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क्या है खाने को धर्म बताने वाले Zomato का पुराना नाम, ऐसी है इसके मालिक की कहानी 

Thu, 01 Aug 2019 05:19 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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दीपिंदर गोयल - फोटो : Facebook
रेस्टोरेंट्स से आपके घर, ऑफिस या अन्य जगहों पर फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमेटो (Zomato) इन दिनों काफी चर्चा में है। एक जोमेटो उपभोक्ता ने जोमेटो को यह कह कर खाना लेने से मना कर दिया कि डिलीवरी बॉय हिन्दू नहीं था। इस पर जोमेटो के कर्मचारी ने ट्विटर पर जवाब लिखा कि 'खाने का कोई धर्म नहीं होता। खाना खुद ही एक धर्म है।' जोमेटो के मालिक दीपिंदर गोयल ने भी अपने कर्मचारी की इस बात का खुल कर समर्थन किया है। अब देशभर में इस पर चर्चा हो रही है। कुछ लोग जोमेटो के पक्ष में हैं तो कुछ इसके खिलाफ। 

आपकी भी अपनी राय हो सकती है। लेकिन जिस कंपनी के बारे में ये विचार रखे जा रहे हैं, क्या आप उसके बारे में सब कुछ जानते हैं? क्या आप उसके मालिक के बारे में जानते हैं? क्या आपको पता है कि जोमेटो का नाम पहले कुछ और था? क्या आपको पता है कि जोमेटो के मालिक कितने पढ़े लिखे हैं? ऐसे ही कई रोचक सवालों के जवाब हम आपको आगे बता रहे हैं...
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दीपिंदर गोयल - फोटो : Twitter
जोमेटो की शुरुआत दो दोस्तों दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने मिल कर की थी। साल 2008 में एक स्टार्टअप के रूप में जोमेटो शुरू हुआ। पहले इसका नाम फूडीबे डॉट कॉम (foodiebay.com) रखा गया था। इसमें दिल्ली और आस पास के करीब 1200 रेस्टोरेंट्स को शामिल किया गया था।
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दीपिंदर गोयल - फोटो : Facebook
दो सालों तक यह स्टार्टअप फूडीबे के नाम से ही चलता रहा। फिर साल 2010-11 में इसका नाम बदलकर जोमेटो कर दिया गया। ताकि लोग इसे याद आसानी से रख सकें और खाने से मिलता जुलता हो। इस स्टार्टअप को लोगों से काफी अच्छा रेस्पॉन्स मिला। धीरे-धीरे शहर और रेस्टोरेंट्स इससे जुड़ते गए। आज 13 देशों के करीब 106 शहरों में 2.55 लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट्स जोमेटो के साथ जुड़े हैं। टर्नओवर एक हजार करोड़ से ज्यादा है।

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टिम कुक के साथ दीपिंदर की मुलाकात - फोटो : Facebook
दीपिंदर ने साल 2005 में आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन पूरा किया है। जबकि उनके दोस्त पंकज चड्ढा ने साल 2007 में आईआईटी दिल्ली से ही पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी होने के बाद दीपिंदर को एक कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी मिल गई। वहां रोज लंच के दौरान वे अपने सहकर्मियों को कैफेटेरिया में मेन्यू देखने के लिए कतार में खड़े इंतजार करते देखते। यह देखकर उन्हें समय की बर्बादी का एहसास होता। 
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जोमेटो - फोटो : Facebook
तब दीपिंदर को आइडिया आया कि क्यों न वो मेन्यू कार्ड को स्कैन कर किसी साइट पर अपलोड कर दें। जहां कोई भी बिना समय गंवाए आसानी से इसे देख सके। उन्होंने ऐसा ही किया। धीरे-धीरे उनकी साइट की लोगों के बीच डिमांड बढ़ने लगी। यह ट्रेंड देखकर दीपिंदर को ऑलाइन फूड डिलीवरी का आइडिया मिला। 

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Zomato CEO deepinder goyal - फोटो : Twitter
शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतें आईं। क्योंकि लोग ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने में डरते थे। उन्हें भरोसा नहीं होता था कि खाना सही होगा या नहीं, समय पर आएगा या नहीं, कहीं उनके पैसे तो नहीं डूब जाएंगे? लेकिन संघर्ष के उस दौर में दीपिंदर ने हार नहीं मानी। पंकज ने भी उनका पूरा साथ दिया। दोनों दोस्तों के संघर्ष का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है।

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