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भारतीय विदेश सेवा : कैसे बनें आईएफएस अधिकारी? पढ़िए चयन, प्रशिक्षण, नियुक्ति और पदोन्नति प्रक्रिया

Sun, 20 Jun 2021 06:14 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

इंडियन फॉरेन सर्विस से ही ब्यूरोक्रेसी ही नहीं इंटरनेशनल डिप्लोमेसी यानी अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सेवा में प्रवेश होता है। इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE - Civil Service Examination) के माध्यम से होता है।
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आईएफएस : भारतीय विदेश सेवा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख सेवाओं के तहत भारतीय विदेश सेवा (IFS - Indian Foreign Service) विभाग है। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसे अन्य प्रमुख विभागों की तरह ही है। लेकिन विदेश में भारत की सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सेवाओं में से एक है। भारत के विदेश सचिव, भारतीय विदेश सेवा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। इंडियन फॉरेन सर्विस से ही ब्यूरोक्रेसी ही नहीं इंटरनेशनल डिप्लोमेसी यानी अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सेवा में प्रवेश होता है। 
इसमें चयन संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की जानी वाली सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE - Civil Service Examination) के माध्यम से होता है। आईएफएस अफसर बनने के लिए अन्य सेवाओं के अपेक्षा ज्यादा कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। यही कारण है कि हर साल लगभग 20 अधिकारी आईएफएस में चयनित हो पाते हैं। वर्तमान में विदेश सेवा कैडर की संख्या लगभग 600 अधिकारियों की है। इनमें लगभग 165 से ज्यादा अधिकारी विदेशों में स्थित भारतीय मिशन एवं देश में विदेशी मामलों के मंत्रालय में विभिन्न पदों पर सेवारत हैं। 
इस सेवा में वहीं जा सकते हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी या अन्य किसी विदेशी भाषा में पारंगत हों। आईएफएस अधिकारी विदेश मंत्रालय, दुनियाभर में स्थित भारतीय दूतावास, भारतीय उच्चायोग, महा वाणिज्य दूतावास और संयुक्त राष्ट्र में तैनात होते हैं। ये अधिकारी विदेशों में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। आइए जानते हैं आईएफएस बनने के लिए क्या करना पड़ता है और बनने के बाद कौनसे पद मिलते हैं, क्या हैं अधिकार और तनख्वाह एवं सुविधाएं... 
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UPSC
आईएफएस कैसे बनते हैं?
  • आईएफएस बनने के लिए उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से स्नातक होना अनिवार्य है। 
  • इसके बाद उसे संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है।
  • परीक्षा के दोनों चरणों को पास करने के बाद उम्मीदवार को साक्षात्कार परीक्षा पास करनी होती है।  
  • इस परीक्षा में शीर्ष रैंक (लगभग शीर्ष 120 रैंक) हासिल करने वाले उम्मीदवार ही भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी बन पाते हैं।
  • इस सेवा में वहीं जा सकते हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी या अन्य किसी विदेशी भाषा में पारंगत हों। 
  • चयन के बाद अधिकारियों की तीन महीने की शुरुआती ट्रेनिंग लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ही होती है। 
  • इस ट्रेनिंग के पूरी होने के बाद भी आईएफएस अधिकारी को करीब ढाई साल अलग-अलग तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है।  

 
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आईएफएस : भारतीय विदेश सेवा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
आईएफएस में करिअर
  • आईएफएस में चयनित अभ्यर्थी विदेश मंत्रालय में सचिव, विदेश सेवा विभागों के प्रशासनिक अधिकारी, दूतावास, महावाणिज्य दूतावास, राजनयिक मिशन में आयुक्त यानी कमिश्नर बनते हैं। 
  • एक आईएफएस अधिकारी ही विदेश मंत्रालय में सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव और विदेश सेवा के सबसे बड़े पद विदेश सचिव पर काबिज हो सकते हैं। 
  • विदेश मंत्रालयों के विभागों और उपक्रमों, विभिन्न देशों में भारत सरकार के प्रतिनिधि, विदेशों में स्थित कार्यालयों में भी आईएएस अधिकारी को ही नियुक्ति मिलती है। 

