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अजब: UPSC में पूछे गए हिंदी शब्दों के अर्थ, अभ्यर्थी ने तो सिर्फ सवाल छोड़े, प्रश्न देख अधिकारी भी हुए बेहाल

Fri, 15 Oct 2021 07:54 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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विशेषज्ञों द्वारा दिए गए जवाब - फोटो : अमर उजाला
क्या आप जाहक, शेषमूलक और वज्रशल्क आदि शब्दों का मतलब जानते हैं? क्या कभी ऐसे शब्द सुने हैं? अगर आपका जवाब नहीं है तो हम आपको बता देते हैं कि ये सभी हिंदी भाषा के शब्द हैं। दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों से कुछ ऐसे ही हिंदी शब्दों का अर्थ पूछा गया, जिसे देख परीक्षार्थी हैरान रह गए। ऐसे में अमर उजाला ने वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों समेत करीब 50 विशेषज्ञों से व्हॉट्सएप पर संपर्क किया। उनसे इन शब्दों के अर्थ जानने की कोशिश की गई। आप भी जान लीजिए कि इन वरिष्ठ अधिकारियों ने हिंदी के शब्दों पर क्या-क्या जवाब दिए।
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विशेषज्ञों द्वारा दिए गए जवाब - फोटो : अमर उजाला
सवाल पर अधिकारियों ने यूं रखी अपनी बात
कुछ अधिकारियों ने संदेश भेजने वाले अधिकारी की सेहत ठीक होने की उम्मीद जताते हुए अपना ख्याल रखने की सलाह दी। वहीं, कुछ अधिकारियों ने कनिष्ठ अधिकारियों से शब्दकोष पलटवाया, जबकि शब्दों की जटिलता को देखते हुए कुछ यही नहीं समझ सके कि यह हिंदी है या संस्कृत। कई अधिकारियों ने हाथ जोड़ती, मुस्कराती और चुप्पी साधने वाले संकेतक भेजे।
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विशेषज्ञों द्वारा दिए गए जवाब - फोटो : अमर उजाला
अधिकतर अधिकारी नहीं दे सके सही जवाब
दिलचस्प यह कि विषय विशेष के जानकारों ने जब अपने विषय से जुड़े शब्दों का जवाब भेजा, तो उनमें भी अंग्रेजी में अनुवादित शब्दों का ही सहारा लिया। वह हिंदी के पर्यायवाची भी नहीं ढूंढ सके। कोई भी अधिकारी 30 फीसदी से ज्यादा शब्दों का सही जवाब नहीं दे सका। दिलचस्प यह है कि कुछ अधिकारियों ने जवाब देने की बजाए यह कहकर बात खत्म की कि आज कल इंटरनेट पर सब कुछ उपलब्ध है। वहीं कुछ ने अधिकारियों ने हिंदी भाषा में दिए जवाब में भी मात्रा की गलती की है।
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विशेषज्ञों द्वारा दिए गए जवाब - फोटो : अमर उजाला
हिंदी के शब्दों को बताया अंग्रेजी से ज्यादा विदेशी
हिंदी प्रतिभागियों के साथ ज्यादती होने की बात कहते हुए ज्यादातर अधिकारियों ने यूपीएससी को सलाह दी कि संस्था हिंदी के शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान दे। जटिल शब्दों की जगह आम प्रयोग में आने वाले शब्दों का ही इस्तेमाल हो। कुछ हिंदी विद्वानों ने इन शब्दों को अंग्रेजी से भी ज्यादा विदेशी बताया है। वहीं कुछ का कहना था कि ऐसे कठिन शब्द ऊंची कक्षाओं में भी नहीं पढ़ाए जाते हैं। यही वजह है कि इनका अर्थ समझ पाना मुश्किल हो रहा है।
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