फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2021 Best OTT Films: ये हैं गुजरते साल की 10 बेस्ट ओटीटी हिंदी फिल्में, कृति, विद्या और पंकज टॉप 3 में

विज्ञापन
1 of 11
Best Top 10 Hindi OTT Films - फोटो : अमर उजाला

गुजरते साल के सिनेमा में एक खास बात ये देखने को मिली कि इस बार हिंदी सिनेमा की नायिकाओं ने खूब दमखम परदे पर दिखाया। हालांकि, इतना दम इनकी फिल्मों के निर्माता कारोबार के लिहाज से नहीं दिखा सके। कोरोना संक्रमण काल के बाद दोबारा सिनेमा हॉल खुल पाते, उसका इंतजार किए बिना महिला प्रधान तमाम फिल्में इनके निर्माताओं ने सीधे ओटीटी पर बेच दी। ओटीटी पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों में साल की शुरुआत एक शानदार फिल्म ‘कागज’ से हुई थी लेकन साल का समापन वैसा नही हो पाया। डिज्नी प्लस हॉटस्टार को बिकी निर्देशक आनंद एल रॉय की फिल्म ‘अतरंगी रे’ से दर्शकों को खासी उम्मीदें रहीं लेकिन सारा अली खान बहुत कोशिशें करके भी ‘रांझणा’ की सोनम कपूर बन नहीं पाईं। सारा अली खान फिल्म ‘लव आजकल’ में कार्तिक का करियर डुबाने की पूरी कोशिश कर चुकी हैं। अब बारी धनुष की दिखती है। खैर, ओटीटी का फायदा भी तो है कि जब फिल्म अच्छी न लगे तो तुरंत कुछ और देखना शुरू कर दो। ओटीटी पर सीधे रिलीज हुई जिन फिल्मों को दर्शकों ने इस साल बिना ब्रेक के देखा और खूब देखा, उनमें से 10 बेहतरीन फिल्मों की सूची मैं फिर से संजो लाया हूं। ये वो फिल्में हैं जिन्हें आप सर्दियों की छुट्टी में फिर से बिंज वॉच कर सकते हैं।

विज्ञापन

2 of 11
शेरशाह - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

10. शेरशाह

ओटीटी: प्राइम वीडियो

दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘परमवीर चक्र’ में अपने शहर के शहीद की कहानी देख फौज में जाने की प्रेरणा पाने वाले विक्रम बत्रा की कहानी कहती इस फिल्म को लोगों ने इस साल खूब देखा। लेकिन, इसकी याद ज्यादा दिनों तक लोगों के जेहन में रही नहीं। वन टाइम वॉच के लिए ठीक रही इस फिल्म की कहानी ऐसी है कि वह देश में ज्यादातर लोगों को पता है। जो कुछ फिल्म में है वह पहले से सबको पता है। विक्रम बत्रा के किरदार में सिद्धार्थ ने खुद को एक अच्छा अभिनेता साबित करने की कोशिश हालांकि पूरी की है। Shershaah Review: सिद्धार्थ की एक और कमजोर फिल्म, देशभक्ति का जज्बा जगाने में नाकाम ‘शेरशाह’

विज्ञापन

3 of 11
Rashmi Rocket - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

9. रश्मि रॉकेट

ओटीटी: जी5

फिल्म ‘रश्मि रॉकेट’ कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसके बारे में शुरू से दर्शकों को बताया जाता है कि उसके पड़ोसी उसे छोरी कम और छोरा ज्यादा समझते हैं। टॉम ब्वॉय वाली उसकी हरकतें दिखाई जाती हैं और दिखाया जाता है कि वह कभी रॉकेट की तरह उड़ने वाली धावक रही है। एक फौजी को बचाते समय लगाई गई उसकी दौड़ उसे भारतीय सेना के एक कैप्टन के करीब लाती है जो उसे फिर से ट्रैक पर उतारने की जिद ठान लेता है। अपनी मां से रश्मि का अजीब सा रिश्ता है। वह उसे नाम लेकर भी बुलाती है और दुलारती भी खूब है। खैर, रश्मि फिर से दौड़ना शुरू करती है। सूबे के सारे शूरवीरों को धराशायी करके राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौका पाती है। Rashmi Rocket Review: फिनिशिंग लाइन तक पहुंचने में कामयाब तापसी की फिल्म, आगे की दौड़ संभालना जरूरी

