राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस खास मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहे अभिनेता अक्षय कुमार ने संग्रहालय के फिर से खुलने पर खुशी जाई और कहा कि यहां संग्रहीत तमाम फिल्में उनकी परवरिश का हिस्सा रही हैं। उन्होंने अपील की कि हर सिनेप्रेमी को यहां जरूर आना चाहिए क्योंकि हर फिल्मकार और फिल्मों को पसंद करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह जगह किसी मंदिर से कम नहीं है। वहीं, यहां आकर अभिनेत्री कृति सैनन भी खासी उत्साहित दिखीं। कृति कहती हैं, "मैं इस संग्रहालय में आकर बेहद प्रभावित हुई। इसे जिस तरह से तैयार किया गया है, वह बहुत ही प्रशंसनीय है। यहीं आकर मुझे पता चला कि 1940 दशक में दक्षिण भारत में बनी सबसे महंगी फिल्मों में से एक 'चंद्रलेखा' पहली फिल्म थी जिसने पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर अपना रुतबा दिखाया और दक्षिण भारत के फिल्म निर्माताओं को उत्तर भारत के दर्शकों तक पहुंचने का क्रम शुरू किया।"