मधु जैन अपनी किताब, 'फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स' में लिखती हैं, नरगिस ने अपना दिल, अपनी आत्मा और यहां तक कि अपना पैसा भी राज कपूर की फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया। जब आर के स्टूडियो के पास पैसों की कमी हुई तो नरगिस ने अपने सोने के कड़े तक बेच डाले थे।