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जेईई एडवांस्ड परीक्षा: हर मुश्किल से जूझकर बनाई राह, जानिए इन कामयाब चेहरों की कहानी

Sat, 16 Oct 2021 06:57 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

JEE Advanced Result: दिल्ली क्षेत्र की मृदुल अग्रवाल ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में टॉप किया है, जिसके परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। उसने 360 में से 348 अंक हासिल किए हैं।
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जेईई एडवांस्ड 2021 - फोटो : Amar Ujala
जेईई-एडवांस्ड के नतीजे बताते हैं कि मेहनत, लगन और हौसले के बूते हर मुश्किल के बीच से राह बनाई जा सकती है। कोरोना हो या जीवन के तनाव, सभी को पार करते हुए इन होनहारों ने आने वाले विद्यार्थियों के लिए मिसालें गढ़ दी हैं। वे बताते हैं कि 14 घंटे तक मेहनत, सही सामग्री के चयन और लगन से दुनिया का हर लक्ष्य पाना मुमकिन है।

इस बार हर जोन से पांच टॉपरों की सूची भी जारी
इस वर्ष 7 आईआईटी जोन में प्रत्येक जोन से पांच टॉपर्स की सूची भी जारी की गई है। इनमें मुंबई जोन से सोनी नमन निर्मल, दिल्ली जोन से मृदुल अग्रवाल, गुवाहाटी जोन से अस्मित सिंह, कानपुर जोन से यश वीरानी, खड़गपुर जोन से अक्षत गोयल, हैदराबाद जोन से रामास्वामी संतोष रेड्डी एवं रुड़की जोन से चैतन्य अग्रवाल टॉपर हैं। टॉप-100 में आईआईटी मुंबई व दिल्ली जोन से 28-28 रुड़की जोन से 13 हैं।

जोसा काउंसलिंग 16 अक्तूबर से
जॉइंट सीट अलॉटमेंट अथॉरिटी (जोसा) वेबसाइट पर जेईई-एडवांस्ड में चयनित विद्यार्थी 16 अक्तूबर प्रात: 10 बजे से रजिस्ट्रेशन तथा रैंक के अनुसार प्रवेश के लिए चॉइस फिलिंग प्रारंभ कर सकते हैं। प्रवेश प्रक्रिया 24 नवंबर तक जारी रहेगी। काउंसलिंग पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। छात्रों को सलाह दी गई है कि ऑनलाइन जोसा काउंसलिंग में पंजीकरण और फीस जमा करवाएं।

श्रेणीवार टॉपर
सामान्य वर्ग - मृदुल अग्रवाल
ओबीसी - प्रियांशु यादव
जनरल ईडब्ल्यूएस - रामास्वामी संतोष रेड्डी
एससी - नंदीगामा निखिल    g एसटी - बिजली प्रचोत्थान वर्मा
एससी दिव्यांग - राजकुमार   g एसटी दिव्यांग - रविशंकर मीणा
सामान्य दिव्यांग - अर्णव जयदीप कलगुटकर
सामान्य ईडब्ल्यूएस दिव्यांग - युवराज सिंह
ओबीसी दिव्यांग - गोरले कृष्ण चैतन्य
 
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कुछ आंकड़े भी..

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • 17 छात्र-छात्रओं का जेईई मेंस में सौ परसेंटाइल आया था।
  • 16,053 सीटों पर बीटेक में दाखिले होंगे
  •  2.50 लाख जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई
  • 229 शहरों में हुई थी जेईई एडवांस्ड परीक्षा
  • सभी 23 आईआईटी, 31 एनआईटी, 26 आईआईआईटी सहित 113 केंद्रीय संस्थानों के बीटेक में होंगे दाखिले।

आईआईटी प्रिपरेटरी लिस्ट भी आई
जेईई एडवांस्ड के लिए कैटेगरी वाइज मेरिट लिस्ट के साथ आईआईटी ने प्रिपरेटरी लिस्ट भी जारी की है। इस लिस्ट में उन उम्मीदवारों के नाम हैं, जो जेईई एडवांस्ड में सफल तो हुए, लेकिन उनके अंक कम हैं, इसलिए उन्हें आईआईटी प्रिपरेटरी क्लास कराएगा, ताकि वे बाकी छात्रों की बराबरी में आ सकें।
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मृदुल अग्रवाल : 9वीं से शुरू की तैयारी, हर दिन 14 घंटे तक कड़ी मेहनत ने बनाया टॉपर

