nirbhaya case
- फोटो : शुभम बंसल
फांसी होने की सूचना मिलने से जेल के गेट संख्या तीन पर भीड़ बढ़ती जा रही थी। हालात को संभालने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी। तड़के करीब साढ़े तीन बजे सुप्रीम कोर्ट में दोषियों की याचिका खारिज होते ही जेल नंबर तीन के भीतर हलचल बढ़ गई। 50 जेल कर्मियों की पूरी टीम फांसी की प्रक्रिया में जुट गई। साढ़े तीन बजे जेल नंबर तीन के अधीक्षक दोषियों अक्षय, पवन, विनय और मुकेश की सेल में पहुंचे और उन्हें बताया कि सुबह साढ़े पांच बजे उन्हें फांसी दी जाएगी। कड़ी सुरक्षा के बीच दोषियों को नहलाया गया। फिर चिकित्सकों ने सभी के स्वास्थ्य की जांच की।
उधर, दोषियों की सेल से चंद दूरी पर फांसी घर में भी हलचल शुरू हो गई। जल्लाद पवन फांसी घर के प्लेटफार्म पर पहुंचा और लीवर, रस्सी आदि जांच की। पांच बजे दोषियों के चेहरे पर काला कपड़ा डालकर उन्हें फांसी के प्लेटफार्म पर ले जाया गया, जहां उन्हें डेथ वारंट पढ़कर सुनाया गया। इसके बाद जल्लाद ने चारों दोषियों के गले में फंदा डाल दिया और ठीक साढ़े पांच बजे जेल अधीक्षक के इशारा करते ही लीवर दबा दिया और चारों दोषी फंदे पर लटक गए।