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Mukesh Birth Anniversary: मुफलिसी में बीता था मुकेश का बचपन, 'इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल' गाते हुए अमेरिका में ऐसे हुई थी मौत

Tue, 21 Jul 2020 03:58 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मुकेश गायक - फोटो : ट्विटर
सिंगर मुकेश ने अपने मधुर गीतों और सुरीली आवाज से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में 1950 और उसके बाद के तीन दशकों के दौरान यदि सबसे लोकप्रिय रहे पुरुष गायकों के नाम किसी से पूछे जाएं तो उसमें मुकेश का नाम जरूर होगा। मुकेश का जन्म 22 जुलाई 1923 को हुआ था। कल उनकी जयंती है। हिंदी सिनेमा के चार दशकों में मुकेश की आवाज गूंजती रही। इस खास मौके पर चलिए आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ अहम जानकारियां।
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गायक मुकेश
राज कपूर की आवाज कहे जाने वाले मुकेश आज भी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज करते हैं। मुकेश ने राजकपूर के लिए 'दोस्त-दोस्त न रहा', 'जीना यहां मरना यहां', 'कहता है जोकर', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे सदाबहार गाने गाए हैं। मुकेश भारत ही नहीं विदेश में भी काफी मशहूर रहे हैं।
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गायक मुकेश
किसी कालजयी गायक की सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि उसके गाने सुनते हुए आप उन्हें गुनगुनाने से खुद को रोक नहीं पाते। मुकेश भी ऐसे ही गायक रहे हैं। मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। उनके पिता जोरावर चंद्र माथुर पेशे से इंजीनियर थे। मुकेश के 10 भाई- बहन थे औ वो छठे नंबर के थे। मुकेश को बचपन से ही गाने में रुचि थी। वो अपने क्लासमेट्स को गाना सुनाया करते थे। मुकेश ने 10वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पीडब्ल्यूडी में नौकरी करने लगे थे। 

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गायक मुकेश
मुकेश फिल्मों में काम करना चाहते थे। एक बार वो अपने रिश्तेदार मोतीलाल की बहन की शादी में गाना गा रहे थे। मोतीलाल को मुकेश की आवाज बहुत पसंद आई। वो उन्हें मुंबई लेकर आए और गाने की ट्रेनिंग दिलवाई। मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' में अदाकारी की। साथ ही इस फिल्म के गाने भी खुद गाए। मुकेश ने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था।  यही वो पहला मौका था जब लोगों ने उनके बारे में जाना। इसके अलावा, उन्होंने 'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' में भी बतौर एक्टर काम किया। 
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गायक मुकेश
फिल्म-उद्योग में उनका शुरुआती दौर मुश्किलों भरा था। लेकिन एक दिन उनकी आवाज का जादू के.एल. सहगल पर चल गया। 50 के दशक में मुकेश को शोमैन 'राज कपूर की आवाज' कहा जाने लगा। मुकेश ने 40 साल के लंबे करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों के लिए गीत गाए। मुकेश उस जमाने के हर सुपरस्टार की आवाज बने। साल 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'अनाड़ी' ने राज कपूर को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। मुकेश का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय वह 'इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल' गा रहे थे।
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