मुंबई में हर साल लाखों लोग स्टार बनने का सपना लेकर आते हैं लेकिन सफल वही हो पाते हैं जो हार नहीं मानते। फिल्म केसरी में मुख्य खलनायक की भूमिका कर रहे कानपुर के राकेश चतुर्वेदी ओम को यहां तक पहुंचने में 20 साल लगे हैं।
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Rakesh Chaturvedi Om
- फोटो : facebook
फिल्मों में आपके पहले ब्रेक की कहानी का क्या है?
सिनेमा में पहला ब्रेक मुझे 'पथ' फिल्म में मिला था जिसमें शरद कपूर, निर्मल पांडे, गोविन्द नामदेव जैसे नामचीन कलाकार थे। ये फिल्म मुझे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का ग्रेजुएट होने की वजह से मिली थी। रोल ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन उसे करके मजा आया।
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कानपुर से मुंबई तक की यात्रा को अब 20 साल बाद कैसे देखते हैं?
मेरी परवरिश कानपुर के बिरहाना रोड इलाके में हुई। मैं दो बार कानपुर से मुंबई आकर वापस जा चुका था। मैंने तब सीखकर वापस आने की ठानी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दो बार रिजेक्ट किये जाने के बाद तीसरी बार में चयन हुआ। साल 2000 में तीसरी बार मुंबई आया। लेकिन, एनएसडी का कोर्स करने के बाद भी बहुत पापड़ बेलने पड़े।
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Rakesh Chaturvedi Om
- फोटो : social media
थिएटर ने आपका कितना साथ दिया?
कानपुर में मैं दर्पण थिएटर के साथ काम करता था। मुंबई में सोलो परफॉर्मेंस और नाटक करता रहा। फिर नसीरुद्दीन शाह के साथ जुड़ने का मौका मिला। नाटक अब भी कर रहा हूं। थिएटर से टीवी औऱ फिर टीवी से फिल्मों में आया। पथ, अदृश्य, परजानिया, पैडमैन और अब केसरी। जल्द ही 'धूर्त' नाम की भी एक फिल्म रिलीज होने वाली है। विज्ञापन फिल्मों का काम भी थिएटर की बदौलत ही मिला। मैंने यही सीखा है कि कुदरत भी आपको सही मौका तभी देती है, जब आप इसके लिए आग में तपकर कुंदन बन चुके होते हैं।
तो इस दौरान तो बड़े रिजेक्शन भी झेले होंगे आपने, कोई ऐसा वाकया जो आप अमर उजाला के पाठकों को बताना चाहें?
अनुराग कश्यप एक फिल्म बना रहे थे 'एल्विन कालीचरन'। अनिल कपूर लीड रोल में थे, उस फिल्म में रिजेक्ट होना मुझे अच्छे से याद है। मैं तीन ऐसी फिल्मों की शूटिंग से भी भाग चुका हूं जिनमें एक ही रोल 20-20 लोगों को सुनाया गया और सेट पर पहुंचने के बाद सबको पता चलता था कि सारे के सारे भीड़ बन के सिर्फ रिएक्शन देने के लिए हैं।