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पुण्यतिथि: मुगल-ए-आजम में संगीत देने वाले नौशाद अली की शादी में बजी थी खुद के कंपोज किए गाने की धुन; ससुराल वाले समझते थे दर्जी

Thu, 05 May 2022 07:30 AM IST
शशि सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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नौशाद - फोटो : SELF
नौशाद अली जिनके कंपोज किए सदाबहार गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। 25 दिसंबर, 1919 को जन्मे नौशाद हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार रहे। उन्होंने अपने जीवन में भले ही केवल 67 फिल्मों में संगीत दिया था, लेकिन उनके उत्कृष्ट काम के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है। ये सब उनके संगीत और कौशल का कमाल ही है अब भी हिंदी सिनेमा में उनका नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। 05 मई 2006 को संगीत की दुनिया के इस दिग्गज ने संसार को अलविदा कह दिया।
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नौशाद और रफी
लखनऊ में पैदा हुए नौशाद साहब के संगीत के सफर में चुनौतियां भी कम नहीं थीं। उन्हें बचपन से ही संगीत में खासा रुचि थी। इसलिए बचपन में नौशाद क्लब में जाकर साइलेंट फिल्म देखा करते थे और नोट्स तैयार किया करते थे। इतना ही नहीं नौशाद अली बचपन में एक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स की दुकान पर सिर्फ इसलिए काम करते थे ताकि उन्हें हारमोनियम बजाने का मौका मिल सके, और अपने इसी संगीत प्रेम के चलते वह सफल भी हुए।
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नौशाद
नौशाद अली के बारे में कई किस्से बताए जाते हैं। इन्ही में से एक किस्सा है कि जब नौशाद साहब की शादी हुई तो उस समय शादी में उनके ही कंपोज किए गए एक गाने की धुन बजाई जा रही थी, लेकिन यह बात किसी को नहीं पता थी और नौशाद तब भी किसी को नहीं बता पाए कि ये गाना उन्होंने ही कंपोज किया है। इतना ही नहीं नौशाद के ससुराल वालों को भी ये बताया गया कि वह पेशे से एक दर्जी हैं, क्योंकि उस दौर में गाने-बजाने से जुड़े काम को अच्छा नहीं माना जाता था।

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नौशाद अली - फोटो : Social media
प्रेम नगर से की थी शुरुआत
संगीतकार नौशाद अली ने पहली बार साल 1940 में आई फिल्म 'प्रेम नगर' के गानों में संगीत देकर अपने करियर की शुरुआत की थी। पहली ही बार में उनके कंपोज किए गानों को खूब पसंद किया गया। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई खूबसूरत नगमों को अपने संगीत की धुन देकर उन्होंने जीवंत बना दिया। अगर बात उनके गानों की करें तो हिंदी सिनेमा में सबसे ऊपर फिल्म मुगल-ए-आजम का नाम लिया जाता है। नौशाद जी के द्वारा कंपोज किए गए मुगल-ए-आजम के गाने...जैसे प्यार किया तो डरना क्या को आज भी गुनगुनाया जाता है। इसके अलावा फिल्म पाकीजा के संगीत में भी उनका अहम योगदान रहा।
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Naushad Ali
दादा साहब फाल्के से थे सम्मानित
नौशाद अली साहब के संगीत में योगदान के लिए उन्हें कला कि दुनिया के सबसे ऊंचे सम्मान यानी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। इसके अलावा वह पद्म भूषण से भी सम्मानित थे।
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