आईएफएस की प्रशिक्षण व्यवस्था
सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद आईएफएस अधिकारी बनने के लिए तीन साल तक प्रशिक्षण लेना पड़ता है। प्रशिक्षण के समयबद्ध चार चरण होते हैं, हालांकि, आवश्यकतानुसार सेवाकाल में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। 
  1. आधारभूत प्रशिक्षण - चार माह (राष्ट्रीय अकादमी, मसूरी में)
  2. व्यावसायिक प्रशिक्षण - 12 वर्ष (जिला स्तरीय और विदेश सेवा संस्थान, नई दिल्ली में)
  3. व्यावहारिक प्रशिक्षण - छह माह (विदेश मंत्रालय के अंतर्गत)
  4. परिवीक्षा प्रशिक्षण - 14 माह (विदेश स्थित उच्चायोग/दूतावास में)
 

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लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन
आईएफएस प्रशिक्षण के चरण
  • पहले लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (मसूरी) चार माह का आधारभूत प्रशिक्षण दिया जाता है। इसे फाउंडेशन कोर्स कहते हैं। 
  • इसके बाद प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए सुषमा स्वराज भारतीय विदेश सेवा संस्थान (दिल्ली) में दाखिला मिलता है। 
  • इन प्रशिक्षु अधिकारियों को नई दिल्ली स्थित इंडियन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से भी चार माह का विदेश नीति तथा कार्य-प्रणाली, अंतरारष्ट्रीय संबंध तथा भाषा की जानकारी का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • इसके बाद प्रशिक्षु अधिकारियों को छह माह तक जिला स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों के व्यावहारिक अनुभव के लिए संलग्न किया जाता है। 
  • प्रशिक्षु अधिकारियों को विभिन्न समूहों में दो सप्ताह के लिए भारत भ्रमण कराया जाता है। जिससे ये देश की सांस्कृतिक वैविध्य से परिचित हो सकें। 
  • इन्हें देश की संसदीय व्यवस्था का व्यावहारिक ज्ञान भी कराया जाता है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर भी मिलता है।
  • एक संक्षिप्त अवधि तक विदेश मंत्रालय के सचिवालय में काम करने बाद अधिकारी को विदेश में एक भारतीय राजनयिक मिशन पर नियुक्त किया जाता है।
  • आईएफएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं (हिंदी के अतिरिक्त कम से कम एक विदेशी भाषा) का ज्ञान प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है। 
  • इन्हें अनिवार्य रूप से एक विदेशी भाषा (CFL- Context Free Language) सीखनी होती है। इसके लिए इन्हें दूतावास या राजनयिक मिशन पर भेजा जाता है। 
  • वहां पर इन्हें सीएफएल में लिखने, पढ़ने, बोलने और समझने की दक्षता प्राप्त करनी होती है। इसकी परीक्षा भी उत्तीर्ण करनी होती है। इसके बाद ही इन्हें सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाती है।
 
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indian embassy in UAE - फोटो : indembassyuae.gov.in
आईएफएस नियुक्ति एवं पदोन्नति 
आईएफएस अधिकारी विदेशों में स्थित दूतावास में अपनी सेवा तृतीय सचिव के तौर पर आरंभ करते हैं। सेवा में स्थायी होने पर इन्हें द्वितीय सचिव के पद पर प्रोन्नत कर दिया जाता है। इसके बाद सेवाकाल, अनुभव और प्रदर्शन के आधार समय-समय पर प्रोन्नति मिलती है।

राजनयिक मिशन या दूतावास में नियुक्ति पर 
  • तृतीय सचिव
  • द्वितीय सचिव
  • प्रथम सचिव
  • सलाहकार
  • मिशन के उपाध्यक्ष/ उप उच्चायुक्त/ उप स्थायी प्रतिनिधि
  • राजदूत/उच्चायुक्त/स्थायी प्रतिनिधि

वाणिज्य दूतावास में नियुक्ति पर 
  • उप वाणिज्य दूत (Vice Consul / Deputy Consul)
  • वाणिज्य दूत (Consul)
  • महावाणिज्य दूत (Consul General)

