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Fathers’ Day 2021: सोशल मीडिया के सितारों ने दोहराए पिता से सीखे सबक, खुद पर भरोसा सबसे बड़ी चीज

Sun, 20 Jun 2021 08:31 AM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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बरखा सिंह-यशस्विनी दयामा-रेवती पिल्लै-सामेंता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जून महीने का तीसरा रविवार यानी फादर्स डे। हर साल इस दिन देश दुनिया में लोग अपने पिता के लिए इस दिन तोहफे लाते हैं, बुजुर्ग हुए तो उन्हें घुमाने ले जाते हैं। या फिर उनके साथ ढेर सारा वक्त बिताते हैं। कोरोना संक्रमण काल में अपने बुजुर्ग माता पिता के साथ घर पर ही समय बिताना सबसे अनुकूल है। सोशल मीडिया के कुछ चर्चित सितारों ने इस बार फादर्स डे अमर उजाला के साथ मनाने का फैसला किया और हमारे साथ साझा की इस दिन की कुछ खास यादें। और, इतनी ही नहीं इन सितारों ने अपने पिता के साथ की कुछ खास तस्वीरें भी हमसे साझा की हैं। तो आइए देखते हैं कि क्या कहते हैं ये सितारे अपने पिता के बारे में और साथ ही इनकी कुछ खास तस्वीरें।
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बरखा सिंह - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बरखा सिंह
‘मेरे डैड सेवानिवृत्त भारतीय नौसैनिक हैं। जब मैं छोटी थी तो डैड महीनों तक आउटस्टेशन पोस्टिंग पर चले जाते लेकिन हमारा रिश्ता काफी करीबी होता था। मुझे लगता है कि वैचारिक दृष्टि से मेरे ऊपर मेरे डैड का काफी अधिक प्रभाव है। लेकिन उनसे सबसे बड़ी सीख यह मिली कि मजबूत चरित्र और खुद पर विश्वास रखना जिंदगी में महत्वपूर्ण है। उनसे मैंने सीखा है कि हर किसी को अपने आसपास के लोगों को महत्व देना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। लेकिन जो चीज समान रूप से महत्वपूर्ण है वह है खुद का सम्मान और महत्व। यदि कोई किसी चीज में वास्तव में विश्वास करता है तो उसे दृढ़ संकल्प के साथ उसके साथ खड़ा होना चाहिए और कभी भी किसी के लिए अपनी नैतिकता को कम नहीं करना चाहिए। यह एक ऐसी चीज है जिसका मैं हमेशा पालन करती हूं।’
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अपने पिता के साथ यशस्विनी दयामा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
यशस्विनी दयामा
'
हम सचमुच पिता को उतना श्रेय नहीं देते हैं जिसके वे हकदार हैं। हम ज्यादातर समय अपनी माताओं के करीब बिताते हुए बड़े होते हैं क्योंकि "यह हमेशा से ऐसा ही रहा है" और इसलिए भी कि पिताजी बहुत समय दूर काम करते हैं, ताकि परिवार अच्छी तरह से चल सके। मेरे पिताजी ने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपने जीवन के चौथे दशक में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी (उस वक्त यह समझ पाने के लिए मेरी उम्र बहुत छोटी थी), एक ऐसा सपना जो असंभव था क्योंकि- शुरू में कभी भी कोई पारिवारिक समर्थन नहीं था, इंडस्ट्री में कोई उन्हें जानने वाला नहीं था जो इस नये प्रयास में उनकी मदद करे। उन्होंने सचमुच बड़ा दांव खेला। उन्होंने अपना रास्ता खुद बनाया और हालांकि यह मेरी माँ के समर्थन के बिना असंभव था, लेकिन यह निश्चित रूप से संभव नहीं हो पाता यदि डैड ने वह छलांग लगाने का निर्णय नहीं लिया होता, जिसे वह हमेशा से करना चाहते थे। अभिनय। प्रदर्शन। हर एक व्यक्ति का मनोरंजन। उन्हें अच्छी तरह से समझ पाने में मुझे ज़रा लंबा समय लग गया कि दरअसल वो हैं कौन। मैं बड़ी हुई यह सोचते हुए की उनसे थोड़ा डरना चाहिए, शायद मेरी बातें न समझ पाएं। लेकिन वह ऐसे इंसान हैं जिन्होंने हमेशा से बड़ी और खूबसूरत जिंदगी जीने की कोशिश की है। हमेशा सीखने और समझने कि कोशिश करते और जैसा वे कहते हैं, खुद को "अपग्रेड" करते। और यही मैं अपने जीवन के साथ करना चाहता हूं, यही मैंने उससे सीखा है। डरो मत, केवल उस एक पल के लिए ही सही जो आपको कुछ ऐसा चुनने में लगता है जो डरावना है, लेकिन आप जानते हैं कि आप वास्तव में इसे चाहते हैं। और खुद को "अपग्रेड" करते रहें!

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रेवती पिल्लै - फोटो : सोशल मीडिया

रेवती पिल्लै
‘जब मैं स्कूल में थी तो मैं हमेशा से गणित में कमजोर थी और दूसरी ओर मेरे डैड गणित में सिद्धहस्त थे। जब भी मुझे गणित से जुड़ी कोई समस्या होती तो मैं उनके पास जाती जोकि अच्छी बात नहीं थी क्योंकि उन्होंने मुझे हल कभी नहीं दिया और न ही उसे हल करने का तरीका बताया। बजाय इसके वो मुझसे काउंटर-क्वेश्चन करते और समस्या को दूसरे तरीके से मेरे सामने रख देते। अधिकतर बार तो यह होता कि मैं उसे छोड़ देती। लेकिन आखिर में मैंने तरीका सीख लिया। मैं किसी न किसी तरह से समीकरण को हल कर लेती जिससे मुझे सही उत्तर मिल जाता हालांकि, मुझे अब भी गणित पसंद नहीं है। इससे एक चीज़ मैंने यह सीखी कि हर समस्या का समाधान है। बस आपको अपना नज़रिया बदलना है। उन्होंने मुझे खुद से सीखना सिखलाया।’

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निधि कुमार - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
निधि कुमार
‘अगर मैं कहूं कि डांस मेरे खून में है तो झूठ नहीं होगा। मेरे पिता ही एकमात्र कारण हैं कि मैंने डांस करना शुरू किया और मुझे साफ-साफ याद है कि कैसे वह अपने शानदार बॉलीवुड मूव्स के कारण हर पारिवारिक पार्टी को जीवंत बना देते थे। मेरे सबसे बड़े समर्थक होने से लेकर मुझे कड़ी मेहनत और नम्रता का महत्व सिखाने तक मेरे डैडी मेरे लिए सबसे अच्छे इंसान हैं।’

 
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सामेंता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सामेंता
‘मेरे पिता ईमानदारी और सम्मान दो चीजों को बेहद महत्व देते हैं। वह हमेशा कहते हैं कि 'काम चाहे कितना भी बड़ा या कितना भी छोटा क्यों न हो, उसका सम्मान करो और उसे ईमानदारीपूर्वक करो। यदि आप काम की कद्र नहीं करते तो काम भी आपकी कद्र नहीं करेगा। यहां काम का मतलब पढ़ाई-लिखाई से लेकर वास्तविक जीवन से जुड़े कार्य तक कुछ भी हो सकता है। उनकी कही बातें अब तक मुझे याद हैं और आज भी कार्य के प्रति मेरा सम्मानजनक नजरिया होता है।’
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