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दिल्ली पहुंची शेल्टर होम केस की आग, पीड़िताओं का चौंकाने वाला खुलासा, बांधकर की जाती थी हैवानियत

Tue, 31 Jul 2018 05:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं के सामने आने पर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के घर के बाहर प्रदर्शन किया। गुस्साए कार्यकर्ता इस बीच उनके लिए चूड़ियां भी लेकर पहुंचे। स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन की अगुवाई दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विकास चिकारा और सचिव तौकीर आलम ने की। इस बीच प्रदर्शनकारी रोष जताते हुए स्मृति ईरानी के लिए चूड़ियां लेकर पहुंचे औरी जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका प्रदर्शनकारी जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण में रखने के लिए मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। अगर आप शेल्टर होम की पीड़िताओं की दर्दभरी कहानी पढ़ेंगे तो सच में आपकी आंखों से आंसू निकल आएंगे, पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियां...
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
बालिका गृह मामले में बिहार सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है। मुजफ्फरपुर में बच्चियों के साथ हुए यौन शोषण मामले में अब इसकी जांच सीबीआई करेगी। सीबीआई ने मुजफ्फरपुर के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित इस बालिका गृह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने बच्चियों का मानसिक, शारिरिक और यौन शोषण किया।
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
29 नाबालिग लड़कियों में से छह गर्भवती हो गई थीं
मालूम हो कि बालिका गृह में बच्चियों के साथ कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। यहां 29 नाबालिग लड़कियों में से छह गर्भवती हो गई थीं। इनमें से तीन का अबॉर्शन भी करवाया गया था। इतना ही नहीं मेडिकल जांच में साबित हुआ है कि गर्भवती हुई लड़कियों की उम्र 7 से 14 वर्ष के बीच है। इस पर मुजफ्फरपुर एसएसपी हरप्रीत कौर ने कहा था कि बालिका गृह की 42 में से 34 बच्चियों से बलात्कार की बात सामने आई है। जहां पीएमसीएमच की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पहले 29 बच्चियों से रेप की बात कही जा रही थी।

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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
लड़कियों ने सुनाई आपबीती
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में दस वर्ष की एक पीड़िता ने कहा कि सूरज के ढलते ही बालिका गृह की लड़कियों के बीच दहशत फैल जाती थी। रातें आतंक की तरह बीतती थीं। दस वर्षीय एक और पीड़िता ने बताया कि कहना नहीं मानने वाली लड़कियों की वह डंडों से पिटाई करता था। 14 साल की एक अन्य पीड़िता ने बताया कि बृजेश के बालिका गृह आते ही कई लड़कियां तो डर से कांपने लग जाती थीं। उसे हंटरवाला अंकल कहा जाता था।
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
विरोध करने पर हाथ पांव बांध दिए जाते थे
कोर्ट के सामने 7 साल की एक पीड़िता ने बताया कि रेप के दौरान उसके हाथ पैर बांध दिए जाते थे। विरोध करने पर 3 दिन तक भूखा रखा जाता था और बेरहमी से पिटाई होती थी। बृजेश ठाकुर से माफी मांगने और उसके सामने सरेंडर करने पर ही खाना दिया जाता था। 7 साल की एक लगभग गूंगी पीड़िता ने बताया कि उसे 2 दिन भूखा रखा गया और वह हार गई। उसके साथ लगातार प्रताड़ना और रेप के बाद वह कई दिनों तक चलने-फिरने के काबिल नहीं रही। पीड़िताओं ने बताया था कि उनकी कई साथियों को रात में बाहर ले जाया जाता था और वह अगले दिन वापस लाई जाती थी। बाहर जाने वाली पीड़िताओं को नहीं पता होता था कि कि उन्हें कहां ले जाया जाता था।
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
11 साल की एक पीड़िता ने अपने बलात्कारी की पहचान तोंदवाले अंकल के रूप में की थी, तो दूसरी ने उसी अपराधी की पहचान बताते हुए कहा कि वह मूंछवाला भी था। पीड़िताओं ने बताया था जब वह तोंदवाला और मूंछवाला नेताजी वहां होते थे तो किसी को भी रूम में आने की इजाजत नहीं होती थी। पीडिता ने कोर्ट को बताया कि वहां काम करने वाली किरण बच्चियों की शिकायत को बार-बार नजरअंदाज कर देती थी। वहीं दूसरी कर्मचारी नेहा के बारे में सात साल की पीड़िता ने बताया कि ऐसी शिकायत करने पर वह बुरी तरह प्रताड़ित करती थी। किरण और नेहा को भी मामले में 10 आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
केस दर्ज होने के बाद भी मिला प्रोजेक्ट मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुई शर्मनाक घटना के बाद अब इसे चलाने वाली एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को एक और सरकारी प्रोजेक्ट आवंटित किए जाने का मामला सामने आया है। बता दें कि स्टेट वेलफेयर डिपार्टमेंट ने मुंबई की संस्था टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेंस द्वारा यह प्रोजेक्ट दिया गया है। खास बात यह है कि बालिका गृह में यौन शोषण की रिपोर्ट सौंपने के एक महीने बाद यह प्रोजेक्ट आवंटित किया गया है।