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मृदुल अग्रवाल - फोटो : Amar Ujala
मूल रूप से राजस्थान निवासी मृदुल अग्रवाल कहते हैं, मेरा सपना आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना था, जो सच हो रहा है। मृदुल के पिता प्रदीप अग्रवाल निजी कंपनी में फाइनांस हेड और मां  पूजा अग्रवाल गृहिणी हैं। मृदुल ने बताया कि वह रोज 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे। इसमें कोचिंग के साथ 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी भी शामिल थी। आईआईटी की तैयारी 9वीं कक्षा से ही शुरू कर दी थी।

कोविड के दौरान स्कूल कोचिंग में क्लासेज बंद होने से मिले अतिरिक्त समय का मैंने भरपूर फायदा उठाया। एनसीईआरटी किताबों का भी अध्ययन किया। इससे पहले जेईई मेन 2021 की मेरिट में उन 17 छात्रों की सूची में शामिल थे, जिन्होंने 100 फीसदी अंक लिए थे। अभिभावकों ने बताया कि उन्हें सीबीएसई की 12वीं बोर्ड में भी 98.2 फीसदी अंक मिले थे। मृदुल बोले, भगवान ने आशीर्वाद के रूप में मुझे जेईई एडवांस्ड में पहली रैंक दिलाई है।

सुंदर पिचाई से मिली प्रेरणा
मृदुल ने बताया, वह गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को अपनी प्रेरणा मानते हैं। सुंदर पिचाई की आईआईटी खड़गपुर से लेकर सिलिकॉन वैली और गूगल के सीईओ बनने तक के सफर ने उन्हें काफी प्रोत्साहित किया। मृदुल ने कहा कि मुश्किल समय में मां से उन्हें निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहा।

धनंजय रमन : कंप्यूटर साइंस में रुचि, कोरोना महामारी में भी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया

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धनंजय रमन - फोटो : Amar Ujala
ओवरऑल दूसरी रैंक हासिल करने वालेे द्वारका सेक्टर-2 दिल्ली निवासी धनंजय रमन कंप्यूटर पर शोध करना चाहते हैं। धनंजय ने प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई करके यह सफलता हासिल की है। 17 साल के धनंजय ने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया जेईई एडवांस में दूसरी रैंक पाई है। कोरोना महामारी के दौर में पढ़ाई पर धनंजय ने बताया, महामारी के दौरान भी उनकी पढ़ाई जारी रही। उनकी मां ललिता रमन बीएसएनएल में इंजीनियर और पिता आर. रमन प्राइवेट जॉब में थे। दोनों अब सेवानिवृत्त हैं।

बड़ी बहन केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ रही हैं। मां और बड़ी बहन ने उन्हें हमेशा इंजीनियरिंग के लिए प्रेरणा और पढ़ाई में मदद दी। धनंजय बचपन से अपनी बहन की किताबें भी पढ़ते थे। उन्होंने 10वीं से ही इंजीनियरिंग के लिए पूरी तरह मन बना लिया था। सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में 97 फीसदी अंक हासिल किए थे। उन्होंने जेईई मेंस में 150वीं रैंक पाई थी। इस कामयाबी से खुश धनंजय ने बताया कि दोस्तों और रिश्तेदारों के फोन लगातार आ रहे हैं। धनंजय आईआईटी बांबे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर आईआईएससी बंगलूरू से शोध करना चाहते हैं।
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अनंत लूनिया : टीवी सीरीज भी देखी, निराशा के बावजूद तनाव दूर कर पहले ही प्रयास में कामयाबी

