पंकज उधास
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अनूप जलोटा कहते हैं, 'मेरी, पंकज (उधास ), तलत (अजीज) की तिकड़ी हुआ करती करती थी। हमारी बहुत गहरी यारी थी। हम साथ में कार्यक्रम तो करते ही थे, इसके अलावा एक साथ काफी वक्त बिताते थे। पंकज ने गजल गायकी को बड़े आसान तरीके से लोगों के बीच पहुंचाया है। वह बीमार थे, इस बात की जानकारी मुझे थी, लेकिन इतनी जल्दी हमारे बीच से चले जाएंगे, यह नहीं सोचा था। मेरे लिए यह विश्वास करना बहुत मुश्किल हो रहा है, लेकिन अब वह हमारे बीच नहीं रहे।'