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Podcast: 80 साल की बुजर्ग महिला की मुस्कुराहट पर पंकज त्रिपाठी कुर्बान, सुनिए पूरा किस्सा उन्हीं की जुबानी

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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
पंकज त्रिपाठी यानी बस नाम ही काफी है। उनकी संवाद अदायगी का जमाना दीवाना रहा है। और, परदे पर उनका चेहरा देखने के लिए लाखों लोग दीवाने रहते ही हैं। लेकिन इनमें से पंकज त्रिपाठी के लिए सबसे खास हैं 80 साल की वह बुजुर्ग महिला जिनका किस्सा पंकज त्रिपाठी ने एक ऑडियो इंटरव्यू में सुनाया है। अपनी दमदार अदाकारी के बूते अपनी एक खास जगह हिंदी सिनेमा में बनाने में कामयाब रहे अभिनेता पंकज त्रिपाठी अगले हफ्ते रिलीज हो रही फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में एक पुलिस अफसर के रोल में दिखने वाले हैं। निजी जिंदगी में भी पंकज का पुलिस से बहुत पुराना रिश्ता रहा है। तमाम आईपीएस अफसर उनके निजी दोस्त हैं। उनकी कहानियां और किस्से पंकज के लिए अक्सर एक ऐसे अनुभव में तब्दील होते रहे हैं जो उन्हें परदे पर अपने किरदार करने में मदद करते हैं। लेकिन, छात्र जीवन में खांटी आंदोलनकारी रहे पंकज का पुलिस से पहला आमना सामना उतना सुखद नहीं रहा। उन्हें तब पुलिस ने तबीयत से धुना था। और, अब सुनिए 80 साल की उन बुजुर्ग महिला का किस्सा, जिनकी मुस्कुराहट को पंकज त्रिपाठी अपने अभिनय का सबसे बड़ा संवाद मानते हैं।
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ की रिलीज के सिलसिले में पंकज त्रिपाठी ने ‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत बुधवार को की। इस दौरान वह इस बात से काफी प्रसन्न दिखे कि उनकी फिल्में, वेब सीरीज खूब देखी जा रही हैं। इंडस्ट्री में उनका रुआब बढ़ रहा है। दर्शकों में उनका नाम ऊंचा हो रहा है। वह कहते हैं, ‘मैं जो कुछ भी हूं इन दर्शकों की बदौलत ही हूं। एक ऐसा बीज रहा हूं जिसने कभी मिट्टी का साथ नहीं छोड़ा। समय भले लगा पर जैसे ही पानी मिला हम अंकुरित हो गए। संघर्षों से उगा ये पौधा अब पुष्पित पल्लवित हो रहा है तो इसमें मेरे प्रशंसकों और मेरी फिल्मों व वेब सीरीज के दर्शकों का ही सबसे बड़ा हाथ है।’

शुक्ल पक्ष: हिन्दी सिनेमा में अपनी दमदार जगह बनाने वाले पंकज त्रिपाठी से खास बातचीत
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपनी अगली फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में पंकज त्रिपाठी एक ऐसे पुलिस वाले के किरदार में हैं जिसकी छटा और अदा दोनों निराली है। इस किरदार को सुनते ही उन्हें पटना के एक पुलिस इंस्पेक्टर मिश्रा जी तुरंत याद आए थे। पंकज बताते हैं, ‘जैसे ही मैंने ये किरदार सुना तो मेरे दिमाग में पहला चेहरा मिश्रा जी का ही आया। वह काफी नक्शेबाज टाइप के पुलिस इंस्पेक्टर रहे हैं। बाल बिल्कुल सेट कर रखते थे और जब तक कोई सीनियर अफसर न सामने पड़ जाए सिर पर टोपी नहीं धरते थे। कुछ कुछ ऐसा ही मेरा किरदार भी है फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ में।’

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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
पुलिस की नक्शेबाजी से पंकज त्रिपाठी का अपने जीवन में कभी कोई वास्ता पड़ा क्या? इस सवाल पर पंकज त्रिपाठी ने पहले तो कुछ खास संस्मरण न होने की बात कही लेकिन जब पुलिस से पहले आमने सामने की बात छिड़ी तो वह चहक उठे। कहने लगे, ‘पटना में छात्र राजनीति के दिनों में हुआ था ऐसा और ये पहला आमना सामना भूला नहीं जा सकता। हुआ ये था कि हम सब छात्र एक जगह इकट्ठे होकर भाषणबाजी और नारेबाजी कर रहे थे तब तक वहां पुलिस आ गई। पुलिस को ये लगा होगा कि पहुंचते ही सब छात्र चुप हो जाएंगे। लेकिन, उस वक्त मंच पर मैं था और पुलिस को देखकर मुझे और जोश आ गया और मैं दूने उत्साह से भाषणबाजी करने लगा। उस दिन पुलिस ने जो लाठियां चटकाईं वे मुझे अब भी याद हैं। पुलिस मारती है तो निशान नहीं पड़ने देती है। ये भी उसी दिन समझ आ गया।’
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पंकज त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘बंटी और बबली 2’ फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म की याद भी पंकज त्रिपाठी कभी नहीं भूलते। साल 2005 में रिलीज हुई फिल्म ‘बंटी और बबली’ को याद करते हुए पंकज कहते हैं, ‘तब हम पटना में थे और हमने ये फिल्म वहीं के सिंगल स्क्रीन थिएटर में देखी थी। बहुत आनंद आया था ये फिल्म देखकर। खासतौर से फिल्म की पृष्ठभूमि। बनारस का किला। रेल की पटरियां और गांवों की आबोहवा, सब कुछ बहुत अपना अपना सा लगा था इस फिल्म में। और, अब हम इसके सीक्वेल में काम कर रहे हैं तो यूं लगता है जैसे ख्वाहिशों का एक चक्र ये भी पूरा हो गया।’
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