चीन हमारे देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने में लगा है। देशभर के लाखों लोगों से ठगी की रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर उसे कई अलग-अलग देशों में बैठे चीनी नागरिक अपने खातों में डलवा रहे हैं। सब कुछ एक एप की मदद से हो रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि औसत एक खाते में ठगी और वसूली की करीब 75 लाख से एक करोड़ रुपये रकम आती है। माना जा रहा है कि इन लोगों ने ऐसे हजारों खाते खुलवा रखे हैं। साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि जब भी आप कोई एप डाउनलोड करें तो वह आपकी निजी जानकारी शेयर करने की अनुमति मांगेगा। उस समय आपको उसे अनुमति नहीं देना है। यदि अनुमति देते हैं तो आपका निजी डाटा आरोपियों के पास पहुंच जाता है और लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के एक बड़े डॉक्टर का बेटा भी इन आरोपियों के चंगुल में फंस गया था।
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आरोपी रवि
- फोटो : अमर उजाला
आरोपियों ने उसकी अश्लील फोटो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया। शुरुआत में उसने रुपये दिए। बाद में वह इतना परेशान हो गया कि उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। वह एमएस की पढ़ाई कर रहा है। देश के कई हिस्सों में इन लोगों से परेशान होकर कई ने आत्महत्या तक कर ली।
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आरोपी मनीष
- फोटो : अमर उजाला
इनसे बचने का तरीका यह है कि आप या आपके बच्चे गूगल प्ले स्टोर से कोई एप डाउनलोड करते हैं और वह आपकी जानकारी लेने की अनुमति मांगता है तो उससे इनकार कर दीजिए। कई एप डाउनलोड करते समय जब तक वह आगे नहीं बढ़ते तब तक आप उनको जानकारी साझा करने की अनुमति न दे देते हैं।
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आरोपी सुमित
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा करने वाले एप को बिल्कुल डाउनलोड न करें। अक्सर बच्चे गेम डाउनलोड करते हैं, वहां भी ऐसी जानकारियां लेने के लिए अनुमति मांगी जाती है। बच्चों को भी यह बात समझाने का प्रयास करें। यह जानकारी विदेशी हैकर या दूसरे लोग डाटा बेस बनाकर या तो भारत के ही जालसाजों को बेच देते हैं या खुद ही उसका गलत इस्तेमाल करते हैं। पुलिस भारत में पकड़े गए लोगों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
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आरोपी रोहित
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे करते थे ठगी
देशभर के जरूरतमंद लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपी गूगल प्ले स्टोर पर अपने एप बनाकर रखते थे। इन एप का अलग-अलग तरीकों से प्रचार किया जाता था। आरोपी दावा करते थे कि एप के जरिये चंद मिनटों में बेहद कम ब्याज दरों पर उनके खाते में लोन की रकम आ जाएगी। 90 दिनों के भीतर रकम वापस करने पर कोई ब्याज भी नहीं लिया जाएगा।
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आरोपी पुनीत
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गूगल प्ले स्टोर पर लोन देने के लिए आरोपी एनबीएफसी के फर्जी एग्रीमेंट लेटर भी डाल देते थे। ऐसे में पीड़ित इनके जाल में फंसकर लोन ले लेते थे। एप डाउनलोड करने के समय कई जानकारियां साझा करने के लिए अनुमति मांगी जाती थी। इसमें आधार, पैन, एसएमएस, कांटेक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी और फोन व गूगल अकाउंट पर मौजूद बाकी तमाम जानकारियां शेयर करा ली जाती थीं।
इस डाटा को भारत में बैठे आरोपी चीन भेजते थे। वहां पीड़ित के फोटो या वीडियो से छेड़छाड़ कर उसे अश्लील बना दिया जाता था। इसके आधार पर ब्लैकमेल कर धंधा शुरू होता था। वीडियो या फोटो को कांटेक्ट लिस्ट में मौजूद परिजनों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजने की धमकी दी जाती थी। इससे घबराकर पीड़ित लोन को भूलकर इनकी वसूली की रकम इनके खातों में भेज देते थे।