पंकज त्रिपाठी
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और, सब्जी वगैरह? पंकज त्रिपाठी का चेहरा सब्जी का नाम सुनते ही खिल जाता है, ‘भैया, हम तो अपनी खुद की उगाई सब्जी ही खाते हैं। वो क्या कहते हैं, बिल्कुल ऑर्गेनिक। भिंडी, तोरई, बैंगन खूब उगाते हैं, इन दिनों लौकी हरियाई हुई है। इतनी लौकी रोज निकलती है कि पूछो मत। खुले में दाल बाटी चोखा भी हम लोग खूब बनाते हैं और वहीं चारपाई डालकर बहुत मजे से खाते हैं।’