फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Citizenship Amendment Bill: क्या है 69 साल पुराना नेहरू-लियाकत समझौता, क्यों हो रही है इसकी चर्चा

Thu, 12 Dec 2019 08:06 AM IST
Mohit Mudgal बीबीसी
विज्ञापन
1 of 7
nehru-liaquat pact - फोटो : Social Media
लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB- Citizen Ammendment Bill) - 2019 पर बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बयान दिया कि नेहरू-लियाकत समझौता धरा का धरा रह गया और पाकिस्तान (जब समझौता हुआ था तब बांग्लादेश नहीं था) अल्पसंख्यकों की हिफाजत का अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रहा। इसलिए नागरिकता संशोधन अधिनियम की जरूरत है।
 


बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने दोनों नए मुल्कों- भारत और पाकिस्तान में शरणार्थियों द्वारा झेली गई दिक्कतों के बारे में बात करते हुए कहा कि इसी समय 1950 में दिल्ली में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था। क्या है ये समझौता, आइए जानते हैं। 
विज्ञापन

क्यों जरूरत पड़ी इस समझौते की?

2 of 7
  • साल 1947 में हुए विभाजन के बाद लाखों शरणार्थियों का एक ओर से दूसरी ओर आना-जाना जारी था। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश), पंजाब, सिंध और कई इलाकों से हिंदू और सिख बड़ी तादाद में भारत आ रहे थे।
  • पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब का वो हिस्सा जो भारत के हिस्से में आया था, वहां और भारत के दूसरे हिस्सों से मुसलमान पाकिस्तान जा रहे थे। कई इतिहासकार इसे विश्व इतिहास में सबसे बड़ा विस्थापन भी बताते है।
विज्ञापन

3 of 7
  • विभाजन के बाद कई इलाकों में बड़े पैमाने पर दंगे हो रहे थे और भारी तादाद में हिंदू-मुसलमान मारे जा रहे थे।
  • इस दौरान ऐसे भी बहुत सारे मामले सामने आ रहे थे, जिसमें अपना देश छोड़ चुके इन शरणार्थियों की जमीन-जायदाद पर कब्जा हो गया था। या फिर उसे लूट लिया गया था।
  • बच्चियों-महिलाओं को अगवा कर लिया गया था। लोगों का जबरन धर्म-परिवर्तन करवाया गया था।
  • इस तरह की घटनाएं उन अल्पसंख्यकों के साथ भी हो रहीं थीं, जो विस्थापन के लिए तैयार नहीं थे। यानी पाकिस्तान के वो हिंदू जो भारत जाने को तैयार नहीं हुए या फिर वो मुस्लिम जो भारत में ही रह गए थे।

दोनों मुल्कों में मौजूद अल्पसंख्यक खौफ के माहौल में जी रहे थे

4 of 7
  • साथ ही 1948 में पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर पर हुए हमले और उसके बाद भारत की तरफ से हुए हस्तक्षेप के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत खराब हो चुके थे।
  • दिसंबर 1949 में दोनों के बीच व्यापार भी बंद हो गया। दोनों मुल्कों के बीच जंग के हालात बनते दिखाई दे रहे थे।
  • इन हालातों को देखते हुए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान अप्रैल 1950 में भारत आए। तभी जवाहरलाल नेहरू और लियाकत के बीच एक समझौता हुआ था। 
विज्ञापन

नेहरू-लियाकत समझौते के लक्ष्य

5 of 7
  • दोनों देश अपने अल्पसंख्यकों के साथ हुए व्यवहार के लिए जिम्मेदार होंगे।
  • शरणार्थियों के पास अपनी जमीन-जायदाद को बेचने या निपटाने के लिए वापस जाने का अधिकार होगा।
  • जबरन करवाए गए धर्म-परिवर्तन मान्य नहीं होंगे।
  • अगवा महिलाओं को वापस उनके नाते-रिश्तेदारों के हवाले किया जाएगा।
  • दोनों देश अल्पसंख्यक आयोग का गठन करेंगे।
विज्ञापन

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा

6 of 7
लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान में, और बाद में जब बांग्लादेश बना तो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा नहीं हो सकी। इसलिए इस विधेयक की जरूरत आन पड़ी है। उन्होंने इस संदर्भ में पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की लगातार घटती आबादी की भी बात की। उनका कहना था कि चूंकि इस्लामी देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में मुसलमानों पर किसी तरह की ज्यादती नहीं हो सकती है। इसलिए मुसलमानों का जिक्र नागरिकता संशोधन अधिनियम में नहीं है।

ये भी पढ़ें : जानें नानावती आयोग को, जिसने गुजरात दंगा मामले में पीएम मोदी को दी क्लीन चिट
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
हालांकि बिल के विरोधी कहते हैं कि ये ठीक है कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति अच्छी नहीं है। लेकिन भारत भी इस मामले में खुद को बहुत बेहतर नहीं बता सकता। सदन में आलोचकों ने कहा कि आजादी के बाद से लगातार होते रहे मुस्लिम-विरोधी दंगे, मेरठ, मलियाना, मुंबई, गुजरात और 1984 के सिख-विरोधी दंगों का हवाला दिया। कहा कि इनसे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है। गौरतलब है कि बुधवार, 11 दिसंबर को भी सदन में नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान नेहरू-लियाकत समझौते का जिक्र चलता रहा।

ये भी पढ़ें : International Mountain Day: एवरेेस्ट चढ़ने वालों को रास्ता दिखाती हैं 300 से ज्यादा लाशें
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें