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बलराज साहनी की इस फिल्म ने जीता था फिल्मफेयर का पहला बेस्ट फिल्म अवॉर्ड, ये हैं 10 यादगार फिल्में

Mon, 13 Apr 2020 12:41 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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बलराज साहनी - फोटो : डेमो
आज ही के दिन सन 1973 में दुनिया छोड़ गए मशहूर अभिनेता बलराज साहनी ने निधन से बस एक दिन पहले अपनी आखिरी फिल्म गरम हवा की डबिंग पूरी की। उनकी आखिरी रिकॉर्डेड लाइन रही, “इंसान कब तक अकेला जी सकता है?” महात्मा गांधी के आशीर्वाद से बीबीसी रेडियो में नौकरी पाने वाले बलराज साहनी ने रबींद्र नाथ टैगोर के शांति निकेतन में अपनी पत्नी दमयंती के साथ अध्यापन भी किया और बाद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की युवा इकाई के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। उनके तमाम किरदारों में सर्वहारा के संकट के सिनेमाई प्रतिबिंब खूब दिखाई देते हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि गुरुदत्त निर्देशित देव आनंद की मशहूर फिल्म बाजी बलराज साहनी ने ही लिखी थी। आइए आज आपको बताते हैं उनके 10 कालजयी किरदारों के बारे में।
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धरती के लाल - फोटो : Social Media
किरदार: निरंजन
फिल्म: धरती के लाल (1946)


ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्माण और निर्देशन में बनी यह फिल्म उस समय की दुनिया में सबसे ज्यादा सराही गई फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने गरीब किसान के एक बेटे का किरदार निभाया है। वह उसूलों का इतना पक्का होता है कि वह भूखे मरने और भीख मांगने के लिए तैयार है, लेकिन अपनी जमीन को बेचने के लिए तैयार नहीं है। वह धरती को अपनी इज्जत समझता है। पूरे सोवियत संघ में देखी जाने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है। इस फिल्म को 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को केंद्र में रखकर बनाया गया है, जिसमें लगभग 15 लाख लोगों की जान गई थी।
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दो बीघा जमीन
किरदार: शम्बू महतो
फिल्म: दो बीघा जमीन (1953)


महान फिल्म निर्माता और निर्देशक बिमल रॉय की बनाई इस फिल्म में भी बलराज साहनी एक गरीब किसान शम्भू महतो के रूप में नजर आए। शम्भू अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए खेती-बाड़ी करता है और साथ ही रिक्शा भी खींचता है। गरीब इंसान की वैसे ही बहुत परेशानियां होती हैं। शम्भू की परेशानी और बढ़ जाती हैं, जब उसके यहां सूखा पड़ जाता है। सूखे से तो उबरने के बाद उसके सामने एक नई परेशानी आती है जब, उसके गांव का जमीदार उसकी दो बीघा जमीन को भी हथियाने के लिए जुट जाता है। बलराज साहनी के साथ इस फिल्म में निरूपा रॉय और रतन कुमार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म ने कान फिल्मफेस्टिवल में धूम मचा दी। इस फिल्म ने फिल्फेयर का पहला बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड भी जीता।

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भाभी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: रतन लाल
फिल्म: भाभी (1957)


कृष्णन पंजू के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म है। इसमें बलराज साहनी एक परिवार के मुखिया रतन लाल के रूप में नजर आए। रतन लाल अपने बच्चों के अमानवीय बर्ताव से परेशान हो जाता है, जिसके बाद घर का बड़ा होने की वजह से उसे कुछ ऐसे बलिदान देने पड़ते हैं, जो उसके लिए बिल्कुल आसान नहीं थे। वह अपनी पत्नी के मर जाने के बाद भी अपने घर को बहुत अच्छे से संभालने की कोशिश करता है। इस फिल्म में बलराज साहनी के साथ नंदा, डेजी ईरानी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई है।
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छोटी बहन - फोटो : Social Media
किरदार: राजेंद्र
फिल्म: छोटी बहन (1959)


जैसा कि फिल्म के शीर्षक से पता चल रहा है कि यह फिल्म एक छोटी बहन पर ही आधारित है। इसके बड़े भाई का किरदार बलराज साहनी ने राजेंद्र के रूप में निभाया है। राजेंद्र अपनी स्कूल की अध्यापिका से प्यार करता है लेकिन वह प्रण लेता है, कि जब तक उसकी छोटी बहन की शादी नहीं हो जाती तब तक वह शादी नहीं करेगा। छोटी बहन का जीवन संवारते संवारते वह अंत तक अपनी खुशी इकट्ठा नहीं कर पाता। मशहूर निर्देशक एल वी प्रसाद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी के साथ नंदा, धूमल, महमूद, रहमान आदि ने मुख्य भूमिका निभाई है।
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balraj sahni
किरदार: पंचू दादा
फिल्म: दिल भी तेरा, हम भी तेरे (1960)


