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Independence Day: इन फिल्मों की सफलता के आगे 'बाहुबली' पड़ जाती है बौनी, विदेशों में मचाया है तहलका

Tue, 07 Aug 2018 04:46 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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अमिताभ बच्चन
जब भारत आजाद भी नहीं हुआ था तबसे भारतीय सिनेमा दर्शकों को एंटरटेन करता आ रहा है । भारत 71वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है लेकिन भारतीय सिनेमा को स्थापित हुए 100 साल से ज्यादा हो चुके हैं । इन 100 सालों में दर्शकों को फैमिली ड्रामा, एक्शन, लव स्टोरी और बायोपिक जैसे विषयों पर फिल्में देखने को मिलीं । हिंदी फिल्मों के दर्शक भारत में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में फैले हुए हैं। इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जिन्हें भारत में भले ही उतनी सफलता ना मिली हो लेकिन इन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया है।
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बॉलीवुड
इन फिल्मों में पहला नाम 'संत तुकाराम' का है। यह फिल्म 1937 में रिलीज हुई थी। फिल्म के डायरेक्टर विष्णु पंत धामले और शेख फट्टेलाल थे। यह पहली फिल्म थी जिसे 'वेनिस फिल्म फेस्टिवल' में स्पेशल प्राइज देकर नवाजा गया था ।
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बॉलीवुड
फिल्ममेकर चेतन आनंद की मूवी 'नीचा नगर' को कांस फिल्म फेस्टिवल में Grand Prix du Festival International du Film अवॉर्ड से नवाजा गया था। यह फिल्म 1946 में रिलीज हुई थी।

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बॉलीवुड
1951 में आई वी शांताराम की फिल्म 'अमर भोपाली' को Excellence in Sound Recording का अवॉर्ड मिला था।
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बॉलीवुड
डायरेक्टर बिमल रॉय ने 1954 में एक जबरदस्त फिल्म 'दो बीघा जमीन' बनाई थी। इस फिल्म को भारत में भी काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म को कई इंटरनेशनल अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। इसके अलावा फिल्म ने कांस फिल्म फेस्टिवल में Prix Internationale का अवॉर्ड जीता था।
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बॉलीवुड
पांचवीं फिल्म सत्यजीत रॉय की 'पाथेर पांचाली' थी। इस फिल्म ने कई अवॉर्ड्स जीते थे। लेकिन 1956 में हुए कांस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म को Palme d’Or for Best Human Document का अवॉर्ड मिला था।
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बॉलीवुड
सत्यजीत रे की फिल्म 'अपराजितो' को गोल्डन लॉयन अवॉर्ड से नवाजा गया था। इसके अलावा यह फिल्म वेनिस फिल्म फेस्टिवल के लिए भी नॉमिनेट हुई थी। यह फिल्म 1957 में आई थी।

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बॉलीवुड
1957 में आई बच्चों की फिल्म 'जलदीप' ने वेनिस इंटरनेशनल चिल्ड्रेन फिल्म फेस्टिवल में पहला पुरस्कार जीता था। इस फिल्म के डायरेक्टर किदार शर्मा थे।

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बॉलीवुड
महबूब खान की फिल्म 'मदर इंडिया' को तो भूलना नामुमकिन है। 1957 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के लिए नरगिस को को Karlovy Vary International Film Festival में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था। इसके अलावा अकेडमी अवॉर्ड में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज के लिए नॉमिनेट हुई थी।

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बॉलीवुड
इसके बाद 1988 में आई फिल्म 'सलाम बॉम्बे' को कांस फिल्म फेस्टिवल में Camera d’Or and the Audience Award दिया गया था। यह उन फिल्मों में से एक थी जो अकेडमी अवॉर्ड्स की रेस में शामिल हुई थी। 

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बॉलीवुड
1998 में आई शाहरुख खान की फिल्म 'दिल से' को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में Netpac Award दिया गया था। इस फिल्म के डायरेक्टर मणि रत्नम थे।

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बॉलीवुड
2010 में बनी 'अब्दुल कलाम' की बायोपिक 'आई एक कलाम' को FICC में best feature film prize और  Don Quijote Prize मिला था। इस फिल्म के डायरेक्टर निला मदहब पांडा थे।

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बॉलीवुड
साल 2012 में आई डायरेक्टर राजन खोसा की फिल्म 'गट्टू' 62वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में special mention under Deutsches Kinderhilfswerk category का अवॉर्ड मिला था।

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बॉलीवुड
इरफान खान की फिल्म 'लंचबॉक्स' को कांस फिल्म फेस्टिवल में Critics Week Viewers Choice Award से नवाजा गया था। इसके अलावा BAFTA में भी फिल्म की एंट्री हुई थी। फिल्म के डायरेक्टर रितेश बत्रा थे।

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लगान
आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'लगान' ने दुनिया भर के दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था। आमिर खान की इस फिल्म को अकेडमी अवॉर्ड में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। 
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बॉलीवुड
नीरज घेवन की साल 2015 में आई फिल्म 'मसान' को कांस फिल्म फेस्टिवल में Avenir Prize दिया गया था।
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