arvind trivedi
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स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैं अभी कुछ कदम ही चला था कि रामानंद जी ने खुशी से चहकते हुए कहा, "बस, मिल गया मुझे मेरा लंकेश। यही है मेरा रावण।" मैं चौंककर इधर-उधर देखने लगा कि मैंने तो डायलॉग भी नहीं बोले और यह क्या हो गया? जब मैंने उनसे पूछा, तो वह बोले, "मुझे मेरा रावण ऐसा चाहिए, जिसमें सिर्फ शक्ति ही न हो, बल्कि भक्ति भी हो। वह विद्वान है, तो उसके चेहरे पर तेज हो। अभिमान हो और मुझे सिर्फ तुम्हारी चाल से ही यह विश्वास हो गया कि तुम इस किरदार के लिए सही हो।"