4 of 11
सरदार उधम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

8. सरदार उधम

ओटीटी: प्राइम वीडियो

बतौर निर्देशक शूजीत सरकार ने ‘सरदार उधम’ पर फिल्म बनाने का साहसिक काम किया है। इस शख्सीयत पर फिल्म बनाने की पहली कोशिश निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने कोई 50 साल पहले परीक्षित साहनी को लेकर की थी। ‘सरदार उधम’ में रिसर्च, आर्ट डायरेक्शन, सिनेमैटोग्राफी सब उम्दा है लेकिन तकनीकी रूप से बनी इस बेमिसाल फिल्म की पटकथा और इसकी बुनावट में असल समस्या है। विकी कौशल ने अपनी तरफ से सरदार उधम बनने की मेहनत पूरी की है और ये परदे पर दिखती भी है। बस, फिल्म देखते समय दिमाग में बार बार एक ही बात आती रहती है कि इस रोल में अगर वाकई इरफान होते तो फिल्म कैसी होती? Sardar Udham Movie Review: शूजीत की सुस्त फिल्मों का कालचक्र पूरा, लोकप्रिय तराने पर लिखा महाकाव्य

विज्ञापन

5 of 11
अभिषेक बच्चन - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

7. द बिग बुल

ओटीटी: डिजनी प्लस हॉटस्टार

अभिषेक बच्चन पर सुपरस्टार बनने का दबाव न रहा होता तो वह ना जाने कब खुद को एक बढ़िया अभिनेता के तौर पर स्थापित कर चुके होते। नाम में बच्चन जुड़ा तो सबने उनमें कलाकार नहीं सुपरस्टार ही देखा। वह अभिनेता अच्छे हैं बशर्ते निर्देशक को उनके अभिनय की सीमाएं पता हो। वह ड्रामा फिल्मों में बढ़िया काम करते हैं। ‘गुरु’, ‘युवा’, ‘बंटी और बबली’, ‘सरकार’, ‘धूम’ और ‘मनमर्जियां’ जैसी फिल्में उनके अभिनय का एक ऐसा ग्राफ खींचती हैं, जिनमें उनको खुद को एक अभिनेता के तौर पर आगे ले जाने का प्रयास दिखता है। इन फिल्मों के बीच तमाम फ्लॉप फिल्में भी हैं, लेकिन अपनी दूसरी पारी में अभिषेक एक बेहतर अभिनेता दिखने लगे हैं। ‘द बिग बुल’ इसकी एक और बानगी है। The Big Bull Review: बतौर अभिनेता अभिषेक का ऐश्वर्य बढ़ाती फिल्म, पढ़िए कहां चूकी और कहां रही इक्कीस

विज्ञापन

6 of 11
सरदार का ग्रैंडसन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

6. सरदार का ग्रैंडसन

ओटीटी: नेटफ्लिक्स

फिल्म ‘सरदार का ग्रांडसन’ की हीरोइन नीना गुप्ता ही हैं। 62 साल की नीना गुप्ता ने 90 साल की एक ऐसी बुजुर्ग का किरदार फिल्म में किया है जिसका नाम है सरदार कौर। अपने पति के साथ मिलकर लाहौर में उन्होंने बहुत सपने बुने। लेकिन, दंगा उनके अरमानों का क़ातिल निकला। अपने दुधमुंहे बच्चे को सीने से बांधकर और एक साइकिल लेकर वह लाहौर से भागती है। सरहद के इस पार अमृतसर को वह अपना ठिकाना बनाती है और शुरू करती है एक साइकिल कंपनी। इतनी बड़ी कंपनी कि जिसका एक रत्ती भर हिस्सा भी अब सरदार की वसीयत में होना किसी को मालामाल कर सकता है। सरदार की बस एक ही ख्वाहिश है कि मरने से पहले उसे लाहौर वाला अपना घर देखना है। Sardar Ka Grandson Review: युवा निर्देशक ने दिग्गजों को दिखाया रिश्तों का आईना, ‘सरदार’ फिर चैंपियन

 

विज्ञापन

7 of 11
तूफान - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

5. तूफान

ओटीटी: प्राइम वीडियो

राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने मौजूदा दौर के हिसाब से ही इस फिल्म की कहानी चुनी है। कहानी के साथ साथ वह अपनी निर्देशकीय टिप्पणियां भी करते चलते हैं। राकेश कभी पलायनवादी फिल्मकार नहीं रहे। ‘मिर्ज्या’ की सबसे बड़ी सीख भी उनको यही मिली होगी। अजीज अली के किरदार में कई बार खुद राकेश ओमप्रकाश मेहरा का अक्स दिखने लगता है। फिल्म ‘तूफान’ एक तरह से उनका भी सिनेमा में पुनर्जन्म है। उनकी इसी फिल्म का एक संवाद है, ‘जब लाइफ मौका देगी तो क्या करेगा, आने देगा या जाने देगा?’ फिल्म लंबी जरूर है और इसलिए कहीं अटकती और खटकती है। लेकिन एक अच्छी पटकथा ही एक अच्छी फिल्म की जान होती है ये फिल्म ‘तूफान’ फिर एक बार समझाती है। Toofaan Review: बॉक्सिंग के बहाने राकेश मेहरा ने फिर की सिस्टम और समाज पर चोट, फरहान व मृणाल एक नंबर

