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किस्सा: लता मंगेशकर और दिलीप कुमार ने 13 साल तक एक-दूसरे से नहीं की थी बात, इस वजह से हुआ था मतभेद

Sun, 19 Sep 2021 09:47 PM IST
तान्या अरोड़ा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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लता मंगेशकर, दिलीप कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
दिलीप कुमार बॉलीवुड के एक ऐसे अभिनेता थे जिन्हें फिल्म जगत में ट्रेजेडी किंग के नाम से भी जाना जाता था। फिल्म ‘ज्वारभाटा’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दिलीप कुमार ने कई सुपरहिट फिल्में दी। बता दें कि दिलीप कुमार लता मंगेशकर का एक बहुत ही खास रिश्ता था। दरअसल दिलीप कुमार लता मंगेशकर को अपनी छोटी बहन की तरह मानते थे। लता मंगेशकर भी दिलीप कुमार को राखी बांधती थीं। लेकिन एक समय ऐसा आया जब इन दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत करना पूरी तरह से बंद कर दिया।

13 साल तक नहीं की एक-दूसरे से बात

लता मंगेशकर और दिलीप कुमार ने लगभग करीब 13 साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की और ये सिलसिला लगभग 1970 तक चला। मीडिया में छपी रिपोर्ट्स के अनुसार इन दोनों के बीच मतभेद तब चालू हुआ जब सलील चौधरी ने फिल्म ‘मुसाफिर’ के गाने ‘लागी नाहीं छूटे’ को गाने के लिए दिलीप कुमार को चुना। हालांकि इस बात की खबर लता मंगेशकर को नहीं थी कि दिलीप कुमार उनके साथ गाना गाने वाले हैं।
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लता मंगेशकर, दिलीप कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
दिलीप कुमार को लेकर लता मंगेशकर थी कनफ्यूज

दरअसल जब लता मंगेशकर को ये पता चला कि फिल्म में उनके साथ गाना दिलीप कुमार भी गाने वाले हैं तो वो इस बात को लेकर सोच में पड़ गईं कि क्या दिलीप कुमार गाना गा पाएंगे। लागी छूटे ना को सलिल चौधरी ने कंपोज किया था। इसी के साथ दिलीप कुमार ने भी इस गाने के लिए सितार के साथ धुन मिलाकर गाने का पूरा-पूरा रियाज किया।
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दिलीप कुमार, लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया
लता मंगेशकर के साथ गाना गाने से घबराने लगे

दिलीप कुमार ने गाने का रियाज तो खूब किया, लेकिन जब इस गाने को रिकॉर्ड करने की बारी आई तो वो थोड़ा घबराने लगे। दरअसल दिलीप कुमार की ये घबराहट लता मंगेशकर को देखकर थी, क्योंकि वो काफी अच्छी गायिका हैं। दिलीप कुमार की घबराहट को दूर करने के लिए सलिल चौधरी ने उन्हें ब्रांडी पिला दी थी। बता दें कि इस गाने को सलिल चौधरी ने ही कंपोज किया था।

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लता मंगेशकर, दिलीप कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच मतभेद हुआ शुरू

ब्रांडी पीने के बाद दिलीप कुमार ने लता मंगेशकर के साथ गाना तो गाया, लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी आवाज लता मंगेशकर की आवाज के आगे काफी कमजोर लगी। लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग में अपना पूरा-पूरा योगदान दिया। इस रिकॉर्डिंग के बाद से ही दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच ये मतभेद शुरू हुआ जोकि लंबे समय तक चला। 1970 में जब इनके बीच मनमुटाव खत्म हुआ तो लता मंगेशकर ने एक बार फिर से दिलीप कुमार को राखी बांधी।
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दिलीप कुमार को राखी बांधती लता मंगेशकर - फोटो : सोशल मीडिया
इस बात को लेकर हुआ था मतभेद

दिलीप कुमार और लता मंगेशकर के बीच बातचीत तब बंद हुई जब दिलीप कुमार ने लता मंगेशकर को देखकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मराठियों की उर्दू बिलकुल दाल-चावल की तरह होती है। ये बात लता मंगेशकर को कुछ ऐसी चुभी कि उन्होंने सिर्फ दिलीप कुमार से बोलचाल बंद की बल्कि उर्दू तक सीखने का फैसला उन्होंने ले लिया।
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