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muzaffarpur shelter home rape protest - फोटो : अमर उजाला
बच्चियों को लगाए जाते थे मिर्गी के इंजेक्शन, मिलीं 63 प्रकार की दवाएं बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में रोज नए खुलसे सामने आ रहे हैं। बच्चियों के इलाज के नाम पर बालिका गृह में एक कमरा बना हुआ था। जिसपर कल पुलिस ने छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान यहां से 63 प्रकार की दवाएं मिली हैं। जिन्हें जब्त कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक दुष्कर्म से पहले बच्चियों को मिर्गी के इंजेक्शन लगाकर बेहोश कर दिया जाता था।

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MUZAFFARPUR
मामले में आईजी और डीआईजी ने कमरा देखने के बाद इसकी एफएसएल और डॉक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कमरे में रखे सभी सामानों की जांच की गई। कमरे में अलमारी और बक्से भी मौजूद थे। इस दौरान 63 तरह की दवाएं मिलीं। दवाइयों में मिर्गी के रोगियों के इंजेक्शन भी मिले। डॉक्टरों ने कहा कि यह इंजेक्शन सामान्य व्यक्ति को भी बेहोश कर सकता है।

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बालिका गृह में आती थीं सेक्स वर्कर  जांच में पता चला कि बालिका गृह में सेक्स वर्करों को भी लाया जाता था। बालिका गृह के फर्श पर एफएसएल को एक कागज का टुकड़ा मिला है। इसे पढ़ने पर सेक्स वर्करों के भी बालिका गृह में आने के सबूत मिले। इस कागज में आबदा हाईस्कूल के पास भी सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा आश्रय गृह चलाने की बात भी लिखी है। मुजफ्फरपुर कांड में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती जा रही है, एक से बढ़कर एक रसूखदारों के नाम सामने आ रहे हैं। अब इनमें और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं, क्योंकि बिहार सरकार के इस पूरे कांड की अब सीबीआई जांच होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार पुलिस के मुखिया के एस द्विवेदी, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह को तत्काल ही इस केस को सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया था। लेकिन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट के बाद जो पहली गिरफ्तारी हुई वो थी ब्रजेश ठाकुर की। वही ब्रजेश ठाकुर, जिसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से बालिका गृह चलाया जा रहा था।

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ब्रजेश ठाकुर रहने वाला मुजफ्फरपुर का ही है ब्रजेश के पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से एक हिंदी अखबार शुरू किया था। इस अखबार का नाम था प्रात: कमल। राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी। बिहार में छोटे अखबारों को शुरू करने वाले शुरुआती नामों में से एक नाम राधामोहन ठाकुर का भी था। धीरे-धीरे राधामोहन ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लेने शुरू कर दिए।

