निर्देशक चंद्रा बारोट का नाम नई पीढ़ी के लोग भले न जानते हों लेकिन मशहूर निर्माता निर्देशक मनोज कुमार के सहायक रहे चंद्रा बारोट ही वह निर्देशक हैं जिन्होंने उस समय के एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन को लेकर बनाई थी फिल्म ‘डॉन’! और, इन्हीं चंद्रा बारोट को श्रेय जाता है हिंदी सिनेमा को एक नई संगीतकार जोड़ी से परिचित कराने का। ये जोड़ी है निखिल कमाथ और विनय तिवारी को जो गायिका अनुराधा पौडवाल का साथ पाकर बने हिंदी सिने संगीत की चर्चित संगीतकार जोड़ी, निखिल-विनय। इस जोड़ी के निखिल कामथ से ‘अमर उजाला’ संवाददाता वीरेंद्र मिश्र ने ये एक्सक्लूसिव बातचीत की।
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निखिल कामथ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
शुरू से शुरू करते हैं, आपकी जोड़ी कैसे बनी?
हमने निर्माताद्वय सुशील गजवानी और शशि गजवानी के दूरदर्शन के लिए बने एक सीरियल ‘जॉकी’ के लिए संगीत दिया था। इससे पहले हमारी और विनय तिवारी की जोड़ी नहीं बनी थी। विनय तिवारी के पिताजी मेरी बहन को संगीत सिखाते थे। जब मैंने इस सीरियल के लिए शीर्षक गीत रिकॉर्ड किया, तो विनय को भी बुला लिया। इस तरह से हमने पहली बार इस सीरियल में साथ काम किया। फिर इन्हीं निर्माताओं ने एक फिल्म 'दूसरा घर' का भी निर्माण किया। फिल्म तो रिलीज नहीं हो सकी लेकिन इसी फिल्म के लिए हमने एक गाना अनुराधा पौडवाल जी से गवाया था। यहीं से अनुराधा जी का आशीर्वाद हमारे साथ हुआ।
फिर आगे..?
अनुराधा ने गाने की रिकॉर्डिंग के बाद हमें टी सीरीज के ऑफिस बुलाया और वहां हमारी मुलाकात गुलशन कुमार जी से हुई। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि गुलशन जी से हमारी मुलाकात इतनी आसानी से हो जाएगी। मेरे पास 10-15 गाने थे जिन्हें मैंने कॉलेज के समय बनाया था। पांच गाने उन्हें बहुत अच्छे लगे। इनका चयन करने के बाद मुझे और गाने बनाने का उन्होंने निर्देश दिया। वह मेरे लिए ऐसा क्षण था कि जैसे मेरा एक सपना पूरा हो गया हो। मैंने विनय से कहा कि आप मेरे लिए लकी साबित हुए हैं। अब हमेशा के लिए जुड़ जाओ। फिर हमने टी सीरीज के लिए गाने रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए। 'चोर और चांद' और 'प्यार भरा दिल' में इस्तेमाल हुए हमारे गाने लोगों को पसंद आए। 'प्यार भरा दिल' का तो संगीत ही बहुत हिट हुआ और हमारी गाड़ी चल पड़ी। अनुराधा जी को मैं आज भी अपनी गॉडमदर मानता हूं।
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निखिल कामथ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
और, अपने करियर का असली टर्निंग प्वाइंट किस फिल्म को मानते हैं?
ये थी फिल्म 'बेवफा सनम' जिसके पहले ही दिन पांच लाख कैसेट बिक गए थे। पहले एक लाख एक कैसेट इसके बने थे लेकिन जब शाम चार बजे तक ही सारे कैसेट बिक गए तो गुलशन जी ने फैक्ट्री में सारे काम बंद करवाकर सिर्फ 'बेवफा सनम' के ही कैसेट तैयार करवाए।
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निखिल कामथ
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इस फिल्म के गाने हिट कराने के लिए बनी मार्केटिंग स्ट्रेटजी को आज भी हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा गिमिक माना जाता है..
