एहसासों को गाकर बताना इंसानी फितरत का पैदाइशी गुण रहा है। बच्चा मां को पास चाहता है तो उसके रोने में अलग लय होती है, और गुस्सा जताना होता है तो उसके रोने के सुर भी बदल जाते हैं। अपने आसपास की कुदरती आवाजों को अपने गीतों में पिराने में लगे गीतकार हर्षवर्धन हमारी सीरीज ‘अपना अड्डा’ के तीसरे कलाकार हैं। ‘अपना अड्डा’ एक ऐसी सीरीज है जो मुंबई में संघर्षरत उन कलाकारों की खबरें उनके गांव, गली, चौबारे तक पहुंचाने की कोशिश करती है, जिन्होंने अपने बूते कुछ तो नाम मनोरंजन जगत में कमा लिया है। अमरोहा जिले से निकले हर्षवर्धन ने हिंदी सिनेमा में अपने लेखन से अपनी पहचान बनाई है। उनसे एक खास बातचीत..