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muzaffarpur - फोटो : SELF
इन विज्ञापनों से राधामोहन ठाकुर ने खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया। वो रियल स्टेट का शुरुआती दौर था, तो राधामोहन ठाकुर ने इससे भी खूब पैसे बनाए। जब पिता की मौत हो गई, तो विरासत संभालने का जिम्मा आया ब्रजेश ठाकुर पर। पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी था। इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने रियल स्टेट के कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।

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बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की पीड़िताओं ने बताया है कि किस तरह उनसे रात दर रात बलात्कार होता था। उन्हें भूखा रखने के साथ ही ड्रग्स दिए जाते थे। इन सभी लड़कियों की उम्र 7-18 साल की है। जिसमें से ज्यादातर को बोलने में परेशानी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें खाने में दवाएं मिलाकर दी जाती थीं, नग्न सोने पर मजबूर किया जाता था और विरोध करने पर बुरी तरह से पीटा जाता था। हालिया मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को बलात्कार पीड़िताओं की संख्या 34 पर पहुंच गई।

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एक 10 साल की पीड़िता ने पॉक्सो कोर्ट को बताया, 'मेरे खाने में नशे की दवाएं मिलाई जाती थी जिसकी वजह से मुझे बेहोशी महसूस होती थी। मुझसे आंटियां कहती थीं कि ब्रजेश सर के कमरे में सो जाओ और वह उन आगंतुकों के बारे में बात करते थे जो आने वाले होते थे। जब सुबह मैं उठती थी तो मुझे अपनी पैंट जमीन पर गिरी हुई मिलती थी।' बालिका गृह में रहने वाली ज्यादातर लड़कियां अनाथ हैं या फिर खोई हुई हैं। जिन्हें पुलिस यहां भेज देती थी।

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इस गृह का संचालन सेवा संकल्प एवं समिति करती है जिसके मुखिया का नाम ब्रजेश कुमार ठाकुर है। ठाकुर अपने स्टाफ के 9 सदस्यों के साथ इस समय न्यायिक हिरासत में है। पीड़िताओं के खाने में मिलाए जाने वाली नशे की दवा को कीड़े की दवाई कहा जाता था। एक पीड़िता ने बताया, 'आंटियां मुझे रात में कीड़े की दवाई देती थीं। जिसकी वजह से मैं सो जाया करती थी। सुबह मेरा पूरा शरीर दर्द करता था। कई बार हमारे पेट में लात मारी जाती थी।' दूसरी लड़कियों ने भी बताया कि उनकी पिटाई की जाती है।

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घरेलू काम करने वाली एक लड़की ने बताया कि अगर वह दवा खाने से मना करती थी तो तोंद वाला बड़ा सा आदमी उन्हें मारा करता था। दूसरी लड़की ने बताया कि ब्रजेश उसे अपने ऑफिस ले जाकर उसके निजी अंगों को नोचा करता था। मासूम ने कहा, 'वह मेरे निजी अंगो को इतनी बुरी तरह से नोचता था कि उसमें कटने के निशान हो जाते थे।' पीड़िताओं ने बताया है कि कई बार उनपर गर्म पानी और तेल फेंका जाता था। इसी बीच एक पीड़िता ने बताया कि वह और दूसरी लड़कियां अपने हाथ पैरों में टूटे हुए ग्लास से घाव किया करती थीं ताकि उनसे जबरन गंदा काम ना करवाया जा सके।
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पुलिस का मानना है कि पिछले पांच सालों में 470 लड़कियों को बालिका गृह लाया गया था। पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने कई बार लड़कियों के चिल्लाने की आवाज सुनी थीं लेकिन किसी ने इसकी शिकायत नहीं की। पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया कि लड़कियां कभी कैंपस के अंदर या फिर छत पर घूमती हुई दिखाई नहीं दीं। इन क्वार्टर्स में कोई खिड़की नहीं है केवल वेंटिलेटर हैं। चीखने-चिल्लाने की आवाजें घर से अक्सर आया करती थीं। हालांकि हमने कभी ब्रजेश के मामले में दखल देने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह एक दबंग इंसान है।
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