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जेवलिन खरीदने को नहीं थे पैसे...पर हार नहीं मानी, यूट्यूब से सीखा और CWG में जीता गोल्ड

Sun, 22 Apr 2018 04:06 PM IST
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नीरज चोपड़ा
जेवलिन खरीदने को पैसे नहीं थे, कहीं से ट्रेनिंग भी नहीं ले सकता था। लेकिन बहादुर बेटे ने हिम्मत नहीं हारी और आज गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।
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नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के 10वें दिन शनिवार को भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाल दिया। नीरज ने भालाफेंक स्पर्धा में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। इसी के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों में भालाफेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। नीरज की इस उपलब्धि पर पिता सतीश कुमार व मां सरोज देवी की आंखों से आंसू छलक आए।
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नीरज चोपड़ा
नीरज ने फाइनल में 86.47 मीटर की दूरी तय करते हुए सोने का तगमा हासिल किया। स्पर्धा का रजत पदक ऑस्ट्रेलिया के हेमिश पीकॉक के नाम रहा, जिन्होंने 82.59 की दूरी तय की। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 82.20 की दूरी तय कर कांस्य पदक अपने नाम करने में सफल रहे। इससे पहले नीरज फेडरेशन कप राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में 85.94 मीटर का थ्रो फेंककर गोल्ड अपने नाम कर चुके हैं।

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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
नीरज चोपड़ा मूल रूप से हरियाणा में पानीपत के गांव खंदरा के रहने वाले है और चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से दो साल पहले पासआउट हैं। मौजूदा समय में आर्मी में सूबेदार के पर नौकरी कर रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में एक समय था जब नीरज के पास जेवलियन खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। अच्छी जेवलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपये थी, पर नीरज ने हौसला नहीं खोया।
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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
पिता सतीश कुमार व चाचा भीम सिंह चोपड़ा से सात हजार रुपये लेकर सस्ता जेवलिन खरीदा और हर दिन आठ घंटे अभ्यास किया। इसी के बूते अंडर-16, 18 और 20 की मीट व नेशनल रिकॉर्ड बना डाला। इसके बाद इंडिया कैंप में चयन हुआ। फिर एक से डेढ़ लाख रुपये तक की जेवलिन से अभ्यास का मौका मिला और पोलैंड में अंडर-20 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया।
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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
नीरज ने जेवलिन थ्रो के लिए कहीं ट्रेनिंग नहीं ली हैं, उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर इस खेल में अपना आप को बेहतर बनाया है। चाचा भीम सिंह बताते हैं कि नीरज में खेल को लेकर इतना जुनून था कि जब वह पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जवैलिन की तैयारी करता था तो वे नीरज को अपने साथ बाइक पर लेकर जाते थे। एक दिन उसने देखा कि नीरज एकांत में बैठकर रो रहा था। उसने पूछा तो काफी देर तक नीरज ने कुछ नहीं बताया।
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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
काफी बार पूछने पर उसने बताया कि उसके भाले की आगे की नोंक टूट गई है। उसने पूछा कि नया भाला कितने का आता है। तब नीरज ने कहा कि चाचा जी रहने दो बहुत महंगा आएगा। उसने कई जगह भाले का रेट पता किया। उस वक्त उधार पैसे लेकर नीरज के लिए 25 हजार का भाला लेकर आया था। नीरज नए भाले को देखकर काफी खुश था। उसने जैवलिन को चूम लिया। भाला उसकी जिंदगी बन गया। उसी ने उसकी जिंदगी बदल दी है।

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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को गांव खंदरा में सतीश कुमार व सरोज देवी के घर हुआ। नीरज के परिजन साधारण किसान हैं। नीरज के पिता जहां खेती करते हैं, वहीं उनकी माता ग्रहणी है। नीरज के परिवार की खास बात यह है कि उनके पिता चार भाई है और उनका संयुक्त परिवार है। घर में परिवार के सभी 17 सदस्यों के लिए एक ही चूल्हे पर भोजन बनता है। नीरज के पिता व तीनों चाचा मात्र डेढ़ एकड भूमि में ही खेती कर अपने संयुक्त परिवार को पाल रहे हैं।

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नीरज चोपड़ा - फोटो : Getty
नीरज की कक्षा नौ तक की शिक्षा खंदरा के पास स्थित गांव भालसी में भारतीय विद्या निकेतन स्कूल में हुई। इसके बाद नीरज ने कक्षा से लेकर 12 तक की पढ़ाई ओपन से की। वर्तमान में नीरज भारतीय थल सेना में सूबेदार पद नियुक्त है और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में बीए-द्वितीय वर्ष का विद्यार्थी है। नीरज को मिली अभूतपूर्व सफलता से उसका परिवार ही नहीं बल्कि पानीपत जिला में खुशी का माहौल है।

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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
नीरज के स्कूल के प्रधानाचार्य रणवीर सिंह ने बताया कि नीरज पढ़ाई में सामान्य विद्यार्थी था और वह खेल में रुचि रखता था। कक्षा छह में उसका ध्यान पूरी तरह खेलों में समा गया और वह बॉडी बिल्डिंग में रुचि लेने लगा। कम आयु में ही नीरज ने जिम में कसरत करनी शुरू कर दी थी। वहीं चाचा भीम सिंह ने अपने भतीजे की खेल प्रतिभा को पहचाना और उसे खेलों में बढ़ावा देने लगे।

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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
 चाचा भीम सिंह ने एक तरह से अपना जीवन नीरज को ही अर्पित कर दिया था। वे हर रोज नीरज को गांव खंदरा से पानीपत के शिवाजी स्टेडियम लेकर आते और जिम में नीरज को कसरत करवा कर वापस गांव ले जाते। इस दौरान नीरज की मित्रता जैवलीन थ्रो खिलाड़ी जयवीर से हुई। जयवीर से दोस्ती बढ़ने के साथ नीरज की जैवलीन थ्रो खेल में रुचि बढ़ने लगी। नीरज ने जैवलीन थ्रो का अभ्यास शुरू किया।

 
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चंडीगढ़ का जेवलिन थ्रो प्लेयर नीरज चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला
उसने जिला स्तर पर जैवलीन थ्रो में प्रथम स्थान हासिल क्या किया फिर उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। जब नीरज अपने प्रदर्शन को लेकर निराश होते थे चाचा भीम सिंह उनमें उत्साह भरकर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। कड़ी मेहनत व विश्व स्तरीय प्रशिक्षण के बल पर आज नीरज ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने देश भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया।

 
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