हां, हमें भी पता चला था कि बाजार में इस बात का हल्ला है कि ये गाने एक पाकिस्तानी गायक ने फांसी की सजा पाने स पहले लिखे थे। उससे पहले हम अताउल्लाह खान के गानों का एक अलबम 'बेवफाई' के नाम से तैयार कर चुके थे। लेकिन हमने इसमें अपने नाम संगीतकार के तौर पर देकर लिखा, म्यूजिक अरेंज्ड बाय निखिल-विनय। मैंने कभी उन गानों को क्रेडिट नहीं लिया। उस अल्बम में ये भी लिखा हुआ है, हिट्स ऑफ अताउल्लाह खान। 'बेवफा सनम' में संगीतकार के तौर पर हमारा नाम है। मेरा मानना है कि अताउल्ला खान को लेकर तब जो कहानी फैलाई गई वह वह मार्केटिंग का फंडा रहा होगा। यह कहानी मुझे भी पता चली थी। लेकिन बाद में मुझे पता चला कि वह सच नहीं था। अताउल्लाह खान खान साहब अब भी जीवित हैं।
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निखिल कामथ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
फिल्म 'बेवफा सनम' का निर्देशन गुलशन कुमार ने खुद किया। निर्देशक के रूप में उनकी कोई खास बात जो आपको याद हो?
गुलशन कुमार जी ने फिल्म 'बेवफा सनम" का निर्देशन तो किया था, लेकिन उनके साथ इस फिल्म में 'जब जब फूल खिले' (शशि कपूर-नंदा अभिनीत 1965 में रिलीज फिल्म) के निर्देशक सूरज प्रकाश थे। फिल्म से जुड़ा एक बहुत ही मजेदार किस्सा बताता हूं। जब 'बेवफाई' अल्बम हिट हो गया तो मैंने गुलशन जी से शिकायत की कि सबके अल्बम हिट होते हैं तो आप फिल्म बनाते हैं, मेरा अल्बम हिट हुआ तो फिल्म नहीं बना रहे। यह सुनकर वह बहुत जोर जोर से हंसते थे। फिर एक दिन उनका फोन आया कि अब इस अल्बम पर फिल्म बनाते है। फिल्म का एक-एक सीन वह मुझे बताते थे और मैं उसे रिकॉर्ड कर लेता था। इस फिल्म की पटकथा सचिन भौमिक साहब ने लिखी थी। फिल्म के हीरो थे गुलशन जी के छोटे भाई कृष्ण कुमार और इसके संवाद मदन जोशी ने लिखे थे।
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निखिल कामथ, आशा भोसले
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आशा भोसले के साथ आपने बहुत सारी फिल्में की हैं। उनके साथ काम करने के कैसे अनुभव रहे हैं?
आशा जी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह संगीतकारों की बहुत इज्जत करती हैं। उनसे मिलने कोई भी चला जाए, बहुत ही प्रेम भाव से मिलती हैं। जब 'इंग्लिश बाबू देसी का मेम' के गाने 'कैसे मुखड़े से' के लिए आशा जी से संपर्क किया तो उन्होंने इस गाने की रिकॉर्डिंग से पहले अपने घर खाने पर बुलाया। गाने को पूरी तरह से समझा। और फिर गाने की रिकार्डिंग पर पूरी तैयारी के साथ आईं। यह लगन आज के गायकों में नहीं दिखती और इसीलिए आज तक आशा जी और लता जी जैसा कोई दूसरा गायक नहीं बन पाया।
लता मंगेशकर जी के साथ भी तो आपने गाने बनाए हैं..
मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि लता जी के साथ मुझे दो गाने करने के मौके मिले। लता जी से मैंने 'डूनो वाई जाने क्यों' और 'डूनो वाई 2 लाइफ इज ए मोमेंट' में गाने गवाए थे। इन दोनों फिल्मों का निर्देशन अनिल शर्मा (गदर एक प्रेमकथा, गदर 2 के निर्देशक) के छोटे भाई संजय शर्मा ने किया था। इस फिल्म के गाने उन्होंने तब गाए थे जब वह 82 साल की थी। लता जी भी हर गाने के पीछे बहुत मेहनत करती हैं, रिहर्सल करती हैं। 82 साल की उम्र में भी उन्होंने उस गीत का इतना अच्छा गाया कि क्या कहे?
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निखिल कामथ
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लता जी तो तब करीब करीब गाना बंद कर चुकी थीं, आपने उन्हें कैसे राजी किया?
अनिल शर्मा के पिता के सी शर्मा जी के साथ लता जी के बहुत अच्छे रिश्ते रहे हैं। जब मैं इस फिल्म के लिए लता जी से मिला और बताया कि के सी शर्मा के बेटे की फिल्म है तो लता जी ने मुझसे कहा था कि नरेंद्र शर्मा जी और के सी शर्मा जी को इंडस्ट्री को में मैं बहुत मानती हूं, उनको भाई समझती हूं। और, इन फिल्मों में गाने के लिए तैयार हो गईं।
और, फिल्म 'दुलारा' में गोविंदा से गीत गवाने का अनुभव कैसा रहा?
