विनोद खन्ना
खुद फिरोज खान ने एक बार इसका जिक्र किया था कि साल 1980 में रिलीज हुई हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड बनाने वाली कुर्बानी सबसे पहले अमिताभ बच्चन को ऑफर हुई थी। फिरोज खान की मंशा थी कि वह फिल्म कुर्बानी में अमर का रोल करें, ये रोल बाद में विनोद खन्ना ने किया। अमिताभ बच्चन के पास तब छह महीनों तक तारीखें नहीं थी और वह चाहते थे कि फिरोज खान इतना इंतजार करें उनके लिए। लेकिन, फिरोज खान का अंदाज ही निराला है। वह जब जो चाहते हैं, वही करते हैं। फिल्म कुर्बानी के लिए जो कुछ उन्होंने किया वह उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में पागलपन समझा जाता था। फिल्म में उन्होंने एक असली मर्सिडीज कार तहस नहस कर दी थी, ये वो समय था जब हिंदुस्तान में महंगी से महंगी गाड़ियां रखने वालों ने भी भारत की सड़कों पर मर्सिडीज नहीं देखी थी।
कुर्बानी राजेश और अमर की कहानी है, दोनों शीला को प्यार करते हैं। दोनों की दोस्ती और गलतफहमियों की भी ये कहानी है। दोनों अलग अलग धाराओं से आते हैं। राजेश जब जेल में होता है तो उसकी गर्लफ्रेंड शीला को अमर मिलता है। अमर की पत्नी मर चुकी है और वह अपनी बेटी की देखभाल में ज्यादातर वक्त बिताता है। जेल से छूटने के बाद जब राजेश की अमर से मुलाकात होती है, तब शीला असली बात नहीं बताती है। दोनों एक आखिरी अपराध की प्लानिंग करते हैं, जिसमें राजेश फंस जाता है और अमर अपनी बेटी और शीला को लेकर लंदन पहुंच जाता है। राजेश को लगता है कि उसके साथ धोखा हुआ है। वह बदला लेने लंदन पहुंचता है तो उसे असल बात पता चलती है। लेकिन, तब तक दोनों का खतरनाक दुश्मन विक्रम वहां पहुंचता है, वह राजेश को मारना चाहता है लेकिन अमर अपनी जान देकर राजेश, शीला और अपनी बेटी को बचा लेता है।