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अनंत लूनिया - फोटो : Amar Ujala
दिल्ली के वसंत कुंज के सी-1 निवासी और जेईई एडवांस्ड में तीसरी रैंक प्राप्त करने वाले अनंत लूनिया ने बताया कि उन्हें रोज 10-12 घंटे पढ़ाई से कामयाबी मिली। कई बार पूरा दिन टेस्ट में ही निकल जाता था। कोविड के दौरान घर में ही रहकर पढ़ाई करनी पड़ी। इससे कई बार वे निराश भी हुए। तनाव दूर करने की रणनीति पर उन्होंने बताया कि खाली समय में टीवी सीरीज देखने से उन्हें बड़ी राहत मिलती है।

अनंत ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा 98.6 फीसदी अंकों से पास की थी। जेईई मेंस में उनकी रैंक 315वीं थी। अनंत को जेईई एडवांस में पहले प्रयास में ही तीसरी रैंक हासिल हुई है। अनंत अब आईआईटी दिल्ली या आईआईटी बांबे में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लेना चाहते हैं। वे इंजीनियरिंग की चार साल पढ़ाई के दौरान बनाएंगे। उनके पिता आशीष जैन फाइनेंस ऑफिसर हैं, जबकि मां निजी कंपनी में एंकर हैं।
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काव्या चोपड़ा : छात्रा वर्ग टॉपर, जितनी हो सकी, उतनी की पढ़ाई, नहीं लिया तनाव

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काव्या चोपड़ा - फोटो : Amar Ujala
छात्रा वर्ग में टॉपर दिल्ली निवासी काव्या चोपड़ा आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस में दाखिला लेना चाहती हैं। उन्होंने नियमित 7-8 घंटे पढ़ाई की और सोशल मीडिया से दूर रहीं। उन्होंने जेईई मेन 2021 में 300 में से 300 अंक हासिल किये थे। जेईई मेन में 100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाली वह पहली छात्रा रहीं। दिल्ली पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज से पढ़ीं काव्या ने बताया, बचपन से गणित बेहद पसंद रहा है और मेरी मां भी गणित विषय की शिक्षिका हैं। 

इसलिए कंप्यूटर साइंस में भविष्य बनाना चाहती हूं। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद कभी अधिक दबाव नहीं लिया। मुझे नहीं लगता कि किसी को पूरे दिन पढ़ाई की जरूरत है। जितना हो सके उतनी ही पढ़ाई करें। सोशल मीडिया से दूरी रखीं। महामारी में ऑनलाइन पढ़ाई का शेड्यूल बनाकर तैयारी शुरू की और पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया।

यह दुनिया का अंत नहीं
असफल होने वाले छात्रों से मुझे कहना है कि भले ही आपने जेईई पास नहीं किया हो, लेकिन यह दुनिया का अंत नहीं है। इसलिए किसी और क्षेत्र में भविष्य बनाने पर ध्यान दें।

तीनों ओलंपियाड में सफल रहीं
काव्या चोपड़ा ने दसवीं में 97.6 फीसदी अंक हासिल किए थे। नौवीं से रीजनल मैथ्स ओलंपियाड क्वालिफाई कर रही हैं। वे 10वीं कक्षा में इंडियन जूनियर साइंस ओलंपियाड क्वालिफाई करने के बाद होमी जहांगीर भाभा सेंटर मुंबई कैंप में भी शामिल हुईं। ग्यारहवीं में नेशनल स्टैंडर्ड एग्जामिनेशन इन एस्ट्रोनॉमी (एनएसईए) में सफल रही हैं।
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अर्णव आदित्य सिंह : ढाई साल की मेहनत सफल, सभी विषयों को बराबर समय

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अर्णव आदित्य सिंह - फोटो : Amar Ujala
बंगलूरू निवासी अर्णव आदित्य ने जेईई एडवांस में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल की है। वे बताते हैं कि आईआईटी के सपने को साकार करने के लिए ढाई साल की मेहनत कामयाब हो गई है। सभी विषयों को बराबर समय दिया और बिना किसी लेटलतीफी के सभी विषयों का रिवीजन भी किया। रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई के साथ खाली समय में छोटे भाई के साथ वीडियो गेम या चेस खेलना पसंद है।
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