नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह
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रत्ना ने यह भी कहा, "वे हम भारतीयों को एक-दूसरे से ऐसे लड़वा रहे हैं। जैसे स्कूल के खेल के मैदान में बच्चे लड़ते हैं। कैसे गुंडे कमजोर बच्चों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। क्या हम उनके जैसे बनना चाहते हैं? नहीं। मैं गुंडे नहीं बनूंगी, न ही मैं अपने बच्चों को गुंडे बनने दूंगी, जिस किसी पर भी मेरा प्रभाव होगा, मैं उनसे कहूंगी, 'हम गुंडे नहीं बन सकते।"