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आईआईआरएस और इसरो की पहल : स्कूली छात्रों के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस पर ऑनलाइन कोर्स शुरू

Thu, 01 Jul 2021 04:51 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

रिमोट सेंसिंग डेटा और जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) का उपयोग चक्रवात, सुनामी, हिमस्खलन, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, जंगल की आग आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अलावा प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी और मानचित्रण के लिए किया जा सकता है। 
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इसरो-प्रायोजित ऑनलाइन पाठ्यक्रम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान - IIRS), देहरादून ने पर्यावरण अध्ययन के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस की उपयोगिता पर इसरो-प्रायोजित ऑनलाइन समर स्कूल पाठ्यक्रम शुरू किया है। इस कोर्स के लिए आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे साथ ही पढ़ाई भी ऑनलाइन ही होगी। 

उल्लेखनीय है कि कुछ मॉडलों के साथ रिमोट सेंसिंग डेटा और जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) का उपयोग चक्रवात, सुनामी, हिमस्खलन, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, जंगल की आग आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अलावा प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण प्रदूषण की निगरानी और मानचित्रण के लिए किया जा सकता है। 

स्कूली छात्रों के लिए यह पाठ्यक्रम एक सप्ताह की अवधि का है और पाठ्यक्रम का फोकस रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के सिद्धांतों और पर्यावरण अध्ययन के लिए इसके अनुप्रयोगों पर है। पाठ्यक्रम के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई, 2021 है। 
 
पाठ्यक्रम की अवधि
  • यह पाठ्यक्रम 26 जुलाई से 30 जुलाई 2021 तक एक सप्ताह की अवधि का होगा।
  • प्रत्येक दिन, 45 मिनट के दो ऑनलाइन व्याख्यान होंगे।
  • पहला व्याख्यान एक 10.00 बजे और दूसरा व्याख्यान 12.00 बजे से रहेगा। 
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उपग्रह - फोटो : Social Media
यह है पाठ्यक्रम का उद्देश्य
इस समर कोर्स का उद्देश्य माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के छात्रों में रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी के बारे में जागरूकता पैदा करना और सूचनात्मक व्याख्यान और प्रदर्शन के माध्यम से धरती और उसके पर्यावरण के अध्ययन के लिए इसका उपयोग करना है। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक विशाल पर्यावरण को समझने के लिए संभावित उपकरण हैं। पर्यावरण विज्ञान में जीआईएस और इमेज प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपग्रह डेटा उपयोग के ज्ञान को उजागर करने की एक बड़ी गुंजाइश है क्योंकि इससे छात्रों को रिमोट सेंसिंग के महत्व को समझने और फिर करिअर के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
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आपदा के बारे में जानकारी देते इसरो के वैज्ञानिक - फोटो : अमर उजाला - फाइल फोटो
पाठ्यक्रम संरचना
  • इस समर कोर्स के व्याख्यान IIRS YouTube चैनल https://www.youtube.com/user/edus 2004 पर लाइव स्ट्रीम किए जाएंगे।
  • छात्र यूट्यूब चैट बॉक्स के माध्यम से जिज्ञासाओं और शंका समाधान के साथ ही प्रश्न भी पूछ सकते हैं।
  • व्याख्यान के बाद फैकल्टी द्वारा कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए जाएंगे।
  • प्रतिदिन दो व्याख्यानों पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी भी होगी। 
  • प्रश्नोत्तरी में कम से कम 55% कुल स्कोर अर्जित करने वाले प्रतिभागियों को एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। 
 

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ऑनलाइन कोर्स - फोटो : सोशल मीडिया
आवेदन कैसे करें
10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के भारतीय स्कूली छात्र समर कोर्स के लिए https://admission.iirs.gov.in/coursecalender पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एक बार जब आप पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर देते हैं, तो आपको अपने ईमेल पर एलएमएस पोर्टल के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल प्राप्त हो जाएंगे। कृपया सुनिश्चित करें कि दर्ज की गई ईमेल आईडी सही है। क्योंकि उसी पर कक्षाओं के लिंक और प्रमाण पत्र भेजे जाएंगे।

अधिक विवरण या पूछताछ के लिए हेल्पलाइन
  • डॉ. डी. मित्रा, समूह प्रमुख, एमएएसडी, आईआईआरएस, देहरादून (mitra@iirs.gov.in; 0135 - 2524181)।
  • पूजा जिंदल, वैज्ञानिक 'एसई', एमएएसडी, आईआईआरएस, देहरादून (pooja_j@iirs.gov.in; 0135 - 2524184)। 
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ज्योग्रॉफिक इंफोर्मेशन सिस्टम - फोटो : अमर उजाला
1966 से कर रहा प्रशिक्षित
बता दें कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस), देहरादून और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की संयुक्त पहल के तहत, विभिन्न हितधारकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए स्नातकों से लेकर शिक्षाविदों, उद्योग, विभिन्न सरकारी विभागों और गैर सरकारी संगठनों सहित नीति निर्माताओं तक को 1966 से रिमोट सेंसिंग और जीआईएस विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करने में लगा हुआ है। 

पर्यावरण अध्ययन के लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस की उपयोगिता पर इसरो-प्रायोजित ऑनलाइन समर स्कूल पाठ्यक्रम का आधिकारिक ब्रोशर यहां से डाउनलोड करें। 
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