भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख सेवाओं के तहत भारतीय विदेश सेवा (IFS - Indian Foreign Service) विभाग है। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसे अन्य प्रमुख विभागों की तरह ही है। लेकिन विदेश में भारत की सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सेवाओं में से एक है। भारत के विदेश सचिव, भारतीय विदेश सेवा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। इंडियन फॉरेन सर्विस से ही ब्यूरोक्रेसी ही नहीं इंटरनेशनल डिप्लोमेसी यानी अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सेवा में प्रवेश होता है।
इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE - Civil Service Examination) के माध्यम से होता है। आईएफएस अफसर बनने के लिए अन्य सेवाओं के अपेक्षा ज्यादा कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि हर साल लगभग 20 अधिकारी आईएफएस में चयनित हो पाते हैं। वर्तमान में विदेश सेवा कैडर की संख्या लगभग 600 अधिकारियों की है। इनमें लगभग 165 से ज्यादा अधिकारी विदेशों में स्थित भारतीय मिशन एवं देश में विदेशी मामलों के मंत्रालय में विभिन्न पदों पर सेवारत हैं।
इस सेवा में वहीं जा सकते हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी या अन्य किसी विदेशी भाषा में पारंगत हों। आईएफएस अधिकारी विदेश मंत्रालय, दुनियाभर में स्थित भारतीय दूतावास, भारतीय उच्चायोग, महा वाणिज्य दूतावास और संयुक्त राष्ट्र में तैनात होते हैं। ये अधिकारी विदेशों में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। आइए जानते हैं आईएफएस बनने के लिए क्या करना पड़ता है और बनने के बाद कौनसे पद मिलते हैं, क्या हैं अधिकार और तनख्वाह एवं सुविधाएं...