सीमापुरी हादसे में परिवार के बड़े बेटे आशु ने मौत से लड़ने के लिए खूब जद्दो-जहद की थी। हादसे के बाद जब दरवाजा तोड़ा गया तो आशु की लाश कमरे के दरवाजे पर ही मिली। उसने पूरी ताकत लगाकर दरवाजा तोड़ने का भी प्रयास किया, लेकिन न तो वह दरवाजा खोल पाया और न ही तोड़ पाया। दम घुटने से उसकी दरवाजे के पास ही मौत हो गई। बाकी होरीलाल, रीना और रोहिनी के शव वहीं मिले, जहां वह सो रहे थे।
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इसी मकान में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
आशंका व्यक्त की जा रही है कि शायद तीनों को अपनी मौत का पता भी नहीं चला। धुंआ निगलने के बाद तीनों अचेत हो गए और उनकी मौत हो गई। मामले की जांच कर रहे सीमापुरी थाने के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कमरे में बने मंदिर व जमीन पर रखा ज्यादातर सामान जला हुआ मिला है।
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सीमापुरी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की पूछताछ में एक परिजन ने बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश के बाद ठंड बढ़ गई थी। इसकी वजह से परिवार ने पंखे बंद करने के अलावा कमरा भी पूरी तरह बंद कर दिया था। कमरे के दरवाजे और खिड़कियों को रोजाना बंद कर दिया जाता था। पंखा न चलने की वजह से अंदर मच्छर काटते थे। ऐसे में पिछले कुछ दिनों से रीना कमरे में मच्छर भगाने वाली क्वाइल जली थीं।
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सीमापुरी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
कभी-कभी होरीलाल कमरे में पड़े सिंगल बैड पर सो जाया करते थे। लेकिन सोमवार रात को सभी जमीन पर बिस्तर बिछाकर सो रहे थे। जमीन पर ही क्वाइल जल रही थी। माना जा रहा है कि देर रात परिवार के किसी सदस्य की चादर शायद क्वाइल पर गिरी, जिसके बाद पहले चादर में आग लगी। जिससे कमरे में धुंआ हुआ। इससे परिवार बेहोश हो गया।
लेकिन शायद आशु की आंख खुल गई। चूंकि उसने भी धुंआ निगल लिया था तो शायद वह दरवाजा नहीं खोल पाया। कमरे के दरवाजे का कुछ हिस्सा अंदर से टूटा हुआ मिला है। वहीं दूसरी ओर कमरे में बने मंदिर में आग लग गई थी। इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि कहीं मंदिर के कारण तो आग नहीं लगी।