नौशाद अली
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1940 से 2006 तक नौशाद अली संगीत की दुनिया में सक्रिय रहे। उनका संगीत दी हुई आखिरी फिल्म साल 2006 में आई 'ताजमहल' थी। उन्होंने ‘दुनिया के रखवाले’, ‘मधुबन में राधिका नाचे’, ‘मोहे भूल गए सांवरिया’, ‘मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे’, ‘नैन लड़ जहिएं’ और ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया’ जैसे गाने लोगों को दिए। नौशाद अली ने 5 मई 2006 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। संगीत में उनके योगदान के लिए 1982 में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड, 1984 में लता अलंकरण और 1992 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।