फिल्म 'दुलारा' के लिए गोविंदा ने मुझे एक अंग्रेजी गाने की सिचुएशन बताई थी। लेकिन, मैंने उसे करने से मना कर दिया क्योंकि मुझे यह पसंद नहीं थी। मैफिर मैंने उनके लिए एक अलग गाना बनाया, 'मेरी पैंट भी सेक्सी, मेरी शर्द भी सेक्सी' बना कर उनको फिल्म के निर्देशक विमल कुमार के ऑफिस में सुनाया। गाना सुनकर गोविंदा खुश हो गए और बोले, यह गाना मैं खुद ही गाऊंगा।
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निखिल कामथ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
टी सीरीज की एक हिट फिल्म रही है 'तुम बिन' जिसमें जगजीत सिंह के गीत 'कोई फरियाद' न्यू मिलेनियल्स भी खूब सुनते हैं। इसे रचने की कोई याद बाकी है?
फिल्म से डेब्यू कर रहे निर्देशक अनुभव सिन्हा ने इस गाने की सिचुएशन हमें बताई तो हमने तय किया कि ये आम गीत नहीं होना चाहिए। कुछ अलग किया जाए। भूषण कुमार जी ने भी उन्हीं दिनों टी सीरीज का काम संभालना शुरू कियाथा। हमने एक धुन बनाई जिस पर फैज अनवर ने गीत लिखा और भूषण कुमार को सुनाया। उनको बहुत अच्छा लगा और उन्होंने ही इस गीत को जगजीत सिंह जी से गवाने की सलाह दी। जगजीत सिंह जी गाने की धुन सुनकर बहुत खुश हुए। सिचुएशन समझी और यह गाना रिकॉर्ड हुआ। कम लोग ही जानते हैं कि जगजीत सिंह जी ने यह गाना आठ बार रिकॉर्ड किया है। वह जब भी मुख्य मुंबई से अंधेरी की तरफ आते थे तो फोन करके कहते, एक बार और इस गाने रिकॉर्ड करते हैं। उनकी ये खासियत थी कि जब तक वह खुद संतुष्ट नहीं हो जाते थे, गाते ही रहते थे
आपने उदित नारायण, कुमार सानू, अभिजीत, नितिन मुकेश जैसे उस दौर के सभी शीर्षस्थ गायकों के साथ काम किया। सोनू निगम के साथ आपने 'जान' और 'याद' जैसे हिट म्यूजिक अल्बम दिए, सोनू को लेकर कुछ कहेंगे?
सोनू निगम एक अलग ही स्तर के गायक हैं। किसी भी चीज को वह बहुत जल्दी ही समझ जाते हैं। वह जानते हैं कि संगीतकार को क्या चाहिए। अभी भी मैं उनके यूट्यूब चैनल के लिए भी गाने बना रहा हूं। जब मैं निखिल-विनय से निखिल कामत बन गया, उसके बाद सोनू निगम के पिता अगम कुमार के लिए 'फिर बेवफाई', 'वो बेवफा' जैसे पांच म्यूजिक अल्बम किए। मेरी दूसरी पारी शुरुआत इन अलबम से हुई। जब हमारी जोड़ी टूटी तो मैं अकेला हो गया और मार्केट में अफवाह फैल गई कि निखिल को तो कुछ काम आता ही नहीं है लेकिन इन अलबम ने साबित कर दिया कि निखिल कामत को काम आता है।
आपकी इतनी हिट संगीतकार जोड़ी टूटी कैसे?
विनय जी को लंदन जाना था। क्यों जाना था, उसका कारण मुझे मालूम नहीं। शायद उनको इंडस्ट्री में कुछ मजा नहीं आ रहा था या उनको खुद कुछ करना था। यह बड़ी राज की बात हैं, क्योंकि आज तक मैंने यह पूछा नहीं। हमारे बीच हालांकि बातचीत होती रहती है। उनकी पत्नी निशा जैन बहुत अच्छी गायिका हैं, उनके साथ भी कुछ काम कर रहा हूं।
इस पूरे इंटरव्यू की ऑडियो रिकॉर्डिंग आप यहां सुन सकते हैं..