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Who Killed Deendayal: सबसे बड़े सियासी रहस्य से उठेगा पर्दा, अंग्रेज पुलिस अफसर के नजरिये से बनने जा रही फिल्म

Wed, 22 Nov 2023 12:21 PM IST
आकांक्षा गुप्ता एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

निर्देशक उज्ज्वल चटर्जी की यह फिल्म 1968 में एक फरवरी की रात को सामने आई हैरान कर देने वाली घटना के विवरण को उजागर करेगी। दीन दयाल उपाध्याय उस शाम लखनऊ से पटना के लिए सियालदह पठानकोट एक्सप्रेस में चढ़े थे।
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पंडित दीन दयाल उपाध्याय, उज्ज्वल चटर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता उज्ज्वल चटर्जी अपनी बेहतरीन सिनेमाई कहानी कहने के लिए जाने जाते हैं। उज्ज्वल चटर्जी अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जीवन पर आधारित फिल्म का निर्माण करने के लिए तैयार हैं। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की रहस्यमय मौत की सिनेमाई खोज के लिए तैयार हैं। यह कहानी डॉ. महेश चंद्र शर्मा द्वारा लिखित दीनदयाल उपाध्याय के 'संपूर्ण वांग्मय' पर आधारित है। 
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पंडित दीन दयाल उपाध्याय - फोटो : सोशल मीडिया
उज्ज्वल चटर्जी का आगामी प्रोजेक्ट पंडित उपाध्याय के दुखद निधन के आसपास की अस्पष्टीकृत परिस्थितियों पर प्रकाश डालेगा। एक प्रमुख राजनीतिक शख्सियत और भारतीय जनसंघ के तत्कालीन नवनियुक्त अध्यक्ष के रूप में प्रतिष्ठित दीनदयाल उपाध्याय की असामयिक और रहस्यमय मौत हुई थी। उनकी मौत आज तक साजिशों और अनुत्तरित सवालों में घिरी हुई है। भारतीय इतिहास में उनका निधन एक अनसुलझा अध्याय बना हुआ है, जो कि रहस्यमय घटनाओं और अटकलों से घिरी हुई है। 

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पंडित दीनदयाल स्मारक - फोटो : अमर उजाला
निर्देशक उज्ज्वल चटर्जी की यह फिल्म 1968 में एक फरवरी की रात को सामने आई हैरान कर देने वाली घटना के विवरण को उजागर करेगी। दीन दयाल उपाध्याय उस शाम लखनऊ से पटना के लिए सियालदह पठानकोट एक्सप्रेस में चढ़े थे। ट्रेन के स्टेशन से रवाना होने के महज दस मिनट बाद मुगलसराय स्टेशन पर एक ट्रैक्शन पोल के पास उनका निर्जीव शरीर पाया गया। उनके हाथ में पांच रुपये का नोट था। चलती ट्रेन से उसके गायब होने और उसके बाद उसकी खोज से जुड़ी परिस्थितियों ने अनुमान और विवाद का तूफान खड़ा कर दिया। कई लोगों ने इस बात का अनुमान लगाया कि अपराध के पीछे राजनीतिक उद्देश्य था। इस अनसुलझे मामले की गहन जांच की मांग की गई।

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पंडित दीन दयाल उपाध्याय - फोटो : सोशल मीडिया
इस मामले पर काफी बवाल हुआ था। उज्ज्वल चटर्जी की यह कहानी कथित हत्या के इर्द-गिर्द घूमती है। इस मामले की जांच आईपीएस अधिकारी जॉन लोबो ने की थी। लोबो को नायक की भूमिका में डालती है, जो दर्शकों को सुरागों और रहस्यों की भूलभुलैया के माध्यम से मार्गदर्शन कराएंगे। यह कहानी उपाध्याय के निधन के आसपास के रहस्य को समझने का प्रयास करती है। लोबो के माध्यम से फिल्म उन परिस्थितियों का पता लगाएगी, जिनके कारण दीनदयाल उपाध्याय की कथित हत्या हुई और इसके पीछे की प्रेरणाएं सामने आईं। यह 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' के नारे में निहित उपाध्याय के दृढ़ विश्वास को भी उजागर करेगी।  

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निर्देशक उज्ज्वल चटर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म का कैनवास विवाद से परे है, इसका लक्ष्य पंडित दीनदयाल के जीवन उनके एकात्म मानववाद के सिद्धांत और विशेषकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके वैचारिक टकराव पर प्रकाश डालना है। यह 370/35ए जैसे संवैधानिक अनुच्छेदों पर उनके दृष्टिकोण के साथ-साथ महत्वपूर्ण मामलों पर उपाध्याय के रुख का पता लगाने का प्रयास करेगी। उज्ज्वल चटर्जी ने फिल्म को लेकर कहा, 'इस परियोजना के साथ मेरा लक्ष्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निधन के आसपास की अस्पष्टता को पर्दे पर खोलना है। यह महज एक बायोपिक नहीं है, बल्कि उनके अनुकरणीय जीवन और उनकी दुखद मौत से जुड़े अनुत्तरित सवालों की खोज है।' उज्ज्वल चटर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म का स्क्रीनप्ले अतुल गंगवार और उज्ज्वल चटर्जी द्वारा किया गया है। संजय मासूम ने फिल्म के डायलॉग लिखे हैं।

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