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अफगानिस्तान से निकले नागरिकों की दास्तां: वहां कैसे रहें...बेटियों को उठा ले जाते हैं तालिबानी

Tue, 17 Aug 2021 08:05 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दवाइयां खरीदती अफगानी मूल की महिलाएं - फोटो : amar ujala
गोलियों की गूंज, बम धमाके, हर तरफ फैली हिंसा, लग ही नहीं रहा था कि जान बचेगी। बचते-बचाते किसी तरह काबुल के एयरपोर्ट पर पहुंचा। बाहर गोलियां चल रही थीं। अंदर किसी तरह फ्लाइट मिल गई। अफगानिस्तान की सीमा में रहने तक भी यकीन वापस नहीं लौटा था। शनिवार शाम दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने पर राहत की सांस ली। अपने माता-पिता, एक भाई के साथ दिल्ली पहुंचे अफगानी नागरिक शदीद ने वहां के हालात की जानकारी एक सांस में दे डाली। बात करते वक्त उसकी आंखों में दशहत साफ दिख रही थी। 

हिंसाग्रस्त अफगानिस्तान से इस वक्त बड़ी संख्या में अफगानी नागरिक निकल जाने की फिराक में हैं। सबको अपनी व अपने परिवार की जान की फिक्र है। लेकिन शदीद सरीखे कुछ किस्मतवाले हैं, जो भारत पहुंचने में कामयाब रहे। लेकिन विमान सेवाएं बंद होने से अफगानी नागरिक रविवार से अफगानिस्तान के अलग-अलग एयरपोर्ट पर फंसे हैं। नाम उजागर न करने की शर्त पर एक अफगानी ने बताया कि उसने अपने परिजनों के हिंदुस्तान आने का इंतजाम कर रखा था। रविवार रात की फ्लाइट थी, लेकिन उसके रद्द हो जाने वह वापस लौट गए। अब समझ में ही नहीं आ रहा है कि वह अपने परिवार वालों की कैसे मदद करे। तालिबान के पिछले कारनामे और वक्त के साथ बदलते फैसलों से अफगानी नागरिकों का विश्वास उठ चुका है।

सहर नाम की एक महिला ने बताया कि तालिबानियों पर कोई यकीन नहीं है। लड़कियों की शिक्षा पर सातवीं के बाद पाबंदी है। वहीं, अफगानिस्तान के दूर दराज के प्रांतों में 14 साल से अधिक उम्र की लड़कियों को जबरन उठा ले जाते हैं। यह बताते हुए सहर की आंखों से आंसू निकल आए। सुबकते हुए उन्होंने बताया कि सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है। वही जाने कि आगे क्या होगा और अफगानिस्तान के लोगों की जिंदगी कैसे चलेगी।
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अफगानी मूल के नागरिक - फोटो : amar ujala
भारत पहुंचने वालों में नकदी और धन के साथ सरकारी नौकरी करने वाले भी कई कर्मी अपने परिवार के साथ अपना देश छोड़ गए। तालिबानी फरमान को इंसानियत के खिलाफ बताते हुए वहां के नागरिक शरणार्थी के तौर पर किसी भी देश में जीवन जीने के लिए तैयार हैं। लाजपत नगर में मौजूद अफगानी नागरिकों ने बातचीत में भारत सरकार से गुजारिश की है कि जो लोग अफगानिस्तान में फंसे हैं उन्हें परिजनों से मिलवाने में कोई कदम बढ़ाए ताकि उन्हें जिंदगी जीने का मौका मिल सके। भारत की ओर से इसके लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ करते हुए पाकिस्तान और अमेरिका को इस हालात के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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अपनी बेटी के साथ अफगानी महिला - फोटो : amar ujala
कहां करें पलायन, देश से बाहर निकलना भी हुआ मुश्किल 
तालिबान के कब्जे के बाद वहां के सभी दफ्तर, बैंक बंद हैं, इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हैं। विमानों की आवाजाही बंद होने से दूसरे देशों से भी भारत आने के लिए नागरिक लगातार कोशिश कर रहे हैं। वीजा को ऑनलाइन बनाने सहित प्रक्रिया में फिलहाल राहत देने की मांग की है। भारत के लिए विमान सेवा बंद होने की वजह से अफगानिस्तान से पलायन करने वालों का यही सवाल है कि आखिरकार अब जाएं तो कहां।

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अफगानी नागिरक - फोटो : amar ujala
जिंदगी बचाने के लिए दो भाई अमेरिकी फ्लाइट में हो गए सवार
वाजिद ने बताया कि दो दिन पहले उनके दो चचेरे भाई काबुल एयरपोर्ट पर थे। कुछ दिन पहले तक अमेरिकी सेना के साथ काम करते थे, लेकिन हालात खराब होने लगे तो देश से बाहर जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे। वहां पहुंचने पर अमेरिकी सैनिकों से बातचीत के बाद उन्होंने खुद को असुरक्षित बताते हुए साथ ले जाने की गुहार लगाई। दोनों भाइयों को अमेरिकी फ्लाइट में ले जाया गया। हालांकि वाजिद की पत्नी, बच्चे और पिता अभी भी काबुल में फंसे हैं।

 
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अफगानी महिलाएं - फोटो : amar ujala
अफगानी मुद्रा की कीमतें घटी, बढ़ी मुश्किलें
फ्लाइट टिकटों की बुकिंग करने वाली अफगानी महिला ने बताया कि पिछले तीन-चार दिन में अफगानिस्तान की मुद्रा का तेजी से अवमूल्यन हुआ है। इससे लोगों को कहीं आने जाने या वीजा हासिल करने में पहले से काफी अधिक खर्च हो रहा है। पहले एक डॉलर करीब 70 अफगानी रुपये में मिल रहा था। अब यह बढ़कर 80 रुपये से अधिक हो गया है। इससे महंगाई कई गुना बढ़ गई है, जिससे अफगानी नागरिकों के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं।   
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