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अर्श से फर्श तक: फिल्मी अंदाज में खोल लिया था रेस्टोरेंट, फिर फुटपाथ पर आया 'बाबा का ढाबा'

Tue, 08 Jun 2021 04:08 PM IST
सुशील कुमार कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उन्होंने कहा कि पांच लाख रुपये की लागत से रेस्टोरेंट खोला था, लेकिन कमाई लागत से भी कम हो रही थी। मजबूरी में उसे बंद करना पड़ा। जिसके बाद हम फिर से यहीं लौट गए
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baba ka dhaba - फोटो : अमर उजाला
बाबा का ढ़ाबा के मालिक बुजुर्ग कांता प्रसाद एक बार फिर सोशल मीडिया में सुर्खियों में है। पहले लॉकडाउन के बाद सोशल मीडिया में छाए कांता प्रसाद ने मालवीय नगर में रेस्टोरेंट खोला था। दूसरे लॉकडाउन में बाबा का नया रेस्टोरेंट बंद हो गया है। अब बाबा अपने ढाबे को फिर से चलाने लगे हैं। 

हालांकि, बाबा का कहना है कि उनके पास पैसे की कमी नहीं है, मगर अब बाबा की सहायता के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियों वायरल होने के बाद बाबा का ढाबा एक बार फिर से चर्चा में बना हुआ है। यू-ट्यूबर गौरव वासन ने अक्टूबर 2020 में बाबा का ढ़ाबा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया था। 

बाबा रातों-रात लोगों के बीच प्रसिद्घ हो गए थे। वीडियों में बाबा (कांता प्रसाद) अपने ढ़ाबे पर खाने की बिक्री न होने की वजह से दुखी थे और वीडियों में अपनी समस्या बताते हुये रोने लगे। इस वीडियों को लोगो ने सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल किया और कांता प्रसाद की मदद के लिए लोगों की भीड़ मालवीय नगर स्थित बाबा के ढ़ाबा पर जुटने लगी। 
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बाबा का ढाबा - फोटो : शुजात आलम
नेता से लेकर अभिनेताओं ने बाबा का ढाबा के सर्मथन में ट्वीट किये और उनकी मदद के लिए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। बताया जा रहा है कि बाबा को सहायता के रूप में 40 लाख से ज्यादा रुपये मिले थे। दो महीने के अंदर बाबा कांता प्रसाद ने 5 लाख रुपये लगाकर मालवीय नगर में अपने पुराने ढाबे से कुछ ही दूरी पर एक रेस्टोरेंट खोला। वहां पर एक कुक, वेटर और सिक्योरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाये।
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कांता प्रसाद - फोटो : एएनआई
बुजुर्ग कांता प्रसाद ने अमर उजाला संवाददाता को बताया कि उन्हें अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। लागत के अनुसार खर्चा न निकलने पर बाबा ने फरवरी 15 को अपना रेस्टोरेंट बंद कर दिया और वापस अपने उसी पुराने ढ़ाबे पर पहुंच गए हैं। 

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बाबा का ढाबा - फोटो : एएनआई
बाबा ने बताया कि मासिक खर्च लगभग 1 लाख रुपये था, जबकि औसत मासिक बिक्री कभी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई। कांता प्रसाद के खर्चे में 35000 रुपये रेस्टोरेंट का किराया, 36000 रुपये तीन कर्मचारियों की सैलरी और 15 हजार रुपये राशन, बिजली और पानी के लिए शामिल था। 
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Gaurav Wasan with Baba ka Dhaba owners - फोटो : Instagram
रेस्टोरेंट पर धीरे-धीरे ग्राहकों का आना कम होता गया और रेस्टोरेंट का खर्चा बढ़ने लगा। इसके बाद बाबा को अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। वह बताते हैं कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से 17 दिनों के लिए पुराने ढाबे को बंद करना पड़ा। 
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baba ka dhaba - फोटो : अमर उजाला
इस वजह से बिक्री प्रभावित हुई और लॉकडाउन से पहले जहां दैनिक बिक्री 3500 रुपये होती थी, वो अब घटकर अब 1000 रुपये हो गई है। ये हमारे परिवार के गुजारे के लिए पर्याप्त नहीं है। बाबा अब लोगों से सहायता की आस लगाए बैठे हैं।
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