साहब, मेरे पीयूष को जमीन खा गई है या आसमां निगल गया है। पुलिसवाले कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। अब तो वह सीधे मुंह बात भी नहीं करते। कम से कम इतना तो बता दें कि पीयूष जिंदा है या नहीं। क्योंकि पिछले छह साल से बेटे के लिए पुलिस के चक्कर लगाते-लगाते अब थक चुके हैं।
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'साहब! मेरे पीयूष को जमीन खा गई या आसमां निगल गया'
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ये दास्तां है एनआईटी-5 एफ ब्लाक निवासी राकेश वैद्य की। उनके पांच वर्षीय बेटे पीयूष का बदमाशों ने 20 जनवरी 2010 को उनके घर के सामने बने पार्क में खेलने के दौरान अगवा कर लिया था।
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‘अमर उजाला’ से अपने दर्द को बयां करते हुए राकेश वैद्य ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने एनआईटी थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी। लेकिन छह साल बाद भी पुलिस न तो बेटे को बरामद कर पाई और न ही अपहरणकर्ताओं का कोई पता चला।
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आंख में आंसू लिए पीयूष की मां अरुणा वैद्य का कहना है कि छह साल बाद भी पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है कि उनका बेटा इस दुनिया में है या नहीं। जब भी इस बाबत पुलिसकर्मियों से बातचीत की जाती है तो वह सीधे मुंह बात करने को तैयार नहीं होते। आखिर हम किसके पास जाएं।
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पिछले दिनों उन्होंने इसकी शिकायत सीएम विंडो में की थी। उसके जवाब में पुलिस ने अपनी कहानी बनाकर भेज दी। पुलिस का दावा है कि उन्होंने इस मामले में 30 व्यक्तियों से व्यक्तिगत और 100 व्यक्तियों से परोक्ष रूप से पूछताछ की। लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा है।
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ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर पीयूष है कहां। इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है। उधर एसीपी रामेश्वर लांबा का कहना है कि अभी उस बारे में कुछ सुराग नहीं लग पाया है। मामले की जांच की जा रही है।