8 of 11
बॉब बिस्वास - फोटो : सोशल मीडिया

4. बॉब बिस्वास

ओटीटी: जी5

फिल्म ‘बॉब बिस्वास’ देखा जाए तो पूरी तरह से अभिषेक बच्चन की फिल्म है। पिता ने 58 साल की उम्र में जो सबक फिल्म ‘मोहब्बतें’ से सीखा, वही सबक अभिषेक ‘मनमर्जियां’ करके सीख चुके हैं। 14 साल पहले अभिषेक ने फिल्म ‘गुरु’ से लीक से इतर किरदार करने की हिम्मत बांधी थी। इस पोटली का नया स्वाद है ‘बॉब बिस्वास’। प्रोस्थेटिक, मेकअप, कपड़े, चाल ढाल सब बिल्कुल बॉब बिस्वास जैसी। शुरू के 15-20 मिनट लगते हैं फिल्म को सेट होने में लेकिन, उसके बाद अभिषेक बच्चन आखिर तक नजर नहीं आते और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी जीत है। बॉब के अपने बेटे से मिलने स्कूल पहुंचने वाले सीन में अभिषेक का अभिनय इनाम का हकदार है। Bob Biswas Review: सुपारी किलर के किरदार में खूब जमे अभिषेक बच्चन, सुजॉय की बिटिया का दमदार डेब्यू

9 of 11
कागज - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

3. कागज

ओटीटीजी5

तो ये कहानी है एक कॉमन मैन की। आपने कभी गौर किया कि कैसे सिनेमा से कॉमन मैन यानी कि एक आम आदमी को धीरे धीरे हाशिये पर पहुंचा दिया गया है। अब कहानियां उन लोगों की दिखती हैं जिनके बारे में सिनेमा बनाने वाले जानते हैं। जो सिनेमा को जानते हैं, उनकी कहानियों का क्या?  सतीश कौशिक ने भी अपनी फिल्म ‘कागज’ का ये आम आदमी 17 साल पहले तलाशा था और दाद देनी चाहिए उनके जीवट, जिद और जज्बात की कि वह लगातार इस कहानी को परदे पर पहुंचाने के लिए प्रयास करते रहे। Kaagaz Review: आम इंसान की कहानी की हिंदी सिनेमा में वापसी की एक और कोशिश, जरूर देखिए फिल्म ‘कागज’

10 of 11
विद्या बालन की फिल्म 'शेरनी' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

2. शेरनी

ओटीटी: प्राइम वीडियो

फिल्म ‘शेरनी’ एक सच्ची घटना से निकली फिल्म है। एक ऐसे माहौल की फिल्म जिसमें वोटों के लिए इंसानों की बलि दे दी जाती है, शेरनी की तो औकात ही क्या है। विद्या बालन के करियर का ये एक और अहम पड़ाव है। पिछले साल उनकी फिल्म ‘शकुंतला देवी’ को ओटीटी पर बेइंतेहा प्यार मिला। यहां वह एक ऐसी फिल्म में हैं, जिसमें उनका जंगल और जानवरों से प्यार एक बहुत बड़ा संदेश देता है। विद्या ने हिंदी सिनेमा में अभिनय की जो लीक बनानी शुरू की है, वहां तक उसे कम अभिनेत्रियां ही खींचकर ला पाई हैं। वह फिल्म दर फिल्म कमाल कर रही हैं। फिल्म ‘शेरनी’ भी उनके सहज अभिनय का विस्तार बन गई है। Sherni Review: इंसानों के जंगल में ईमान की ‘शेरनी’, अमित मसुरकर ने छेड़े जन, जंगल और जिंदगी के तार

विज्ञापन

11 of 11
MIMI - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

1. मिमी

ओटीटी: जियो सिनेमा, नेटफ्लिक्स

इस फिल्म में कृति सैनन ने अपने करियर का सबसे असरदार रोल किया है।  ‘परम सुंदरी’ गाने में अपने सस्ते हाव भाव दिखाने वाली अभिनेत्री मां बनने के समय जब पूरा जबड़ा खींचकर चीखती है और ऊपर नीचे के दांतों के बीच फंसी लार के रेशे बनते हैं तो देखने वाला सिहर जाता है। कृति ने हर सीन में इक्कीस काम किया है। फिर चाहे वह पंकज त्रिपाठी के साथ वाले सीन हों, साईं तम्हणकर के साथ बुर्के पहनकर जाना हो या फिर अपने मां-बाप के सामने अपने टूटे सपनों का जुलूस निकलता देखना हो। Mimi Movie Review: मराठी की क्लासिक फिल्म का दमदार हिंदी संस्करण, कृति की नेशनल अवार्ड की दावेदारी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें