मां नहीं चाहती थी पहलवान बने, पर बेटी नहीं मानी। कड़ी मेहनत की और पहले रियो ओलंपिक में इतिहास रचा और अब कॉमनवेल्थ में मेडल जीता।
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sakshi malik
- फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं ओलंपियन पहलवान साक्षी मलिक की, जिसने शनिवार को २१वें राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतकर नाम रोशन किया। साक्षी ने महिलाओं की फ्री स्टाइल कुश्ती के 62 किलोग्राम भारवर्ग के मुकाबले में न्यूजीलैंड की टेलर फोर्ड को मात देकर कांस्य पदक जीता। अंतिम राउंड में टेलर ने साक्षी को पटक दिया था, लेकिन इस दिग्गज पहलवान ने अपने डिफेंस के कारण टेलर को जरूरी अंक नहीं लेने दिए और महज एक अंक के अंतर से पदक जीता।
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- फोटो : File
साक्षी की उम्र ओलंपिक में खेलते समय 23 साल सात माह की थी। साक्षी मलिक के नाम पहले भी एक ऐसी उपलब्धि है जो शायद ही किसी पहलवान के नाम होती है। साक्षी ने वर्ष 2007 में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इसलिए कोच ईश्वर सिंह दहिया की विशेष अपील पर उसे सीनियर वर्ग में खेलने की अनुमति मिल गई थी। तब से वह सीनियर पहलवानों के साथ खेलने लगी थीं।
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ग्लैमरस हो गई है ये ओलंपियन पहलवान
साक्षी मलिक के पहलवान बनने के पीछे एक खास वजह रही। उसने पहलवान बनने का सपना केवल इसलिए देखा कि उसे पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी। 15 साल पहले केवल ड्रेस के लिए कुश्ती खेलने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह कभी परिवार वालों ने भी नहीं सोचा होगा। बेटी को पहलवान बनाने में परिवार वाले थोड़ा हिचकते जरूर हैं, लेकिन साक्षी मलिक ने अपनी मां सुदेश के सामने खेलने की इच्छा जताई तो वे उसे लेकर 15 साल पहले छोटूराम स्टेडियम में पहुंच गईं।
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पहलवान साक्षी मलिक
वहां उसे जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा गया, लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया। फिर एथलीट व अन्य कई खेलों के खिलाड़ियों को दिखाया गया और सबसे आखिर में साक्षी को रेसलिंग हाल में लेकर पहुंची। वहां साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी तो उसने कुश्ती खेलने की इच्छा जताई। साक्षी की मां सुदेश ने बताया कि उस समय साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी और उसने कहा था कि यह ड्रेस अच्छी है, इसलिए वह भी कुश्ती लड़ेगी।
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पहलवान साक्षी मलिक
इसके बाद साक्षी मलिक ने 15 साल के जूनियर पुरुष पहलवान के साथ तीन बाउट लड़ीं। कोच ने बारीकी से मुकाबले देखे। साथ ही साक्षी को कामयाबी के टिप्स भी दिए। साक्षी ने भी शानदार प्रदर्शन किया। साक्षी ने बताया कि मां से बात हुई है, जिन्होंने कहा कि बेटी, अच्छा खेलना। कामयाबी जरूर मिलेगी।
दसवीं से एमपीएड तक साक्षी के 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक: शायद ही ऐसा कोई खिलाड़ी होता है जो खेल के साथ पढ़ाई में अव्वल रहता है। साक्षी मलिक न केवल कुश्ती में आगे हैं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल रही हैं। साक्षी की मां सुदेश ने बताया कि वह हाईस्कूल से लेकर एमपीएड तक 70 प्रतिशत से ज्यादा नंबर हासिल करती रही है। सुदेश ने बताया कि साक्षी जितना ध्यान कुश्ती पर देती हैं, उतना ही पढ़ाई पर देती थीं।