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Apna Adda 03: बोरीवली स्टेशन पर उतरा तो लगा कि ये कौन सी मुंबई है, पिता का साथ मिले तो हर संघर्ष जीतना मुमकिन

Tue, 09 Jan 2024 12:14 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला
एहसासों को गाकर बताना इंसानी फितरत का पैदाइशी गुण रहा है। बच्चा मां को पास चाहता है तो उसके रोने में अलग लय होती है, और गुस्सा जताना होता है तो उसके रोने के सुर भी बदल जाते हैं। अपने आसपास की कुदरती आवाजों को अपने गीतों में पिराने में लगे गीतकार हर्षवर्धन हमारी सीरीज ‘अपना अड्डा’ के तीसरे कलाकार हैं। ‘अपना अड्डा’ एक ऐसी सीरीज है जो मुंबई में संघर्षरत उन कलाकारों की खबरें उनके गांव, गली, चौबारे तक पहुंचाने की कोशिश करती है, जिन्होंने अपने बूते कुछ तो नाम मनोरंजन जगत में कमा लिया है। अमरोहा जिले से निकले हर्षवर्धन ने हिंदी सिनेमा में अपने लेखन से अपनी पहचान बनाई है। उनसे एक खास बातचीत..
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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सपनों की नगरी मुंबई में आपका आना कब हुआ?
मैं उत्तर प्रदेश में अमरोहा से हूं और मैं ग्यारहवीं कक्षा से कॉलेज मैगजीन और अखबारों में कविताएं लिखा करता था। अध्यापकों और दोस्तों ने लिखने को लेकर मेरा काफी उत्साहवर्धन किया। मेरे मित्र अनंत अहलूवालिया मुझे मुंबई लेकर आए और तब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था। मैं बोरीवाली स्टेशन उतरा और असलियत की मुंबई मेरे विचारों की मुंबई से बिल्कुल विपरित दिखाई दी। कुछ दिनों यहां वहां भटकने के बाद घर से लाए हुए पैसों से अंधेरी में एक घर हमने किराए पर लिया। आज मुझे मुंबई आए लगभग सोलह साल गुजर चुके हैं।
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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
 आपकी पहली कविता कब छपी और सबसे पहले उसे किसको दिखाया?
मेरी सबसे पहली कविता जो छपी थी उसका नाम ‘आज समय की रेतों पर मैं किसके पांव ढूंढ रहा’ थी। सबसे पहले मैंने वह मैगजीन लाकर मेरे पिताजी श्री रामसेवक त्यागी को दिखाई। तब तक उन्हें लगता था मैं लिख नहीं सकता। उसके बाद मेरे पिताजी ने मुझे काफी सपोर्ट किया। उनका अमरोहा में डेयरी का व्यवसाय है।

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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, मुंबई मनोरंजन जगत में आपको पहला अवसर कब मिला?
उन दिनों सहारा वन चैनल की धूम थी और उस पर एक धारावाहिक ‘शोर’ प्रसारित हुआ करता था। उन्हें एक नया लेखक चाहिए था, क्योंकि उनका पुराना लेखक शो छोड़ रहा था। एक तरह से देखा जाए तो ये मुझे ईश्वर का मिला आशीर्वाद था। मेरी लिखी हुई स्क्रिप्ट में ज्यादा फेरबदल नहीं किया जाता था। जो लिखकर भेज दिया, वह शूट हो जाता था। तब मुझे लगने लगा कि मैं अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रहा हूं। मैंने सोनी टीवी पर ‘अदालत’, लाइफ ओके पर ‘सावधान इंडिया’, सोनी सब पर ‘अम्मा जी की गली’ और कलर्स पर ‘कोड रेड’ का लेखन किया है। उन्हीं दिनों मेरा झुकाव एड फिल्मों की तरफ हुआ, मैंने अभिनेता धर्मेंद्र के लिए दो एड फिल्में लिखी हैं और भी कई बड़े ब्रांड्स के लिए लिखा। 
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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन, आपकी बड़ी पहचान एक गीतकार के तौर पर हुई है, इसका सिलसिला कैसे शुरू हुआ?
बतौर गीतकार मुझे एक फिल्म ‘आजादी’ मिली थी, जिसमें मैंने दो गाने लिखे थे जिसकी रिकार्डिंग यशराज स्टूडियोज में हुई थी। एक गाना कैलाश खेर जी ने गाया था, लेकिन वह फिल्म बनी नहीं। फिर बहुत बड़े फैशन फोटोग्राफर जयेश शेठ की एक फिल्म की स्क्रिप्ट और गाने लिखे। फिल्म ‘देहरादून डायरीज’ में गीत लिखने का मौका मिला। लेकिन, मुझे गीतकार के तौर पर सबसे बड़ा मौका निर्देशक लव रंजन की फिल्म के लिए मिला है। उनकी एक निर्माणाधान फिल्म के लिए मैं गाने लिख रहा हूं। मैंने कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया की म्यूजिक कंपनी के साथ तीस गानों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। 16 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब लग रहा है कि मैंने कुछ पहचान बनाई है।
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हर्षवर्धन त्यागी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अगले पांच वर्षों में स्वयं को कहां देखते हैं?
इन दिनों मुंबई में हुनरमंदों के लिए काम की कोई कमी नहीं है। मैं अभी सोनी लिव की एक वेब सीरीज ‘सीएम सीएम होता है’ लिख रहा हूं। मेरा इरादा मुंबई में पैसा कमाना कम है और नाम कमाना ज्यादा है। मैं किसी काम को मना नहीं करता हूं। मेरे पास जो भी काम आता है, वह मैं करता हूं और कोशिश करता हूं कि अपने भीतर के इंसान को हर दिन एक बेहतर इंसान बनाता रहूं।
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