विदेश मंत्रालय में नियुक्ति पर 
  • अवर सचिव (Upper Secretary)
  • उप सचिव (Deputy Secretary)
  • निदेशक विदेश मामलात (Director)
  • संयुक्त सचिव (Joint Secretary)
  • अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary)
  • विदेश सचिव (Foreign Secretary)
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विदेश मंत्रालय - फोटो : एएनआई
आईएफएस अधिकारी के प्रमुख कार्य 
  • आईएफएस अधिकारी डिप्लोमेसी से जुड़े मामलों में काम करते हैं और द्विपक्षीय मामलों को हैंडल करते हैं। 
  • आईएफएस अधिकारी के अहम कार्यों में भारत के हितों की रक्षा करना, विदेशी सरकारों से मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना।
  • जिस देश में वे तैनात हैं वहां की सरकार के कामकाज, विकास की रिपोर्टिंग करना। सरकार से विभिन्न समझौतों पर बातचीत करना। 
  • संयुक्त राष्ट्र में तैनाती के दौरान भारत और भारतीयों के वैश्विक हित के लिए काम करना, नीतिगत निर्णय, मुद्दे उठाना और जवाब देना भी शामिल है।
  • दोनों देशों के बीच सम्मानजनक सुविधाओं का विस्तार करना, वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की चिंता करना आदि प्रमुख काम शामिल हैं। 
  • बतौर राजनयिक ये अधिकारी विभिन्न मुद्दें जैसे राजनीतिक और आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन व सांस्कृतिक संबंध आदि मामलों को देखते हैं।
  • ये अंतरराष्ट्रीय विधिक मामलों, भारतीय डायस्पोरा, निःशस्त्रीकरण, प्रेस और प्रचार, नवाचार, प्रशासन तथा अन्य कार्यों को भी देखते हैं।
 
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अमेरिका में भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू - फोटो : Social Media
आईएफएस अधिकारी का रुतबा 
  • आईएफएस अधिकारी अदालत में गवाह के रुप में पेस होने से प्रतिरक्षा प्राप्त होती हैं। 
  • उन्हें नागरिक या प्रशासनिक अदालत में गवाही के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। 
  • कई देशों में पुलिस और कानूनी नियमों से भी प्रतिरक्षा प्राप्त होती है। 
  • यात्राओं के दौरान ये अपने व्यक्तिगत सामान के निरीक्षण से भी छूट प्राप्त कर सकते हैं। 
  • आईएफएस को किसी भी प्रकार से गिरफ्तार या हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। 
  • आईएफएस अधिकारियों को अपने कार्यों के निर्वहन के लिए संचार की स्वतंत्रता होती है। 
  • आईएफएस अधिकारी की गाड़ी की नंबर प्लेट नीले रंग की होती है। 
  • इस तरह की नंबर प्लेट किसी ओर को अधिकारी को नहीं मिलती। 
 
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भारतीय विदेश सेवा प्रशिक्षण संस्थान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
आईएफएस के वेतन, भत्ते और सुविधाएं
  • गौरतलब है कि विदेश सेवा अधिकारियों का वेतन स्केल के आधार पर होता है, जैसे- जूनियर स्केल, सीनियर स्केल, सुपर टाइम स्केल, इसके अलावा वेतनमानों में अलग-अलग वेतन बैंड भी होते हैं। 
  • आईएफएस अधिकारियों को काफी बेहतरीन वेतन, कई प्रकार के भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं। सातवें वेतन आयोग के अनुसार आईएफएस अधिकारी की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये महीना होती है। 
  • टीए-डीए जैसे भत्तों को गिने तो नौकरी की शुरुआत में ही एक आईएफएस अधिकारी को वेतन एक लाख रुपये से ज्यादा होता है। जबकि शीर्ष पद विदेश सचिव, राजदूत, महावाणिज्य दूत के लिए करीब 2,25,000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। 
  • इन अधिकारियों को तमाम सुविधाएं जैसे बंगला, कुक, चपरासी और स्टाफ शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें दूरभाष, यात्राएं भी फ्री होती हैं।
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