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डेथ एनिवर्सरी: रहीम चाचा बनकर एके हंगल ने जीता था सबका दिल, आखिरी वक्त में हुए भुखमरी और तंगहाली के शिकार

Thu, 26 Aug 2021 10:50 AM IST
तान्या अरोड़ा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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एके हंगल - फोटो : सोशल मीडिया
50 साल की उम्र में बतौर अभिनेता अपना करियर शुरू करने वाले अभिनेता एके हंगल ने कई सालों तक अलग-अलग किरदार निभाकर अपने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। एक फरवरी, 1917 को कश्मीरी परिवार में जन्म लेने वाले एके हंगल ने 26 अगस्त, 2012 को दुनिया को अलविदा कह दिया। ए के हंगल ने 60 से 70 के दशक में अधिकतर फिल्मों में पिता या फिर चाचा का किरदार निभाया। एके हंगल ने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया, लेकिन आज भी लोग उन्हें शोले के रहीम चाचा के रूप में याद करते हैं। एके हंगल ने इस किरदार को हमेशा के लिए अमर कर दिया।

बंटवारे के समय आए थे मुंबई
एके हंगल ने अपना बचपन पेशावर से करांची तक में बिताया। हिंदुस्तान के बंटवारे बाद 1949 में वो मुंबई आ गए थे। एके हंगल ने बचपन से ही अपनी जिंदगी में तमाम संघर्ष किए थे। एके हंगल ने अपनी पत्नी के निधन के बाद अपने बेटे की अकेले ही परवरिश की। फिल्मों के साथ-साथ एके हंगल को नाटक में भी अभिनय करने में सफलता प्राप्त हुई। हंगल साहब 18 वर्ष के थे जब उन्होंने नाटकों में अभिनय करने की शुरुआत की थी।  उनकी डेथ एनिवर्सरी पर हम अपने इस आर्टिकल में उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ बाते आपको बताने जा रहे हैं। 
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एके हंगल
कराची के जेल में तीन साल तक थे कैद

ये बात शायद बहुत ही कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले एके हंगल ने आजादी की लड़ाई लड़ी। मार्क्सवादी होने की वजह से वो कराची की जेल में तीन साल तक कैद रहें। लेकिन साल 1949 में जेल से छूटने के बाद हंगल साहब अपने पूरे परिवार के साथ मुंबई आ गए। हमेशा से अभिनय का शौक रखने वाले एके हंगल ने मुंबई आने के बाद बतौर अभिनेता काम करने के बारे में सोचा।
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एके हंगल - फोटो : सोशल मीडिया

संगीत से था गहरा नाता

एके हंगल को संगीत से बहुत प्यार था जिस कारण सन् 1993 में मुंबई में होने वाले पाकिस्तानी डिप्लोमैटिक फंक्शन में उन्होंने हिस्सा लिया। एके हंगल के हिस्सा लेने की वजह से शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे ने एके हंगल के वर्तमान और भविष्य दोनों ही फिल्मों पर रोक लगा दी थी। इस चीज का असर एके हंगल के करियर पर भी पड़ा और दो साल तक उन्हें कोई काम नहीं मिला। यहां तक कि निर्देशक निर्माता भी उन्हें अपनी फिल्म में लेने से कतराने लगे थे। 

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एके हंगल - फोटो : सोशल मीडिया
255 फिल्मों में किया काम

एके हंगल ने चार दशक से अधिक के करियर में लगभग 225 फिल्मों में काम किया। 50 साल की उम्र में बॉलीवुड में अपनी शुरुआत करने वाले हंगल साहब ने 96 साल की उम्र में व्हीलचेयर पर बैठकर फैशन परेड अटेंड की थी। 97 वर्ष की उम्र में उन्होंने एनिमेटेड फिल्म में अपनी आवाज भी दी थी। अपने आखिरी के समय में वह टीवी शो मधुबाला में भी नजर आए थे।
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एके हंगल
रहीम चाचा के किरदार को किया अमर

फिल्म शोले में एके हंगल ने रहीम चाचा का किरदार निभाया था। इस किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय कर दिया। आज भी कई दफा लोगों के मुंह से आप ये कहते हुए सुनते होंगे कि ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई? इस डायलॉग को पहली बार एके हंगल ने ही बोला था। उनका ये डायलॉग ही उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म के अलावा भी एके हंगल ने जिन भी फिल्मों में काम किया उसमें अपनी एक अलग पहचान छोड़ी।
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एके हंगल
आर्थिक रूप से हो गए थे कमजोर

इंडस्ट्री में एक पुरानी कहावत है उगते सूरज को सब सलाम करते हैं। यहां लोग तभी तक आपको सिर-आंखों पर बिठाते हैं जब तक आप सूरज बनकर चमकते हैं, लेकिन जैसे ही ये सूरज चमकना बंद होता है तो उसे अर्श से फर्श पर लाने में भी लोगों को बिलकुल देर नहीं लगती। एके हंगल भी कुछ इसी तरह की पीड़ा का शिकार हुए थे। पद्म भूषण से सम्मानित अभिनेता एके हंगल को अपने अंतिम दिनों में एक छोटे से कमरे में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ी।
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एके हंगल - फोटो : सोशल मीडिया
दवाई लेने के नहीं थे पैसे

95 साल की उम्र में अपने बेटे के साथ एके हंगल छोटे से घर में रह रहे थे। एके हंगल की जिंदगी में एक समय ऐसा भी था जब उनके पास दवाई खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उस दौरान कई सितारों के आगे बढ़कर उनकी मदद की। एके हंगल एक बार अपने घर में ही बाथरूम में फिसलकर गिर गए जिसके बाद उनकी जांघ की हड्डी टूट गई और पीठ में भी चोट आई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और इलाज किया गया। लेकिन उनकी हालत और बदतर होती चली गई और फिर हंगल साहब को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रख दिया गया। धीरे-धीरे उनके फेंफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया और फिर एक दिन वो इस दुनिया को अलविदा कह गए।
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एके हंगल
ये हैं यादगार फिल्में

एके हंगल की यादगार फिल्मों में 'नमक हराम', 'शोले', 'बावर्ची', 'छुपा रुस्तम', 'अभिमान' और 'गुड्डी' शामिल हैं। फिल्म 'शौकीन' में भला उनकी भूमिका को कौन भूल सकता है, जिसमें उन्होंने एक सेवानिवृत्त रसिक बूढ़े शख्स का रोल किया था। आज भले ही एके हंगल हमारे बीच न रहे हो लेकिन उन्होंने अपने अभिनय से लोगों के दिलों में जो जगह बनाई है उससे वो हमेशा के लिए अमर हैं। 
 
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