कुश्ती के मैदान में और बड़े पर्दे पर अपने अभिनय से लाखों दिलों को जीतने वाले एक्टर पहलवान दारा सिंह की पुण्यतिथि 12 जुलाई को होती है। धारावाहिक रामायण में हनुमान का यादगार रोल निभाने वाले पहलवान दारा सिंह ने कई फिल्मों के अलावा अपनी जिंदगी में 500 से ज्यादा फाइट लड़ी जिसमें वह एक भी मुकाबला नहीं हारे।
विज्ञापन
2 of 5
dara singh
- फोटो : file photo
दारा सिंह ने अपने समय के सभी बड़े पहलवानों को हराया था, जिसके लिए उन्हें 'रुस्तम-ए-पंजाब' और 'रुस्तम-ए-हिंद' का खिताब दिया गया था। दारा सिंह रन्धावा का जन्म 19 नवम्बर 1928 को अमृतसर (पंजाब) के गांव धरमूचक में बलवन्त कौर और सूरत सिंह रन्धावा के यहां हुआ था। दारा सिंह की लंबाई 6 फीट 2 इंच थी।
विज्ञापन
3 of 5
dara singh
- फोटो : file photo
अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे की खबरे के अनुसार दारा सिंह ने कई वर्ल्ड क्लास चैम्पियनों के खिलाफ कुश्ती लड़ी। वह अपनी जिंदगी में कोई रेसलिंग मैच नहीं हारे। साल 1968 की वर्ल्ड चैम्पियन शिप के साथ ही उन्होंने कुश्ती में हमेशा जीत हासिल की। कुश्ती के बाद दारा सिंह ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी किस्मत को आजमाया। बॉलीवुड में दारा सिंह की एंट्री फिल्म ‘संगदिल’ से हुई, जो सन 1952 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में एक्टर दिलीप कुमार और मधुबाला थे।
4 of 5
dara singh mumtaz
- फोटो : file photo
1970 में दारा सिंह ने पहली बार पंजाबी फिल्म 'नानक दुखिया सब संसार' को प्रोड्यूस किया। उन्होंने रामानंद सागर के 'रामायण' धारावाहिक में हनुमान जी का किरदार निभाया था। दारा सिंह को बतौर मुख्य हीरो पहली फिल्म ‘जग्गा’ में देखा गया था। इस फिल्म से उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं वह आखिरी बार बड़े रोल में फिल्म 'जब वी मेट' में नजर आए थे। इस फिल्म में उन्होंने करीना कपूर के दादा का किरदार निभाया था।
भले ही दारा सिंह आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन फिर भी करोड़ों हिन्दुस्तानियों के दिलों में वे राज करते हैं। दारा सिंह को 7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ा तो उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ। परिजन घर ले आए और 12 जुलाई 2012 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।