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EXCLUSIVE: मृत्युशय्या पर लेटे पिता से मिले ‘रावण’ के असली मंत्र, प्रतीक गांधी ने बताया भावुक किस्सा

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भवई- प्रतीक गांधी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
14 साल लगे अभिनेता प्रतीक गांधी को बीते साल की सबसे हिट हिंदी सीरीज ‘स्कैम 1992’ में मुख्य किरदार निभाने का मौका पाने के लिए। और, जैसे उनकी रंगमंच के दिनों की सारी तैयारी इसी एक दिन के लिए थी। डिजिटल मनोरंजन सामग्री यानी ओटीटी सीरीज से जुड़े तकरीबन सारे पुरस्कार वह जीत चुके हैं और अब पहली बार किसी हिंदी फिल्म में वह बतौर मुख्य कलाकार दिखने वाले हैं अपनी अगली फिल्म ‘भवई’ में। इस फिल्म का नाम पहले ‘रावणलीला’ था लेकिन जनमानस के भावों को देखते हुए फिल्म के निर्माताओं ने इसका नाम मंगलवार को बदलकर ‘भवई’ कर दिया। फिल्म का ट्रेलर पहले ही सोशल मीडिया पर हिट हो चुका है और प्रतीक गांधी को उम्मीद है कि पूरे देश में फिल्म को भी दर्शकों से इतना ही प्यार मिलेगा।
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प्रतीक गांधी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रतीक गांधी गुजराती रंगमंच का बड़ा नाम रहे हैं। नृत्य नाटिकाओं में उन्हें महारत हासिल है। फिल्म ‘भवई’ में वह एक ऐसे भोले भाले युवक के किरदार में हैं जिसे गांव में आई रामलीला मंडली रंगमंच पर अभिनय के लिए चुन लेती है। किरदार उन्हें रावण का मिलता है और निजी जीवन में यह किरदार सीता का किरदार कर रही युवती पर मोहित हो जाता है। ‘अमर उजाला’ से एक एक्सक्लूसिव मुलाकात में प्रतीक बताते हैं, ‘मेरा पूरा परिवार कला क्षेत्र से जुड़ा रहा है। अध्यापन मेरे परिवार का प्रिय पेशा रहा लेकिन संगीत और नृत्य से सभी को लगाव था। पिताजी भरतनाट्यम के प्रशिक्षित नर्तक रहे और मैं बहुत छोटा था तो उन्होंने एक नृत्यनाटिका में रावण का अभिनय किया था। मेरे मन में रावण की वह छवि अब तक वैसी ही छपी हुई है।’
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फिल्म भवई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपने पिता के बारे में जिक्र चलने पर प्रतीक भावुक हो जाते हैं। कहते हैं, ‘फिल्म ‘भवई’ में जब मुझे रंगमंच पर रावण का किरदार करने का मौका मिला तो उन दिनों पिताजी की तबीयत ठीक नहीं थी। लेकिन तब भी उन्होंने मुझे इस किरदार के बारे में काफी कुछ बताया। मेरे पास भी इस चरित्र को लेकर काफी सवाल थे। हमारी इस किरदार को लेकर लंबी चर्चाएं हुईं। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही मैंने अपने पिताजी को खो दिया और इस फिल्म के चरित्र को लेकर मेरी उनसे जो चर्चा हुई, वह मेरे जीवन की सबसे अनमोल याद के तौर पर अब मेरे पास है।’

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डेढ़ बीघा जमीन में प्रतीक गांधी और खुशाली कुमार - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रतीक गांधी को इसके पहले हिंदी सिनेमा की दो फिल्मों ‘लव यात्री’ और ‘मित्रों’ में भी देखा जा चुका है। फिल्म ‘भवई’ उनकी बतौर लीड हीरो पहली हिंदी फिल्म है। गुजराती सिनेमा के वह स्टार अभिनेता रहे हैं और उनकी एक गुजराती फिल्म ‘रॉन्ग साइड राजू’ को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रतीक ने रंगमंच पर अपना करियर साल 2005 में और सिनेमा में अपना करियर उसके अगले साल यानी 2006 में शुरू किया। प्रतीक अब तक नौ गुजराती फिल्में, एक दर्जन से अधिक गुजराती नाटक, दो अंग्रेजी फिल्में और दो हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं।
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फिल्म भवई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रतीक की बतौर लीड हीरो पहली हिंदी फिल्म ‘रावणलीला’ का नाम बदलकर ‘भवई’ किए जाने के बारे में फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर कहते हैं, ‘इस फिल्म का नाम बदलकर मैंने फिल्म के भागीदारों और हमारे दर्शकों की इच्छाओं का सम्मान किया है। लोगों ने फिल्म को लेकर इतनी जो चर्चा की, उससे लगता है कि अच्छा सिनेमा बदलते वक्त की जरूरत है। सिनेमा लोगों के मनोरंजन के लिए है और हमारी फिल्म भी इसीलि बनी है। प्रतीक को उनके काम के लिए दर्शकों से बहुत प्यार मिला और हम उम्मीद करते हैं कि ये प्यार इस फिल्म में और कई गुना होकर हमें फिर से मिलेगा।’ फिल्म ‘भवई’ 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
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