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Dhoop Ki Deewar Review: जी5 को अब पाकिस्तान का सहारा, पहले दो एपीसोड में बेअसर रही ‘धूप की दीवार’

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धूप की दीवार रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज रिव्यू: धूप की दीवार
लेखक: उमेरा अहमद
कलाकार: अहद रजा मीर, सजल अली, अली खान, समीना अहमद, जारा तरीन आदि।
निर्देशक: हसीब हसन
ओटीटी: जी5
रेटिंग: *1/2

भारत और पाकिस्तान की बात अमूमन क्रिकेट के मुकाबलों से ही शुरू होती है। यहां से किस्सा चूका तो सीधे जुड़ता है सरहद पर होने वाली तनातनी से। दोनों देशों की अदावत पर खूब फिल्में बनी हैं। फिर जे पी दत्ता ने फिल्म ‘बॉर्डर’ भी बनाई जिसमें फौजियों के घरवालों के एहसास दिखाए गए और ये भी दिखाया गया कि जंग किसी भी आंगन को गुलजार नहीं कर सकती। नुकसान इसका दोनों तरफ होता है। इधर भी और उधर भी। कुछ कुछ ऐसी ही उम्मीद से जी5 की नई वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ भी जज्बात की सांसें चुराने की कोशिश करती है। चुराने की इसलिए क्योंकि ये पाकिस्तान में बनी, गढ़ी सीरीज है। भारत और पाकिस्तान की पुश्तैनी अदावत के जितने सियासी रंग यहां दिखते हैं, वहां उससे कहीं ज्यादा हैं। चर्चे ये भी है कि इस सीरीज को लेकर वहां हंगामा भी मच चुका है।
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धूप की दीवार - फोटो : Screen grab from trailer
इन दिनों कहानी बढ़िया तलाशने की बजाय शो बनाने वाले ये तलाशते रहते हैं कि क्या कुछ ऐसा मिल जाए कि उनकी सीरीज पर एक बवाल हो जाए। शायद बवाल क्यों हुआ, इसी बहाने लोग सीरीज देख लें।  वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ बनाने वालों के दावे बड़े बड़े हैं, पर दर्शन बहुत ही छोटे हैं। ये ठीक है कि उत्तर व पश्चिमी भारत में पाकिस्तानी नाटकों की खूब मांग रही है। वीसीआर के दिनों से लोग ये नाटक देखते रहे हैं। फिर टीवी पर भी पाकिस्तान के सीरियल खूब देखे गए। अब बारी ओटीटी की है। जी5 ने अपनी शुरूआत हिंदुस्तान की कहानियां कहने के एलानिया दावे से की थी। वहां मामला फुस्स हुआ तो अब सहारा पाकिस्तान का है। बीते साल ये काम ‘चुड़ैल्स’, ‘एक झूठी लव स्टोरी’ और ‘यार जुलाहे’ से न हुआ, इस साल वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ के शुक्रवार को रिलीज हुए दोनों एपीसोड ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
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धूप की दीवार - फोटो : Zee 5
वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ की कहानी विशाल और सारा की कहानी है। कहानी क्रिकेट मैच से शुरू होकर जंग तक जाती है। फिर टेलीविजन पर होने वाली बहस है। सोशल मीडिया का कचरा है। और, जमाना इस बात से बच रहा है कि लोग क्या कहेंगे। विशाल और सारा के दोनों परिवारों में सरहद पर बहे खून से मातम है। दोनों दुखी है। दोनों को समझ आता है कि दुख उनका एक जैसा है। दोनों अपने अपने गम भुलाकर एक दूसरे का सहारा बनने की कोशिश करते आगे के एपीसोड्स में दिखेंगे। हर शुक्रवार एक नया एपीसोड आएगा और शो का समापन होगा 14 और 15 अगस्त को। ‘जिंदगी गुलजार है’ जैसा कोई अलहदा रंग उमेरा अहमद की कलम से इस बार निकल नहीं पाया।

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धूप की दीवार - फोटो : Zee 5
प्रेमी इस कहानी के पंछी, नदिया और पवन के झोंकों जैसे तो दिखते हैं लेकिन दोनों के चेहरे पर वैसी ताजगी नहीं है जैसी ऐसी भावुक कहानियों में दिखनी जरूरी है। सीरीज की बुनावट में सबसे ज्यादा जो खटकने वाली बात है वह है इसके संवाद। अगर ये शो पाकिस्तान और भारत दोनों में दिखाने के लिए बना ही है तो फिर इसकी भाषा ऐसी होनी चाहिए थी जैसी लखनऊ या अमृतसर में बोली जाती है। कहानी का एक सिरा जुड़ा भी अमृतसर है। सिर्फ अमृतसर बता देने से तो विशाल मल्होत्रा अमृतसर का नहीं बन सकता। इसके लिए उसे बोली भी अमृतसरिया बनकर ही बोलनी होगी।
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धूप की दीवार - फोटो : Zee 5
वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ के लीड पेयर अहद रजा मीर और सजल अली दोनों के किरदार हो सकता है कि आगे के एसीपोड में थोड़े और गाढ़े हों। ये भी हो सकता है कि दोनों की अदावत के मोहब्बत में बदलने के किस्सों में कुछ तो ऐसा गढ़ा गया हो जो लोगों को अपने साथ जोड़ सके। फिलहाल तो वेब सीरीज ‘धूप की दीवार’ के दो एपीसोड देखकर इससे किसी तरह का कनेक्ट भारतीय दर्शकों का बन नहीं रहा। हिंदुस्तान की मुस्लिम आबादी को लक्ष्य करके अगर ये सीरियल बनाया गया है तो मेकर्स को मुस्लिम युवाओं व महिला दर्शकों की मानसिकता समझना जरूरी है। वह तरक्की पसंद कहानियां देखते हैं। बंदिशों और रवायतों से आगे निकलने की छटपटाहट उनमें भी है और इसके लिए ये ‘धूप की दीवार’ रास्ता ही रोकती दिखती है।
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