अर्जुन हिंगोरानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी ने पंचू दादा का किरदार निभाया है। वह अपने एक भाई के साथ मुंबई के आसपास ही रहता है, लेकिन उसके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है। फिर भी वह एक खुद्दार इंसान है। गरीब होते हुए भी वह किसी की मदद नहीं लेना चाहता। यह हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता धर्मेंद्र की पहली फिल्म है। उन्होंने इस फिल्म में बलराज साहनी के दोस्त का किरदार निभाया है। इन दोनों के अलावा इस फिल्म में कुमकुम और उषा किरण ने मुख्य भूमिका निभाई है।
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बलराज साहनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: अब्दुल रहमान खान
फिल्म: काबुलीवाला (1961)


यह फिल्म मशहूर कहानीकार रविन्द्र नाथ टैगोर की लिखी किताब 'काबुलीवाला' पर आधारित है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने अब्दुल रहमान खान काबुलीवाला का किरदार निभाया है। वह अफगानिस्तान से कलकत्ता आ गया है और यहां सूखे मेवे बेचने का काम करता है। एक घर की लड़की में उसे अपनी बेटी नजर आती है जिसे वह अफगानिस्तान में छोड़ आया है। उसे उस लड़की से बहुत लगाव हो जाता है। इस शानदार फिल्म को हेमेन गुप्ता ने निर्देशित और बिमल रॉय में निर्मित किया है।

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balraj sahni - फोटो : social media
किरदार: श्याम
फिल्म: भाभी की चूड़ियां (1961)


बलराज साहनी एक बार फिर यहां एक बड़े भाई के रूप में नजर आए। वह अपने छोटे भाई को अपनी पत्नी गीता (मीना कुमारी) के साथ मिलकर पाल-पोस कर बड़ा करते हैं, और उसकी शादी करवाते हैं। लेकिन उसके छोटे भाई की पत्नी अपने पति की अपने परिवार के प्रति वफादारी देख कर जलने लगती है, और अपने मायके चली जाती है। श्याम (बलराज साहनी) अपने परिवार को जोड़ने की कोशिश करता है। सदाशिव जे राव कवि के निर्देशन में बनी इस ड्रामा फिल्म में बलराज पूरे पारिवारिक आदमी के रूप में नजर आए।

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बलराज साहनी - फोटो : डेमो
किरदार: लाला केदारनाथ
फिल्म: वक्त (1965)


यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे पहली मल्टीस्टारर फिल्म है। इस फिल्म में सुनील दत्त, राजकुमार और शशि कपूर ने बलराज साहनी के बेटे का किरदार निभाया है। लाला केदारनाथ के किरदार में बलराज एक संपन्न परिवार के मुखिया हैं। उनके तीनों बेटों का जन्मदिन एक ही दिन मनाया जाता है। केदारनाथ को अपनी संपत्ति पर बहुत गुमान होता है। एक बार भूकंप में उनका पूरा घर तबाह हो जाता है, और केदारनाथ कंगाल हो जाते हैं। फिर शुरू होती है केदारनाथ की असली परीक्षा। इस फिल्म में बलराज साहनी पर फिल्माया गया गाना, ऐ मेरी जोहराजबीं फिल्म की तरह की सुपरहिट रहा।

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balraj sahni and neetu singh - फोटो : youtube
किरदार: नवेन्दु गुप्ता
फिल्म: दो रास्ते (1969)


राज खोसला के निर्देशन और निर्माण में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी ने नवेन्दु गुप्ता का किरदार निभाया है। यह एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म है, जिसमें तीन भाई और उनकी पत्नियां हैं। नवेन्दु इस घर में सबसे बड़े भाई हैं, जो अपने दूसरे भाइयों से मेलजोल करके घर के सारे फैसले लेते हैं। यह एक मध्यम वर्गीय परिवार है, जिसमें आए दिन मनमुटाव और क्लेश होते रहते हैं। तमाम दिक्कतों के बावजूद नवेन्दु इस परिवार को जोड़कर रखने की कोशिश करता है।
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बलराज साहनी - फोटो : डेमो
किरदार: सलीम मिर्जा
फिल्म: गरम हवा (1973)


एमएस सथ्यू के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी ने अपने करियर का सबसे अच्छा अभिनय करके दिखाया है। हालांकि वे इस फिल्म को रिलीज होता हुआ नहीं देख पाए, और दुनिया छोड़ गए। इस फिल्म में बलराज ने एक ऐसे परिवार के मुखिया का किरदार निभाया है, जो देश के बंटवारे के वक्त भारत में ही रह गया था। वह लंबे समय तक इसी कश्मकश में पड़ा रहता है कि उसे अपने बाकी के रिश्तेदारों की तरह पाकिस्तान चले जाना चाहिए, या फिर यहीं रह जाना चाहिए।
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