए हैं।"

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आरजे रौनक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
'भारत इज बेस्ट' से पहले पिछले साल रौनक ने 'ये दीवाली, किसानों वाली' मुहिम की शुरुआत की। इसमें टीम बीआईबी ने किसानों से कच्चा माल खरीदा, उससे कुकीज़ बनाई, और उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचा। कई कुकीज भारतीय सेना के जवानों को भी वितरित किए गए। मिशन मशरूम नामक एक अन्य पहल भी इसी दौरान की गई। इस पहल में मशरूम की खेती को प्रोत्साहित किया गया। जानकारी के मुताबिक रौनक और टीम बीआईबी ने गुजरात के कच्छ और सूरत में मॉडल फार्म विकसित किए हैं।
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आरजे रौनक - फोटो : फेसबुक
रौनक कहते हैं, “मैं ऐसे और मॉडल फार्म विकसित करना चाहता हूं। मैं महात्मा गांधी के इस कथन पर दृढ़ विश्वास करता हूं कि व्यक्ति को वह परिवर्तन स्वयं में लाना होगा, जो वह इस दुनिया में देखना चाहता है। मुझे उम्मीद है कि अधिक से अधिक युवा आगे आएंगे और हमारा देश सच्चे अर्थों में आत्मानिर्भर बनेगा।”
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