निर्भया
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गांव वालों को उस कांड की आज तक याद है, लेकिन उससे कोई मतलब नहीं। वह आए या न आए, इससे हम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। सजा देने का हक हम लोगों को नहीं है। उसने जो किया, उसकी सजा उसे मिल गई है। अब वह गांव में आकर रहे या कहीं और रहे। इससे किसी को मतलब नहीं है। शुरू में गांव वालों में गुस्सा था, लेकिन अब सब अपने अपने काम में लग गए हैं। उसका पता नहीं है कि वह कहां है, लेकिन वह जहां भी रहे, हमें कुछ लेना देना नहीं है।