दिलीप कुमार
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एक बार दिलीप कुमार ने अपनी कैंटीन में स्पीच दी कि आजादी के लिए भारत की लड़ाई एकदम जायज है और ब्रिटिश शासक भारतीयों से साथ गलत पेश आते हैं। ये किस्सा दिलीप कुमार की किताब द सब्सटांस एंड द शैडो में बखूबी बयां किया किया है। अपनी किताब 'दिलीप कुमार - द सब्सटांस एंड द शैडो' में दिलीप कुमार लिखते हैं, 'फिर क्या था, ब्रिटेन विरोधी भाषण के लिए मुझे येरवाड़ा जेल भेज दिया गया जहां कई सत्याग्रही बंद थे। तब सत्याग्रहियों को गांधीवाले कहा जाता था। दूसरे कैदियों के समर्थन में मैं भी भूख हड़ताल पर बैठ गया। सुबह मेरे पहचान के एक मेजर आए तो मुझे जेल से रिहा किया गया। मुझे भी वहां गांधीवाला बुलाया जाता था।'