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Shatrughan Sinha: करियर की शुरुआत में विलेन बनकर चमके शत्रुघ्न सिन्हा, दमदार आवाज से किया 'खामोश'

Fri, 12 Apr 2024 01:39 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : सोशल मीडिया
बॉलीवुड में कामयाब पारी के बाद शत्रुघ्न सिन्हा अब राजनीति की दुनिया में सक्रिय हैं। वह टीएमसी पार्टी से सांसद हैं। बॉलीवुड में 'शॉटगन' के नाम से मशहूर हुए शत्रुघ्न ने कई शानदार फिल्मों में अभिनय किया है। हीरो के रोल में वह छाए, लेकिन उससे पहले उन्होंने खलनायक के रूप में अच्छी पहचान बनाई। दिलचस्प बात यह है कि करियर के शुरुआत में वह चमके ही विलेन बनकर। ...और आज हम आपको यह सब इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि आज उनकी उस फिल्म 'दोस्त' ने 50 साल का सफर पूरा कर लिया है, जिसमें वह खलनायक बने नजर आए। 
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फिल्म 'दोस्त' - फोटो : सोशल मीडिया
बुलंद आवाज और तीखे तेवर आए काम
दुलाल गुहा के निर्देशन में बनी फिल्म 'दोस्त' में शत्रुघ्न के अलावा धर्मेंद्रऔर हेमा मालिनी भी अहम रोल में नजर आए। यह फिल्म साल 1974 में रिलीज हुई थी। शत्रुघ्न सिन्हा ने गोपीचंद्र यानी गोपी शर्मा का नेगेटिव रोल निभाकर खूब सुर्खियां बटोरीं। लेकिनस इससे पहले अभिनेता ने जब 70-80 के दौर में अभिनय करियर शुरू किया तो नेगेटिव भूमिका ही उनके खाते में आई। उनकी बुलंद आवाज और तीखे तेवरों ने भी खलनायक के रूप में उन्हें पहचान दिलाने में खूब मदद की। इसके अलावा चेहरे पर कट का निशा सोने पर सुहागा बन गया। 
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शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : सोशल मीडिया
इन फिल्मों में बने खलनायक
शत्रुघ्न सिन्हा को अभिनय का पहला मौका देव आनंद की फिल्म 'प्रेम पुजारी' में एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी की भूमिका निभाने से मिला। इसके बाद, उन्हें 1969 में मोहन सहगल की फिल्म साजन में एक पुलिस इंस्पेक्टर की छोटी सी भूमिका मिली  प्रेम पुजारी की रिलीज में देरी हुई, इसलिए उनकी पहली रिलीज फिल्म 'साजन' (1969) थी। इसी साल यानि 1969 में ही अभिनेता की फिल्म 'प्यार ही प्यार' आई, जिसमें वह खलनायक के रोल में दिखे और छा गए। फिल्म 'प्यार' ही प्यार' के अलावा शत्रुघ्न सिन्हा ने बनफूल, रामपुर का लक्ष्ण, भाई हो तो ऐसा, हीरा और ब्लैकमेल सहित कई और फिल्मों में नेगेटिव भूमिका अदा कीं। अपनी बुलंद आवाज और तीखे तेवर से शत्रुघ्न सिन्हा जब पर्दे पर नेगेटिव भूमिका में आते तो दर्शक मुरीद हो जाते।  
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शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : सोशल मीडिया
चेहरे का 'धब्बा' बना ताकत
शत्रुघ्न हीरो बनने का सपना लिए माया नगरी पहुंचे थे और उनका यह सपना पूरा भी हुआ। लेकिन, शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं। कोई भी उन्हें काम देने को तैयार नहीं था। दरअसल, इसका कारण था उनके गाल पर बना कट का निशान। निर्देशक और निर्माता उनके साथ काम करने को तैयार नहीं थे। काफी रिजेक्शन के बाद अभिनेता निराश हो गए और प्लास्टिक सर्जरी का पूरा मन बना लिया था, लेकिन देव आनंद ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया और समझाया कि इस निशान को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि, ताकत बनाएं। शत्रुघ्न ने यह सलाह मानी और प्लास्टिक सर्जरी का इरादा बदल लिया। बाद में यही कट का निशान उनकी ताकत बना। शत्रुघ्न सिन्हा ने शुरुआत में नेगेटिव रोल और साइड भूमिकाओं को भी इतने दमदार तरीके से निभाया कि दर्शकों के चहेते बन गए। 
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शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : PTI
फिल्मों के बाद ओटीटी की तरफ रुख?
शत्रुघ्न के गाल पर बने कट के एक निशान ने उन्हें इंडस्ट्री का मशहूर खलनायक बनने में और मदद की। इस निशान की वजह से ही शत्रुघ्न सिन्हा विलेन के रूप में और ज्यादा जंचे। निर्देशकों ने भी अपनी फिल्मों के लिए इस निशान को खूब अच्छे से इस्तेमाल किया। फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाते शत्रुघ्न इस कट को और हाइलाइट करते थे। राजनीतिक करियर की बात करें तो शत्रुघ्न सिन्हा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से आसनसोल से सांसद हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में टीएमसी से आसनसोल सीट से प्रत्याशी हैं। वहीं, वर्क फ्रंट की बात करें तो वह ओटीटी सीरीज 'गैंग्स ऑफ गाजियाबाद' को लेकर भी चर्चा में हैं।
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